Monday, October 12, 2015

युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से परिचित करवाने की आवश्यकता – डॉ. मोहन भागवत जी

गोरखपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत ने कहा कि परिवार का मतलब केवल खून का रिश्ता नहीं होता है. दैनिक जीवन में जितने लोगों का सहयोग मिलता है, वे सब परिवार के सदस्य हैं. उसे ही कुटुम्ब कहते हैं. इस सच्चाई को हम सभी को स्वीकार्य करना होगा. तभी देश और समाज को हम आगे ले जाने में सफल होंगे. सरसंघचालक जी गोरखपुर प्रवास के प्रथम दिन शाम चार बजे संघ कार्यालय माधव धाम में आयोजित कुटुम्ब प्रबोधन कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे. शहर के 200 से अधिक परिवारों के सदस्य कार्यक्रम में उपस्थित थे.
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उन्होंने कहा कि यह प्रयास हो कि हर रोज परिवार के सभी सदस्य एक साथ भोजन करें. यदि यह संभव न हो तो सप्ताह में एक से दो दिन जरूर करें. जिससे परिवार और समाज की जानकारी साझा की जा सके. परिवार के लोग उसमें अपना सुझाव दे सकेंगे. क्या बेहतर हो सकता है…बड़े, बुजुर्ग अपनी राय दे सकते हैं. परिवार की एकजुटता से समाज एकजुट होगा. इसकी आज सबसे अधिक आवश्यकता है. संघ प्रमुख ने कहा कि हर किसी का दायित्व बनता है कि वह अपने बच्चों को संवेदनशील बनाएं. आज की युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से परिचित कराने की जरूरत है. कार्यक्रम में डॉ. बबीता शुक्ला, डॉ. अर्चना गुप्ता, डॉ. अरुण मल्ल, डॉ. महेंद्र अग्रवाल, रीना, प्रांत प्रचारक, क्षेत्र प्रचारक, विभाग प्रचारक, महानगर प्रचारक आदि मौजूद थे.
सभी लोगों के उतर जाने के बाद जैसे ही सरसंघचालक जी उतरकर चलने लगे तो अभिवादन का सिलसिला शुरू हो गया. इसी बीच भाजपा के एक क्षेत्रीय नेता भीड़ को किनारे करते हुए आगे बढ़े और उनके चरण स्पर्श करने लगे. उनका हाथ पकड़ ऐसा करने से रोका और कहा कि यह संघ की संस्कृति नहीं है.
स्टेशन से बाहर निकलते ही वीआईपी गेट के पास प्रशासनिक अफसरों ने उन्हें एक लाल बत्ती लगी कार की तरफ बैठने का इशारा किया. सरसंघचालक जी ने गाड़ी में बैठने से इंकार कर दिया. उन्होंने विनम्रता के साथ कहा कि मेरी गाड़ी का प्रबंध है. इतना कह कर कार्यकर्ता की गाड़ी में बैठ गए. उनके पीछे उनके सुरक्षा कर्मियों की गाड़ी माधव धाम तक पहुंची.

Sunday, October 11, 2015

विकेन्द्रित स्वावलंबन व स्वदेशी पर आधारित भारत देगा विश्व को नेतृत्व : पी. मुरलीधर राव


विकेन्द्रित स्वावलंबन व स्वदेशी पर आधारित भारत देगा विश्व को नेतृत्व : पी. मुरलीधर राव
नई दिल्ली, 11 सितम्बर (इंविसंके) । राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख जी की 99वीं जयंती के अवसर पर एकात्म मानवदर्शन में स्वावलंबन विषय पर दीनदयाल शोध संस्थान नई दिल्ली में व्याख्यान गोष्ठी आयोजित की गई। इस अवसर पर प्रख्यात चित्रकार सरदार आर.एम. सिंह द्वारा निर्मित नानाजी के तैल-चित्र का अनावरण हरियाणा के राज्यपाल श्री कप्तान सिंह सोलंकी जी ने किया। स्वदेशी चिंतक एवं भाजपा महासचिव श्री पी. मुरलीधर राव ने विशिष्ट वक्ता के नाते एकात्म मानवदर्शन में स्वावलंबन विषय पर अपना व्याख्यान दिया। इससे पूर्व लोकसभा टीवी चैनल द्वारा निर्मित पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी पर बनाया गया वृत्तचित्र गोष्ठी में बड़ी संख्या में आए विद्वतजनों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। दीनदयाल शोध संस्थान के महासचिव श्री अतुल जैन ने कार्यक्रम की प्रस्तावना तथा मंच संचालन किया।
श्री पी. मुरलीधर राव ने स्वावलम्बन की दृष्टि से अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने अवगत कराया कि सम्पूर्ण विश्व में उपजाऊ जमीन अधिक होने वाला अगर कोई देश है तो वो भारत है। 190 मिलियन हैक्टर की कल्टीवेटेड लैंड है यहां। रूस, अमेरिका, चीन, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया भारत से क्षेत्रफल में बड़े है। वो देश बड़े हो सकते हैं वहां भूखंड बड़ा है लेकिन में उपजाऊ जमीन जिस देश जो है वो भारत में सबसे ज्यादा 190 मिलियन हैक्टर। उन्होंने बताया कि कृषि योग्य उपजाऊ भूमि के क्षेत्र में अमेरिका की भूमि 177 मिलियन हैक्टर है, उसके बाद चीन है जिसकी 124 मिलियन हैक्टर है, रूस की 123 मिलियन हैक्टर है, आस्ट्रेलिया की 56 मिलियन हैक्टर है, ब्राजील की 53 मिलियन हैक्टर है। सबसे ज्यादा उपजाऊ भूमि होने के बावजूद पूरे विश्व में अन्नपूर्णा के नाते जाने जाने वाला देश भारत में कई वर्षों से अनाज-दालों का विदेशों से आयात हो रहा है। भारत दालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता राष्ट्र है, अगर हम लगातार इसका आयात करेंगे, हमारी आत्मनिर्भरता, हमारा स्वावलम्बन तो खतरे में रहेगा ही, लेकिन उससे भी ज्यादा खतरा है पूरे विश्व मानव के लिए, क्योंकि इतनी बड़ी आबादी अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जब खरीदने लगