Wednesday, January 28, 2015

बाइनरी अंकों को शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वतीजी की चुनौती

माघ शुक्ल पक्ष नवमी, कलियुग वर्ष ५११६
इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) : कंप्यूटर बाइनरी अंकों पर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने सवाल उठाए हैं। सनातन धर्म के पथ प्रदर्शक माने जाने वाले शंकराचार्य ने “द्वैंक पद्धति” (बाइनरी सिस्टम) नामक शोध पुस्तक में इसे सिद्ध भी किया है।
पुस्तक में कहा गया है कि बाइनरी अंकों में एक सीमा के बाद तारतम्यता भंग हो जाती है। स्वामी निश्चलानंद अब तक गणित की १० पुस्तकें लिख चुके हैं। इनमें अंक पद्यम या सूत्र गणित, स्वस्तिक गणित, गणित दर्शन, शून्येक सिद्धि, द्वैंक पद्धति आदि शामिल है। इन पुस्तकों पर ऑक्सफोर्ड से लेकर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालयों तक शोध हो रहे हैं।
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती
स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जगन्नाथपुरी स्थित गोवर्धनपीठ के शंकराचार्य हैं। शंकराचार्य के अनुसार शुक्ल यजुर्वेद के तहत आने वाला रुद्राष्टाध्यायी इसका बेहतरीन उदाहरण है। इसमें श्लोक आते हैं एका च मे, पंच च मे, सप्त च मे आदि। यह तथा ऐसे अनगिनत ऋचाएं यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि वेदकाल के भारतीय ऋषि न सिर्फ अंकों से परिचित थे वरन गणित में आज प्रचलित विभिन्न क्रियाएं जिसमें जोड़, घटाना, गुणा, भाग से लेकर बीजगणित, रेखागणित, त्रिकोणमिति आदि शामिल हैं, से भी परिचित थे।

९० वर्षों से चल रहा गणित पर अनुसंधान

गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी भारती कृष्ण तीर्थ ने वेदों की ऋचाओं में गणित के सूत्र खोज निकाले थे और वैदिक गणित के नाम से दुनिया को परिचित कराया था। बिना कैलकुलेटर या कंप्यूटर बड़ी से बड़ी और जटिल गणना सरलता से करने की इस पद्धति की आज दुनिया कायल है।
मूलत : बिहार के हरीपुर बख्शी टोला निवासी स्वामी निश्चलानंद १० वीं तक पढ़ने के बाद वेदांगों के अध्ययन के लिए काशी आ गए थे। स्वामी निरंजन देव तीर्थ के बाद १९९२ में पुरी पीठ के शंकराचार्य बनाए गए। इसके साथ ही गणित के दार्शनिक पक्ष पर उनका चिंतन शुरू हुआ। २००६ में अंक पद्यम नामक पुस्तक के रूप में यह चिंतन सामने आया।
स्त्रोत : नई दुनिया

दो जुलाई से शुरू होगी बाबा अमरनाथ यात्रा

जम्मू - बाबा अमरनाथ यात्रा इस वर्ष दो जुलाई २०१५ से शुरू होगी। ५९ दिन तक चलने वाली यह यात्रा २९ अगस्त रक्षाबंधन वाले दिन संपन्न होगी। यात्रा के लिए एडवांस पंजीकरण एक मार्च से शुरू होगा।
श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की २८वीं बैठक में यह फैसला किया गया। राज्यपाल एनएन वोहरा जो बोर्ड के चेयरमैन भी हैं, की अध्यक्षता में राजभवन में हुई बैठक में इस वर्ष की बाबा अमरनाथ यात्रा शुरू करने की तिथि व अन्य प्रबंधों पर विचार हुए। बोर्ड ने श्री श्री रविशंकर के नेतृत्व में सब कमेटी का गठन किया था, जो बोर्ड को बाबा अमरनाथ यात्रा की अवधि के लिए सुझाव देती है। बोर्ड ने यह पाया कि वर्ष २०१४ की बाबा अमरनाथ यात्रा के दौरान चंदनबाड़ी रूट पर भारी बर्फबारी हुई थी, जिस कारण यात्रा शुरू करने में देरी हो गई। उस समय यात्रा दो जुलाई २०१४ को ही शुरू हो पाई थी। बोर्ड ने इस वर्ष २०१५ की यात्रा को दो जुलाई से शुरू करने का फैसला किया। पुरुषोत्तम पूर्णिमा पर शुरू होकर यात्रा श्रावण पूर्णिमा रक्षाबंधन वाले दिन २९ अगस्त को समाप्त होगी। इस तरह से इस वर्ष ५९ दिन की यात्रा होगी।
स्त्रोत : दैनिक जागरण

Tuesday, January 27, 2015

राष्ट्रवादी चिंतक और स्वदेशी के अग्रदूत लाला लाजपत राय का पुण्य स्मरण

 जालंधर (विसंके). पंजाब केसरी के नाम से विख्यात लाला लाजपत राय न केवल एक महान क्रांतिकारी बल्कि परम राष्ट्रवादी चिंतक और स्वदेशी आंदोलन के दूत थे. उनके प्रेरक जीवन से मार्गदर्शन ले हजारों युवा देश के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े और अपना जीवन देश पर न्योछैवर कर दिया. इन्हीं बलिदानों के फलस्वरूप 15 अगस्त, 1947 को देश सदियों की परतंत्रता से मुक्त हो पाया. यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बौद्धिक प्रमुख श्री विजय सिंह ने शहीद भगत सिंह चौक पर स्थित विश्व संवाद केंद्र के परिसर में लाला लाजपत राय की 28 जनवरी को 150 वीं जयंती के उपलक्ष में आयोजित परिचर्चा को संबोधित करते हुए व्यक्त किये. इस परिचर्चा में इलाके के प्रतिष्ठित बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया और लाला जी को श्रद्धासुमन अर्पित किये.
श्री विजय सिंह जी ने कहा कि लाला जी ने अपने दृढ़ चरित्र से कांग्रेस को ब्रिटिश भक्ति से देश भक्ति की ओर मोड़ा. पहले कांग्रेस का सारा कामकाज अंग्रेजी में चलता था परंतु लाला जी ने इलाहबाद अधिवेशन में सर्वप्रथम हिंदी में भाषण देकर इस परंपरा को तोड़ा. उन्होंने कांग्रेस की कार्यवाही के आरंभ और समापन में ‘लोंग लिव किंग-लोंग लिव क्वीन’ की परंपरा को बंद करवाया और 1897 में जब देश में प्लेग फैला था, उन्होंने लाहौर में ब्रिटिश महारानी की प्रतिमा लगाने का सफल विरोध किया.
Lala Lajpat Rai Jayantiश्री सिंह ने कहा कि लाला जी केवल क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं बल्कि एक महान पत्रकार, स्वदेशी के अग्रदूत और राष्ट्रवाद के स्तंभ भी थे. उन्होंने ‘एंग्लो वैदिक’ समाचारपत्र का प्रकाशन कर देश विशेषकर पंजाब में राष्ट्रवाद की अलख को जगाया. उन्होंने स्वदेशी के मंत्र को इस तीव्रता से घर-घर पहुंचाया कि मानचेस्टर व लंकाशायर के कारखानों तक उसका असर दिखा. उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक व लक्ष्मी बीमा कंपनी की स्थापना की और सात बार बैंक के डायरेक्टर रहे. वे देशवासियों को मानसिक, आर्थिक व सामाजिक तौर पर परतंत्रता से मुक्त करना चाहते थे. 1907 में उनकी सभा में ही सबसे पहले बांके दयाल ने ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ गीत गाया जो बाद में कांग्रेस के हर अधिवेशन में गाया जाने लगा. यही गीत आगे जाकर भगत सिंह के चाचा स. अजीत सिंह के ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ आंदोलन का बीजमंत्र बना. उन्होंने लाला लाजपत राय को केवल भारत का ही नहीं बल्कि मानवमात्र का नेता बताते हुए उनके जीवन पथ पर चलने का संदेश दिया.
परिचर्चा की प्रस्तावना में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख श्री रामगोपाल जी ने लाला जी के जीवन वृतांतों पर प्रकाश डाला. दैनिक भास्कर के स्थानीय संपादक श्री योगेश्वर दत्त ने महापुरुषों को क्षेत्रों व विशेषणों से बांधने को गलत बताते हुए कहा कि इससे उनके विराट चरित्र दब जाते हैं. दूरदर्शन के उप-महानिदेशक श्री नरेंद्र सिंह ने मीडिया जगत को महापुरुषों के जीवन वृतांतों को प्रचारित करने का आग्रह किया. पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता व जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. रणवीर ने इस बात पर चिंता जताई कि हम अपनी संस्कृति एवं महापुरुषों से कट रहे हैं. एडवोकेट वीरेंद्र शर्मा ने महापुरुषों की परंपरा को आगे ले जाने की जरूरत पर जोर दिया. वरिष्ठ पत्रकार श्री कृष्ण लाल ढल्ल ने इस बात पर चिंता जताई कि स्वतंत्रता संग्राम में हजारों महापुरुषों ने अपने जीवन का बलिदान दिया परंतु आज कुछ एक लोगों को ही उभारा जा रहा है. उन्होंने कहा कि लाला लाजपत राय देश के सांस्कृतिक मूल्यों पर ही आजादी चाहते थे. वरिष्ठ स्तंभकार श्री सुरेश सेठ ने लाला जी के जीवन के अनछुये पहलुओं पर प्रकाश डाला. प्रसिद्ध नेत्ररोग विशेषज्ञ डा. विजय जोशी ने नई पीढ़ी में संस्कार पैदा करने की जरूरत पर जोर दिया. चार्टर्ड एकाउंटेंट श्री विक्रम अरोड़ा ने इस बात पर चिंता जताई कि लाला जी के जीवन पर आधारित साहित्य का नितांत अभाव है. उन्होंने इस कमी को पूरा करने पर जोर दिया. परिचर्चा के समापन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत-सह संघचालक ब्रिगेडियर (से.नि) जगदीश गगनेजा ने सभी आगतों को धन्यवाद दिया.
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BABURAO PALDHIKAR 94TH BIRTH ANNIVERSARY OBSERVED

BABURAO  PALDHIKAR 94TH BIRTH ANNIVERSARY  OBSERVED

Bhubaneswar-Utkal  Bipanna  Sahayata  Samiti  observed the 94th birth anniversary of  Rashtriya Swayamsevak  Sangh  Odisha  founder  Baburao Paldhikar  here today. Chief guest on this occasion Shri Saroj Mitra,Swadeshi Jagaran Manch All India Co-convener  spoke on how Baburao Paldhikar had propagated the RSS works in Odisha and how he used to focus on to devlop local leadership.
Chief speaker on this occasion, noted social activist  Gopal Prasad Mohapatra recalls Baburao Paldhikar’s vast  ideal personality . According to him, the way Shivaji vowed to protect our nation, religion and its culture, Baburao too vowed and followed Shivaji from childhood to protect our nation,its culture and religion.He marched ahead in good times and never broke down during harsh times.He was never seen getting angry as he always keeps himself  busy with work for the society.His life story paved the way for many RSS karyakartas of Odisha. Hailing from Maharashtra,he changed the scenario of Rashtriya Swayamsevak  Sangh in Odisha creating uncountable karyakartas. He was an ideal Swayamsevak. His behavior was such that a foe will become a friend forever. He kept his vow to the very end of his life.

Felicitated guest Shri Ajit Rath,Senior advocate of Odisha High court highlighted on many  Baburao Paldhikar’s personality such as organizational capability,discipline,building of characters,nationalistic approach,protection of ones own religion and culture.
Among others Banabasi Kalyan Ashram State general secretary Dr Laxmikant Das spoke about his working procedure and said that he showed us all that to get a good name in the society,you don’t have to have a great fame or designation. 
                               

                                            

Monday, January 26, 2015

NETAJI AND VEER SURENDRA SAI JAYANTI CELEBRATED IN SAMBALPUR

NETAJI AND VEER SURENDRA SAI JAYANTI CELEBRATED IN SAMBALPUR

Sambalpur,vsk,23/1-A general meeting was organized by Rashtriya Swayamsevak Sangh on the occasion of Veer Surendra Sai jayanti and Netaji Subash Bose jayanti at Gobindatola in Sambalpur. Chief guest Professor Bhakta Prasad Nanda, Chief speaker Rashtriya swayamsevak sangh Akhila Bharatiya Saha Prachar pramukh Nandakumar ji, Pranta Sanghachalak Bipina Bihari Nanda and Nagar Sanghchalak Dr.Sukanta Panigrahi were present on the occasion. The event was co-ordinated by Zilla Karyabaha Ramakrishna Naik,Bishwaranjan Pujari, Braja Bihari Panda. A root march was organized between Dhanupalli Sishu Mandir and Gobindatola. 

ओडिशा में राष्ट्रवादी विचारों के प्रसार में राष्ट्रदीप की भूमिका महत्वपूर्ण – मुजफ्फर हुसैन

राष्ट्रदीप का 20वां वसंत मिलन कार्यक्रम आयोजित

ओडिशा में राष्ट्रवादी विचारों के प्रसार में राष्ट्रदीप की भूमिका महत्वपूर्ण – मुजफ्फर हुसैन
कटक । उपभोक्तावाद के इस जमाने में राष्ट्रवादी विचारों का प्रचार प्रसार की बहुत अधिक आवश्यकता है । साप्ताहिक पत्रिका राष्ट्रदीप का ओडिया भाषा में राष्ट्रवादी विचारों के  प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका रही है ।  वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभलेखक मुजफ्फर हुसैन ने यह बात कही ।स्थानीय शताब्दी भवन में  बसंत पंचमी के अवसर पर साप्ताहिक पत्रिका राष्ट्रदीप के 20वें वसंत मिलन कार्यक्रम में उदवोधन देते हुए उन्होंने यह बात कही ।
श्री हुसैन ने कहा कि पुरातन काल से भारत एक राष्ट्र रहा है । भारत का विभाजन अप्राकृतिक है ।  उन्होंने कहा कि भारत फिर से अखंड बनेगा ।  आगामी 40 सालों के अंदर पाकिस्तान अपने द्वारा ही समाप्त हो जाएगा ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि तथा उत्तर ओडिशा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रफुल्ल मिश्र ने कहा कि अपने  मिट्टी, संस्कार व संस्कृति के बारे में  जानकारी प्रदान करने के लिए राष्ट्रदीप जैसे पत्रिका ने सराहनीय कार्य किया है ।  उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति को समाप्त करने की साजिश रची जा रही है । देश का प्रबृद्ध समाज जाने अंजाने में इसका शीकार हो रहा है । उन्होंने केन्द्रीय विद्यालयों में संस्कृत के बजाय जर्मन भाषा को पढाये जाने के पूर्व सरकार के फैसले को  भारत की आत्मा संस्कृत को समाप्त करने की साजिश बताया । उन्होंने कहा कि इस तरह के षडंयंत्रों से देश की जनता को जागरुक करने की आवश्यकता है ।
कार्यक्रम में राष्ट्रदीप के संपादक शिव नारायण सिंह ने राष्ट्रदीप के बारे में जानकारी देने के साथ साथ अतिथिय़ों का परिचय कराया । कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रदीप प्रकाशन के अध्यक्ष नर सुंदर मिश्र  ने किया ।  राष्ट्रदीप प्रकाशन के सचिव दुर्गाचरण बेहेरा ने धन्यवाद दिया । राष्ट्रदीप के प्रबंधन धृबचरण बेहेरा भी इस अवसर पर उपस्थित थे ।

ओडिशा में गिरफ्तार ISI एजेंट फरीदकोट भेजता था तस्वीरें

भुवनेश्वर - ओडिशा के चांदीपुर इलाके से सुरक्षा एजेंसियों ने संदिग्ध आईएसआई एजेंट को गिरफ्तार किया है। बालेश्वर से करीब १५ किलोमीटर दूर चांदीपुर में अग्रणी रक्षा प्रतिष्ठान एकीकृत परीक्षण रेंज(आईटीआर) के प्रतिबंधित क्षेत्र से उसे गिरफ्तार किया गया। यह एजेंट फोटोग्राफर के रूप में काम करता था।
इस फोटोग्राफर का नाम ईश्वर बिहारा है जो कि कोलकाता से जुड़े संवेदनशील और खूफिया जानकारी को आईएसआई को पहुंचाता था। आईएसआई इस तरह के एजेंटों को लुभाने के लिए तरह-तरह हथकंडे अपनाती है जिसमें कि पैसे और हनी ट्रैप जैसी चीजें शामिल हैं। कौन है ईश्वर बिहारा? पकड़ा गया ईश्वर बिहारा मयूरभंज जिले के कांतिपुर गांव का रहने वाला है जो कि आईटीआर में एक कैमरामैन के तौर पर साल २००७ में नियुक्त किया गया था। इसका कोई अपराधिक रिकार्ड नहीं है। जो जानकारी हासिल हुई है उसके हिसाब से दस महीने पहले इस पर शक हुआ, जिसकी वजह से इस पर नजर रखी गयी और पाया गया कि इसके अकांउट से चार बार पचास-पचास हजार के ट्रांजेक्शन हुए हैं, जिसकी तफ्तीश करने पर पता चला उसे यह पैसे आईएसआई को कुछ फोटो भेजने के बाद मिले हैं। चार बार पचास-पचास हजार के ट्रांजेक्शन हुए इसके अकाउंट में पैसे मेरठ, अबू धाबी, हैदराबाद और बिहार से आये हैं। पूछताछ में पता चला है कि इसने आईएसआई को कोलकाता की कुछ संवेदनशील लोकेशन की तस्वीरें भेजी हैं। वो अक्सर कोलकाता अपने सीनियर को यह बताकर जाता था कि उसका कैमरा खराब हो गया है और वो इसे रिपेयर कराने जा रहा है।
पाकिस्तान के फरीदकोट से जुड़े तार पकड़े गये लोगों से पता चलता है कि इनके तार फरीदकोट पाकिस्तान से जुड़े हुए हैं। आईएसआई का नया ठिकाना फरीदकोट पाकिस्तान में बताया जा रहा है। इस ट्रैप में काफी प्रशिक्षित लोग बताये जा रहे हैं और इनकी ओर से लोग केवल भारत में ही बल्कि दूसरे देशों में भी भेजे जा रहे हैं। वनइंडिया को मिली पुख्ता जानकारी के हिसाब से २० लोग, देशों में भेजने वाले लोगों को ट्रेनिंग देते हैं। पाकिस्तान में इस्लामिक स्टेट के २ संदिग्ध गिरफ्तार वैसे पाकिस्तान के लाहौर शहर से भी दो आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के दो संदिग्ध सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। इस्लामिक स्टेट के दो संदिग्ध सदस्यों को शहर के मांगा मंडी इलाके से गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई इस्लामिक स्टेट से जुड़े एक आतंकवादी से मिली जानकारी के आधार पर की गई, जिसे गिरफ्तार किया गया था। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने इस्लामिक स्टेट से जुड़े संदिग्धों और अन्य आतंकवादी संगठनों के सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की थी।

‘फादर’ कर रहा था ‘नन’ से दुष्कर्म, मामला दर्ज

सागर (मध्यप्रदेश) : मध्यप्रदेश के सागर में चर्च के फादर के खिलाफ दुष्कर्म व जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज किया गया है। मामला दर्ज होने के बाद से आरोपी फादर फरार है। पुलिस फरार फादर की सरगर्मी से तलाश कर रही है।
गौरतलब है कि श्यामपुरा चर्च की नन ने फादर फ्रिजो चिरमिल की हरकतों से परेशान होकर वर्ष २०१२ में काम छोड़ दिया था। जिसके बाद वह एक स्कूल में टीचर बन गई। फादर फ्रिजो चिरमिल का स्थानांतरण दूसरे चर्च में हो जाने की सूचना मिलने पर पीडि़ता नन महिला थाने पहुंची।
नन ने थाने में फादर फ्रिजो चिरमिल के खिलाफ दुष्कर्म करने और जान से मारने की धमकी देने की शिकायत दर्ज कराई। थाने में पीडि़ता नन के लिखित बयान भी लिए गए। महिला थाना प्रभारी उपमा सिंह ने बताया कि शिकायत पत्र और बयान के आधार पर फादर फ्रिजो चिरमिल के खिलाफ धारा ३७६, ५०६ के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। मामला दर्ज होने के बाद से आरोपी फादर फरार है।
स्त्रोत : जागरण

धर्म स्वतंत्रता विधेयक को किया जाए मजबूत : विहिंप

शिमला (हिमाचल प्रदेश) : विश्व हिंदू परिषद ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि धर्म स्वतंत्रता विधेयक और मजबूत हो, इसके लिए मार्च में विधानसभा सत्र के दौरान इस पर चर्चा कर कानून को लाया जाए। साथ ही लव जिहाद व अवैध घुसपैठ पर भी ऐसा कानून बनाए जिससे इस पर प्रतिबंध लगाया जा सके।
परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष अमनपुरी ने रविवार को शिमला से जारी प्रेस बयान में प्रदेशवासियों को ४५ वें राज्यत्व दिवस पर बधाई दी। परिषद उपाध्यक्ष ने कहा है कि मुख्यमंत्री ने धर्म स्वतंत्रता विधेयक को और मजबूत करने का आश्वासन दिया है। उनसे इस विषय पर परिषद ने मिलकर मसला उठाया है।
परिषद की प्रातीय कार्यकारिणी एवं कार्यसमिति की बैठक ३१ जनवरी व पहली फरवरी को सोलन में रहेगी। बैठक में प्रात के सभी पदाधिकारी तथा उतर भारत के क्षेत्र संगठन मंत्री करुणा प्रकाश विशेष रूप से इस बैठक में उपस्थित रहेंगे। बैठक में विहिप स्वर्ण जयंती हिंदू सम्मेलनों की रूपरेखा व धर्मांतरण, लव जिहाद, अवैध बाग्लादेशी घुसपैठ इत्यादि विषयों पर चर्चा करेंगे।
स्त्रोत : जागरण

वंदे मातरम् गाने के लिए मजबूर मत करों – उपेंद्र कुशवाहा, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री

पटना (बिहार) : केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को कहा कि देश में किसी को भी वंदे मातरम गाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
कुशवाहा बिहार में बीजेपी की सहयोगी पार्टी, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष हैं। उन्होंने गोपालगंज जिले के गांव के एक स्कूल में वंदे मातरम गाने को लेकर उठे विवाद के बाद मीडिया से यह बात कही।
कुशवाहा ने कहा, ”किसी को भी वंदे मातरम गाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए और न ही इसे थोपा जाना चाहिए।” कुशवाहा ने कहा कि राष्ट्रपति वंदे मातरम गाने का फैसला लोगों की अपनी मर्जी पर छोड़ दिया जाना चाहिए।
इससे पहले कुशवाहा ने कहा था कि वह धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए किसी कानून के पक्ष में नहीं हैं क्योंकि धर्मांतरण के लिए जबरदस्ती और प्रलोभन पर रोक के लिए पहले से ही संविधान में प्रावधान मौजूद हैं।
स्त्रोत : नवभारत टाईम्स

महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को बंद कर-भारतीय मजदूर संघ

संबलपुर : जनसमस्या और समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर बुधियापाली स्थित सिंहवाहिनी समाज सेवा ने गत गुरुवार को उत्तरांचल राजस्व आयुक्त कार्यालय के समक्ष धरना दिया। धरना का नेतृत्व भारतीय मजदूर संघ के अध्यक्ष जगदीश बिस्वाल कर रहे थे।
इस दौरान राजस्व आयुक्त को राष्ट्रपति के नाम प्रेषित मांग पत्र सौंपा गया। मांग पत्र में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को बंद कराने, बाल मजदूर प्रथा को बंद कराने, असहाय महिलाओं के लिए पुनर्वास की व्यवस्था कराए जाने, अनाथ व असहाय बच्चों के लिए कल्याण कार्यक्रम, स्कूल व शिक्षकों के अभाव को दूर करने, अवैध शराब कारोबार पर अंकुश लगाने, स्कूल की विभिन्न समस्याओं के समाधान, बीडी मजदूर व हरित पत्रिका धारकों को पुनर्वास कराने, पेयजल की सुव्यवस्था, सार्वजनिक वितरण प्रणाली व्यवस्था का लाभ सब तक पहुंचाने, राष्ट्रीय वृद्धावस्था भत्ता शुरू किए जाने एवं बीपीएल परिवार को विद्युत सुविधा उपलब्ध कराने में सहायता आदि की मांग की गई है। धरना देने वालों में करमचंद भोई, प्रतिमा प्रधान, पिंकी बुधिया, कल्याणी बनछोर, लता बगर्ती, सीता बगर्ती, चंद्रकांति प्रधान, लक्ष्मी साहु, ममता पात्र, लक्ष्मी प्रिया प्रधान, नुंआदेई बुधिया, बालमति साहूु, रीता मुंडा व सुवासिनी सालिया समेत अन्य शामिल थे

वन बंधु परिषद, एकल अभियान ओडिशा का भव्य कलशयात्रा

बड़गांव :
ग्रामोत्थान संसाधन केन्द्र जरंगलोई व वन बंधु परिषद, एकल अभियान ओडिशा की ओर से शुक्रवार को त्रायंबकेश्वर मंदिर मंदिर की स्थापना के लिए भव्य कलशयात्रा निकाली गई। पूजा में जजमान के रूप में राउरकेला के हनुमान अग्रवाल व पत्‍‌नी स्वेता कर्ता के रूप में शामिल हुए। विभिन्न धार्मिक प्रवचन व प्राण प्रतिष्ठा शनिवर को एवं रविवार को कृषक मेला व उद्यान प्रदर्शनी का आयोजन होगा।
मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के लिए पुरी के पुजारी श्याम सुंदर पंडा, सरोज रथ, बसंत त्रिपाठी, कुसमी के प्रदीप नंद, कुंतरा के दीपक पंडा शामिल हो रहे हैं। शुक्रवार की सुबह कलश शोभायात्रा निकाली गई जिसमें दो सौ से अधिक महिलायें शामिल हुई। दोपहर में स्वामी जीवन मुक्तानंद महाराज ने धार्मिक प्रवचन दिया। शनिवार को प्राण प्रतिष्ठा, विग्रह पूजन एवं ज्ञान यज्ञ का आयोजन होगा। यहां रविवार को कृषक मेला व उद्यान प्रदर्शनी का आयोजन होगा। यहां विभिन्न प्रकार के फल, सब्जी, हस्त शिल्प, सिलाई सामग्री की प्रदर्शनी लगेगी। आदित्य प्रकाश जलान तकनीकी प्रशिक्षण केन्द्र का उद्घाटन होगा। इसमें विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय संयुक्त महामंत्री व एकल अभियान के केन्द्रीय प्रभारी श्याम जी गुप्ता आमंत्रित हैं। एकल विद्यालय के राज्य संभाग प्रमुख रंजीत स्वाई, विहिप के जिला पदाधिकारी किशोर कुमार पटेल, राउरकेला आरएसएस विभाग सेवा प्रमुख प्रफुल्ल कुमार नायक, बड़गांव के पूर्व चेयरमेन परमानंद बाग, भाजपा कर्मी सुनील नायक, सीतल अग्रवाल, सत्यवान बिसी, एकल विद्यालय जरंगलोई प्रभारी पंकज दास, अर्जुन शर्मा आदि लोग आमंत्रित हैं।

Saturday, January 24, 2015

कश्मीरी पंडितों की स्थिति पर ब्रिटिश संसद में पहली बार प्रस्ताव

मेरठ (विसंके). 25 साल पहले जम्मू-कश्मीर से पलायन करने को मजबूर हुये कश्मीरी पंडितों से संवेदना जताने के लिये ब्रिटेन की संसद में पहली बार प्रस्ताव लाया गया है. हाउस ऑफ कॉमंस के पटल पर रखे गये अर्ली डे मोशन (ईडीएम) में जनवरी 1990 में सीमा पार से आये इस्लामी कट्टरपंथियों के हमले के शिकार बने लोगों के परिवारों और दोस्तों के प्रति सहानुभूति जताई गई है.
ब्रिटिश हिंदुओं की सर्वदलीय संसदीय समूह की ओर से लाये गये ईडीएम को सांसद बॉब ब्लैकमेन ने पेश किया और अन्य चार सांसदों ने इसका समर्थन किया. इसमें कश्मीरी पंडितों के पूजा स्थलों को अपवित्र किये जाने की घटना की निंदा करते हुये उन्हें अब तक न्याय नहीं मिलने पर चिंता भी जताई गई है.
गौरतलब है कि किसी घटना पर सदन का ध्यान खींचने के लिए ब्रिटिश सांसद हाउस ऑफ कॉमंस में ईडीएम लाते हैं. हालांकि ऐसे ईडीएम काफी कम ही होते हैं, जिन पर सदन में बहस होती है. इस सप्ताह की शुरुआत में भी हाउस ऑफ कॉमंस में पंडितों का दर्द बांटने के लिये एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. कश्मीरी पंडित कल्चरल सोसायटी ने एक बयान में ईडीएम को ऐतिहासिक बताया है. पलायन के 25 साल पूरे होने पर सोसायटी की ओर से रविवार को लंदन में एक मार्च का भी आयोजन किया गया.

हिंदू सम्मेलन में लाये जाएंगे पांच प्रस्ताव

मेरठ (विसंके). अपनी स्थापना के स्वर्ण जयंती वर्ष में विश्व हिंदू परिषद देशभर में हिंदू सम्मेलन आयोजित कर रही है. मेरठ में 26 जनवरी को विहिप का हिंदू सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है. इस सम्मेलन में विहिप पांच प्रस्ताव समाज के सामने पेश करेगी. सम्मेलन में विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ प्रवीण भाई तोगड़िया और केपीएस गिल भाग लेंगे.
शुक्रवार को विश्व संवाद केंद्र में प्रेस वार्ता में विहिप के विभाग संगठन मंत्री सुदर्शन चक्र महाराज ने कहा कि जिमखाना मैदान में होने वाले सम्मेलन की तैयारी के लिये कार्यकर्ता दिनरात जुटे हैं. गांवों में जनसंपर्क कर सम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की जा रही है. इस हिंदू सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया भी पहुंचेंगे. विहिप हिंदू सम्मेलन के जरिये हिंदू समुदाय को लव जिहाद, धर्म परिवर्तन आदि के मुद्दों पर एकजुट करने का प्रयास कर रही है. सम्मेलन में आतंकवाद, लव जेहाद, धर्मांतरण पर पांच प्रस्ताव पेश किये जाएंगे और इस पर समाज की राय ली जाएगी. समाज की राय मिलने पर विहिप इन मुद्दों पर संघर्ष करेगा. बजरंग दल के प्रदेश संयोजक बलराज डूंगर का कहना है कि आयोजन को लेकर सभी तैयारी पूरी की जा चुकी हैं, मेरठ का सम्मेलन विराट होगा. इसमें बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे. पंजाब के पूर्व डीजीपी केपीएस गिल विशिष्ट अतिथि होंगे. कार्यक्रम की अध्यक्षता मेरठ महापौर हरिकांत अहलूवालिया करेंगे. कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद सरस्वती महाराज कुलाधिपति गुरुकुल प्रभात आश्रम मौजूद रहेंगे.

Friday, January 23, 2015

जानबूझकर महापुरुषों के इतिहास को युवा पीढ़ी से दूर रखा- इंद्रेश जी

17भुवनेश्वर (विसंके). राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार जी ने कहा कि नेता जी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में गठित प्रथम स्वाधीन भारत सरकार को जापान, जर्मनी, रूस, सहित दस देशों ने मान्यता प्रादन की थी. यही नहीं वह स्वाधीन भारत के प्रथम सेनानायक थे. इंद्रेश जी 23 जनवरी को भुवनेश्वर के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर परिसर (यूनिट-8) में नेताजी सुभाष की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित युवा सम्मेलन में उपस्थित युवाओं को संबोधित कर रहे थे.
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता पश्चात नेता जी उपस्थित होते तो 60 साल में भारत की राजनीति की छवि अलग होती. जानबूझकर सुभाष चंद्र बोस, वीर सावरकर, स्वामी विवेकानंद सहित अन्य महापुरुषों के इतिहास को युवा पीढ़ी से दूर रखा गया. आने वाले वर्षों में क्रांतिकारियों के जीवन को समाज के सामने लाने के लिये प्रयत्न करना आवश्यक है. युवा सम्मेलन में मुख्यातिथि के रूप में सेवानिवृत्त कर्नल हिमांशु शेखर महापात्र ने शिरकत की. उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी देश के लिये कर रहा हूं, यह सोच रख कर कार्य करे. सम्मेलन के दौरान शहीदों के परिवारों को सम्मानित किया गया.
22इससे पूर्व युवा सम्मेलन का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक अद्वैत दत्त ने किया था. उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी का राष्ट्रभक्त होना चरूरी है, यदि समस्त युवा पीढ़ी देश के लिये सोचना शुरू कर दे तो समस्त समस्याओं का समाधान निश्चित है, महानगर संघचालक डॉ बसंत कुमार पति, उत्कल प्रांत के सह प्रांत संघचालक समीर कुमार मोहंती भी उपस्थित थे. सम्मेलन में 1500 से अधिक युवाओं ने भाग लिया. जिसमें महानगर की 50 शाखाओं सहित कालेजों के विद्यार्थी उपस्थित थे. युवाओं ने देशभक्ति गीत, और नेता जी सुभाष चंद्र बोस के जीवन पर नाटक का प्रदर्शन किया. अंत में माननीय इंद्रेश जी ने युवाओं की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया. युवाओं ने दोपहर के समय हाथ में भगवा ध्वज लेकर, विभिन्न महापुरुषों की वेशभूषा बनाकर नगर में शोभा यात्रा भी निकाली.
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सद् साहित्य का लोकसभा अध्यक्षा सुमित्रा महाजन ने किया लोकार्पण

जोधपुर, 23 जनवरी 2015. 26 जनवरी को “प्रचार दिवस ” के दिन विक्रय किये जाने वाले सद् साहित्य का लोकार्पण परिधि गृह में लोकसभा अध्यक्षा सुमित्रा महाजन “ताई जी ” द्वारा किया गया.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार विभाग द्वारा २६ जनवरी को पश्चमी राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर , नागौर, जालोर, सिरोही, पाली, श्रीगंगानगर तथा हनुमानगढ़ जिलों में तहसील स्तर तक सद साहित्य का विक्रय किया जाएगा. इसके लिये कार्यकर्ताओं की टोलियां बन चुकी हैं, तथा विक्रय हेतु साहित्य ग्राम स्तर तक पहुंचाया जा चुका है.
अलग अलग तेरह विषयों की पुस्तकें समाज-परिवार के हर विषय को छूती है, जैसे मातृ शक्ति, स्वदेशी विचार, सामाजिक समरसता, सूर्य नमस्कार, स्वामी विवेकानन्द, हिन्दुत्व, एकात्म मानवदर्शन, जीवन और धर्म. सद् साहित्य लोकार्पण अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार विभाग के कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे.
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डा. आंबेडकर के समग्र जीवन का अध्ययन होना जरूरी – कृष्णगोपाल

1-2मुंबई. 22 जनवरी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि डा. अंबेडकर की प्रतिमा को हमेशा संघर्षवादी की तरह पेश किया गया है. वस्तुत: वह समन्वय के समर्थक और क्रियाशील नेतृत्व भी थे. सामाजिक विज्ञान की अनेकानेक शाखाओं को उन्होने अपनी चिंतनशील प्रज्ञा से नयी दिशा दी. उनके जीवन के इन विविध पहलुओं का अध्ययन होना आवश्यक है. राष्ट्र सुरक्षा पर हिंदी विवेक के विशेषांक के विमोचन अवसर पर सह सरकार्यवाह संबोधित कर रहे थे.
‘हिंदी विवेक’ निर्मित ‘राष्ट्र सुरक्षा’ विशेषांक के विमोचन अवसर पर देश के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर भी उपस्थित थे. कार्यक्रम के विशेष अतिथि के रूप में ले.ज. (सेवानिवृत्त) दत्तात्रेय शेकटकर और सांसद गोपाल शेट्टी तथा हिंदुस्थान प्रकाशन संस्था के अध्यक्ष रमेश पतंगे, प्रबंध संपादक दिलीप करम्बेंलकर और हिंदी विवेक के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी अमोल पेडणेकर मंच पर विराजमान थे.
Dr-Krishna-Gopal-Jan-22-2015रक्षा मंत्री पर्रीकर ने कहा कि हाल ही में हुये नौदल ऑपरेशन के बाद पत्रकारों ने मेरी प्रतिक्रिया के लिये जंग छेड़ दी. उस ऑपरेशन की सत्यता पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े किये गये. जबकि दूसरी ओर फ्रांस में हुये आतंकी हमले का वार्तांकन करने वाले फ्रेन्च माध्यमों ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई. भारतीय माध्यमों को भी इससे सीखने की जरूरत है. राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में हमें अधिक संवेदनशील होने की जरुरत है. सामाजिक स्वास्थ्य ध्यान में लेते हुये माध्यमों को जानकारी देनी चाहिये. किसी भी घटना को प्रस्तुत करते वक्त समाज में आक्रंदन की भावना निर्माण न हो, इसका खयाल रखना चाहिये. स्वनियमन से ही यह संभव हो सकता है.
कृष्णगोपाल जी ने कहा कि डा. अंबेडकर ने अर्थशास्त्र, राज्यशास्त्र, नीतिशास्त्र, न्यायशास्त्र, मानववंश शास्त्र, धर्मविचार और इतिहास जैसे विषयों में अध्ययन कर राष्ट्रविचार की दृष्टी से शास्त्रो का उपयोग किया. समाज के उपेक्षित वर्ग को आत्मसम्मान और आत्मविश्वास देने का अंबेडकर का कार्य महानतम है. वह बिलकुल धर्मविरोधी नहीं थे. श्रद्धा, आस्था का वह सम्मान करते थे. उन्हें साम्यवादी के तौर पर पेश करना गलत है.

Thursday, January 22, 2015

भारत अब तीसरी दुनिया का देश नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति : अरुण कुमार

Arun ji dwara Deep Prajjwalanनई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह संपर्क प्रमुख तथा जम्मू कश्मीर अध्ययन केन्द्र के निदेशक  श्री अरुण कुमार जी ने कहा है कि अब भारत तीसरी दुनिया का देश नहीं, बल्कि एक वैश्विक शक्ति है. दुनिया द्वारा भारत को इस भूमिका में देखे जाने का कारण  यही है कि वैश्विक शक्ति बनने का सामर्थ्य भारत के अलावा किसी अन्य देश के पास नहीं है.
राष्ट्रीय सुरक्षा पर संवाद के बाद आसन्न सुरक्षा चुनौतियों एवं इनके समाधान पर केन्द्रित पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइजर साप्ताहिक के विशेषांकों के यहाँ 21 जनवरी को संपन्न विमोचन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए उन्होंने कहा कि स्थायी वैश्विक शक्ति की संभावना और सामर्थ्य का सबसे बड़ा कारण इसकी सामरिक स्थिति है.
श्री अरुण जी ने ध्यान दिलाया कि कुछ समय पूर्व तक दुनिया के अन्दर ब्रिटेन एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित था. पूरी दुनिया के अन्दर उसका साम्राज्य था, आधी दुनिया में राज्य था. उन्होंने स्पष्ट किया कि आधी दुनिया में उसका राज्य अपने बल पर नहीं बल्कि भारत के कारण था. 1947 से पहले व्दितीय विश्व युद्ध परिदृश्य में जब ब्रिटेन को लगने लगा कि अब उसे यहां से अपना शासन छोड़ना पड़ेगा तो ब्रिटेन अपने हितों की रक्षा कैसे करेगा. इसको लेकर उन्होंने बहुत विस्तृत अध्ययन किया, उस पर कई रिपोर्ट छापीं. उन रिपोर्टों से स्पष्ट होता है कि भारत का महत्व क्या था.
Panchjanya Organiser- Raksha Visheshank Vimochanउन्होंने माओवाद व नक्सलवाद जैसी समस्याओं और पड़ोसी देशों को ओर से पैदा किए जा रहे  संकटों से परे जाकर देखने और सोचने का आह्वान करते हुए कहा कि अब बहुध्रुवीय विश्व की कल्पना में निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय चिंतकों का आकलन है कि आगामी 40 वर्षों में भारत अमेरिका, यूरोपियन यूनियन, रूस, चीन, और जापान के साथ खड़ा होकर विश्व में शक्ति संतुलन बनायेगा.
भारत को ब्रिटिश साम्राज्य की असली ताकत बताते हुए अरुण जी ने कहा कि ब्रिटेन का साम्राज्य प्रारम्भ होता था टर्की, मिस्र और उन सब एरिया से. यह सब यहां से सिंगापुर, मलाया, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और फिर उसके बाद पूर्व अफ्रीका और दक्षिण अफ्रीका. इस पूरे क्षेत्र में उन्होंने तीन बड़े सैन्य अड्डे बनाये. एक पोर्ट ऑफ़ स्पेन, अदन और दक्षिण अफ्रीका में.  तीनों के ऊपर गैरीसन भारत था. चार बड़े गैरीसन भारत के अन्दर बनाये कलकत्ता, चेन्नई, कोच्चि और मुम्बई. पूरा का पूरा हिन्द महासागर ब्रिटिश लेक में परिणत हो गया. उनका सारा का सारा साम्राज्य इसके इर्द गिर्द फैला हुआ था. प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटेन लड़ रहा था. 18 लाख सैनिक थे ब्रिटेन के. इनमें 14 लाख भारतीय थे. द्वितीय विश्वयुद्ध में ब्रिटेन लड़ रहा था उसके 25 लाख सैनिकों में 20 लाख भारतीय थे. दुनिया के अन्दर जहां ब्रिटेन लड़ा वास्तव में ब्रिटेन नहीं लड़ा भारत की मानव शक्ति, भारत की स्ट्रेटेजिक लोकेशन, इसके बूते ब्रिटेन दुनिया के ऊपर राज्य करता था.
Shri Arun jiअपने विद्वतापूर्ण विश्लेषण में उन्होंने कहा, “दुनिया के अन्दर भारत के व्यक्ति का एक महत्व है, मैं केवल स्ट्रैटेजिक लोकेशन की ही बात नहीं कर रहा, भारत के पास जो समाज है, हमारी बहुत सारी बातें हैं, परिवर्तन को स्वीकार करने की हमसे ज्यादा वायब्रेंट सोसायटी नहीं है. जितनी तेजी से तीस-चालीस सालों में हमने अपने आप को बदला है, नयी-नयी बातों को अडॉप्ट किया है, अपनी रूढि़यों को छोड़ा है दुनिया में सामान्यतः सोसायटियां नहीं कर सकती हैं. हम जहां गये हैं वहां हमने अपने प्रति दुनिया को देखने का दृष्टिकोण एक अलग प्रकार का बनाया है. मिलिट्रली, इकोनोमिकली भारत का सब कुछ प्राप्त किया. इन सब बातों के कारण से दुनिया के लोग भारत से एक वैश्विक शक्ति के रूप में भूमिका की अपेक्षा करते हैं”.
उन्होंने यह भी कहा, “वैश्विक शक्ति के रूप में भूमिका अदा करने के लिये हमारे पास सब कुछ है. लेकिन अपने देश के अन्दर जब हम वातावरण देखते हैं तो उस वातावरण के अन्दर  हमारा व्यवहार, हमार एैटिट्यूड एक वैश्विक शक्ति जैसा दिखता नहीं है. उसका कारण क्या है, तो बहुत सारे लोग बहुत सी बातें कहते हैं, वो कहते हैं कि दो बातें बेसिकली हैं जो इस कंट्री में आ जायें तो हमारे पास सब कुछ है, वी कुड चेंज. दुनिया जिस रोल की हमसे अपेक्षा करती है वह हम कर सकते हैं. वो कौन सी दो बातें हैं, वो कहते हैं कि दो बातें इस देश के अन्दर चाहियें, एक- इस देश के अन्दर एक कंट्री ऐसी बननी चाहिये, सोसायटी ऐसी बननी चाहिये जिसकी कोई ऐम्बिशन हो, जिसके पास कोई विजन हो”.
Shri Rajyavardhan Singh Rathor“दुनिया के अन्दर वो राष्ट्र भूमिका अदा करते हैं जिन राष्ट्र के अन्दर कुछ ऐम्बिशन होती है. उस राष्ट्र के अन्दर अपने देश को लेकर कुछ सपने होते हैं. राख के ढेर से जापान वैभव के महल बना सकता है, पचास साल के अन्दर 1800 साल बाद जो इज़रायल भूमि प्राप्त करता है. वह राष्ट्र तो रहा लेकिन भूमि नहीं रही. केवल 50 साल के अन्दर जर्मनी, जिस पर इतने प्रतिबंध लगा दिये गये, उस जर्मनी का एकीकरण भी होता है और जर्मनी एक शक्ति भी बनता है. 50 साल के अन्दर चीन अपने प्रति दुनिया का देखने का दृष्टिकोण बदल देता है तो भारत क्यों नहीं. उसका कारण केवल एक है कि देश के अन्दर आजादी के बाद इस देश में समाज के अन्दर जो ऐंबिशन जगनी थी, एक विजन चाहिये था और उस विजन को पूरा करने के लिये जो मिशन चाहिये था वो हम खड़ा नहीं कर पाये. इस देश को लेकर सपना, उस सपने को प्राप्त करने की दृष्टि, उस दृश्टि को पूरा करने के लिये मिशन के रूप में जीने की भावना. दूसरा, दुनिया के अन्दर अगर विजेता बनना है तो वी हैव टु क्रिएट ए स्ट्रेटेजिक सोसायटी. दुनिया के अन्दर क्षमता वाले लोग नहीं जीतते, ताकत वाले लोग नहीं जीतते, गुणवान लोग नहीं जीतते वो जीत सकते हैं पर वो हमेशा नहीं जीतेंगे, एक लड़ाई जीतना अलग चीज है विजेता बनना अलग चीज है. अगर हमको विजेता बनना है तो इस देश के अन्दर दो-पांच दस लीडर नहीं, 5-10-15-20 हीरोज नहीं हमको इस देश के अन्दर एक स्ट्रेटेजिक सोसायटी खड़ी करनी होगी.”
Shri Vijay ji“जिस देश का समाज बिजली, पानी, सड़क, गली, नाली इसके बाहर सोच नहीं सकता वो समाज दुनिया में कभी विजेता नहीं बन सकता. यह जो समाज है इस समाज का लेवल बढ़ाना पड़ेगा. मैं विचार करता हूं, मैं भी कौन हूं, मैं भारतीय हूं तो भारत का मतलब क्या है, दुनिया में भारत का रोल क्या है, भारत का अर्थ क्या है, इस लेबल के ऊपर समा जायेगा क्या. आजादी के बाद हम इस देश में ऐसी स्ट्रैटेजिक सोसायटी का निर्माण नहीं कर पाये.”
उन्होंने कहा कि दुनिया के एक कोने में स्थित वो दूरस्थ देश जिसके पास अपना सामर्थ्य नहीं अपने को आत्मनिर्भर बनाकर रखने का, उस ब्रिटेन के पास एक स्ट्रेटेजिक विजन था. इसलिये उसने भारत का उपयोग किया और वह  वैश्विक शक्ति बन गया. उसने इस्तेमाल हमारे संसाधनों और स्ट्रेटेजिक लोकेशन का किया. लेकिन भारत छोड़ने के बाद ब्रिटेन का हाल क्या हुआ, अगर वो बन सकते हैं तो हम क्यों नहीं बन सकते. उसका कारण केवल एक है कि इस देश के अन्दर आजादी के बाद एक सपना, देश को लेकर एक विजन, इस देश के लिये एक मिशन की भावना और सामान्य समाज के व्यक्ति के अन्दर जिस प्रकार का स्ट्रेटेजिक विजन चाहिये था वो हम खड़ा नहीं कर सके.
Panchjanya Organiser Visheshank Vimochanकेन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री श्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि आईएसआईएस और अलकायदा जैसे आतंकवादी संगठनों की दृष्टि भारत के युवाओं पर है, क्योंकि इनको जो ताकत मिल सकती है वह भारत के युवाओं से मिल सकती और कहीं से इतनी ताकत नहीं मिल सकती. यूरोप, और चीन बूढ़े हो रहे हैं, सिर्फ भारत में इतनी संख्या में युवा हैं जो कहीं भी पार्टिसिपेट कर सकते हैं सही दिशा में भी और गलत दिशा में भी.
आईएसआईएस एक ऐसी ऑर्गनाइजेशन है जो बाकी सभी टैररिस्ट ऑर्गनाइजेशन से अलग है. यह टैरिटरी हथिया रहे हैं और टैरेटरी को होल्ड कर रहे हैं. कोई भी टैररिस्ट ऑर्गनाइजेशन टैरिटरी को होल्ड नहीं कर रही थी. पेरिस में अखबार के दफ्तर पर आतंकवादी हमला अलकायदा ने किया. यानी आज दुनिया के अन्दर जो दो बड़े आतंकवादी संगठन हैं – आईएसआईएस और अलकायदा. दोनों एक साथ नहीं हैं लेकिन अगेंस्ट भी नहीं हैं. यह अपने मत में एक हैं और यह दोनों इस्लाम की सुप्रीमेसी चाहते हैं, तरीके अलग हैं. अलग-अलग देशों में टैरर करना, खासतौर से वैस्टर्न कंट्रीज में टैरर करना या हिन्दुस्थान में टैरर करना, और एक है टैरिटरी को हथियाना. अब दोनों के अन्दर मुकाबला है. इस मुकाबले में यह दोनों भारत और अफ्रीका की तरफ देख रहे हैं.
pic 05युवा बेरोजगारों को ड्रग्ज और अल्कोहल के खतरों से आगाह करते हुए उन्होंने कहा कि यह डेमोग्राफिक बम की तरह है जो बड़े घातक सिद्ध हो सकते हैं. पड़ोसी देशों व्दारा भारत की घेरेबंदी के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि वे भारत को चारों ओर से घेर रहे है. कराची, बांग्लादेश और श्रीलंका में बहुत बड़े पोर्ट बनने जा रहे हैं. यह पोर्ट हिन्दुस्तान को इस तरह से घेर रहे हैं ताकि हिन्दुस्थान इंडियन ओसन से अलग हो जाये और एशिया के उपमहाव्दीप तक ही सीमित रहे. इंडियन ओसन इकोनोमिक गतिविधियों के लिये बहुत जरूरी है. गल्फ ऑफ अदन से लेकर स्टेट ऑफ मोरक्को तक 90 प्रतिशत जहाज उसी रास्ते से जाते हैं.
सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री सोमाली डाकुओं के मामले को रहस्यमय बताते हुए कहा कि विदेशी ताकतों ने इसे हिंदमहासागर में अपनी उपस्थिति और भारत के क्षेत्र को सीमित करने के लिये कूटनीतिक उपाय बनाया. नेपाल में चीन व्दारा बड़ी संख्या में कंप्यूशस केन्द्र खोले जाने को भारत के लिये चेतावनी बताते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वहां के युवा चीन के प्रति निष्ठा रखेंगे. इसी प्रकार, पाकिस्तान के अल हदीस नामक वैचारिक संगठन ने भारत-नेपाल सीमा के चारों ओर मस्जिदें बनानी शुरू कर दी हैं. श्री राठौर ने टिप्पणी की “बड़ी अजीब बात है जहां एक ओर पाकिस्तान है जो पूर्ण रूप से इस्लाम पर विश्वास रखता है. दूसरी ओर, चीन है जो धर्म पर ही विश्वास नहीं रखता. लेकिन दोनों प्रैक्टिकल कारणों से साथ में आये हैं कि हिन्दुस्थान को किस तरह से सीमित किया जा सकता है”.
Rashtr Gaanश्री राठौर ने चीन की नेपाल में भारी पूंजी निवेश की रुचि पर ध्यान देने की जरूरत भी बताई जिसने एनर्जी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, कम्युनिकेशन जैसे 9 कोर एरिया  चुने हैं.
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान एक ऐसा देश है जो पाकिस्तान को न्यूट्रलाइज करने में भारत की मदद कर सकता है. लेकिन हाल ही में वहां एक ऐसी घटना हुई है जो हिन्दुस्थान के लिये बहुत घातक हो सकती है. तालिबान ने वहां तीन क्षेत्रों पर कब्जा किया है और वहां के राष्ट्रपति तालिबान से बात करके यह समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं कि वो तीन राज्यों पर अपना राज्य स्थापित करें और बाकी अफगानिस्तान जैसा है वैसा चलता रहे. अगर ऐसा होता है तो वो तीन राज्य ऐसे हैं, जहां सबसे ज्यादा ड्रग्स का उत्पादन होता है. एक तरफ आईएसआईएस के पास पूरा तेल है. एक मिलियन डॉलर हर दिन की आमदनी है और अगर यह तीन राज्य तालिबान के पास होंगे तो पूरा का पूरा ड्रग्स उत्पादक क्षेत्र तालिबान के पास होगा.
नार्थ ईस्ट पर भारत को चीन के साथ एक हाइड्रोडिप्लोमेसी करने की जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा कि वो ब्रह्मपुत्र के ऊपर बांध बनाने वाले हैं, वो उसको इंटरलिंक करेंगे और हमारे यहां पानी की मात्रा कम हो जायेगी. इसका भारत पर बहुत गंभीर असर पड़ेगा, यह मुद्दा जरूर इंटरनेशनल कोर्ट में जायेगा. तब भारत को यह बताने की आवश्यकता होगी की कि इस पूरे ब्रह्मपुत्र के क्षेत्र में कितनी आबादी रहती है. कितनों पर असर पड़ता है. इंटरनेशनल बॉर्डर की समस्या तो है ही. चीन ब्रह्मा और बांग्लादेश को प्रभावित करने की कोशिश में है. इसके लिये नार्थईस्ट में इंटरलिंकिंग की बहुत आवश्यकता है. हाईवे बनने बहुत जरूरी हैं, कनेक्टिविटी बढ़नी चाहिये, जिससे सिक्यूरिटी फोर्स को आने-जाने में आसानी हो, साथ ही वहां के लोगों की आर्थिक स्थिति अच्छी होगी तो वो आतंक के रास्ते से दूर हो जायेंगे. साथ ही दूरदर्शन द्वारा हमारा कल्चर वहां तक पहुंचना बहुत जरूरी है. उनका कल्चर चारों तरफ फैलना बहुत जरूरी है, उनको एक अपनापन लगना बहुत जरूरी है इस दिशा में सरकार ने काम करना शुरू कर दिया है.
समारोह के प्रारम्भ में पाञ्चजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर ने सुरक्षा पर संवाद की पृष्ठभूमि को रेखांकित किया. भारत प्रकाशन (दिल्ली) लि. के प्रबंधनिदेशक श्री विजय कुमार ने दोनों पत्रों की उत्तरोत्तर प्रगति के लिये श्री शंकर और श्री केतकर की सराहना की और धन्यवाद ज्ञापन किया.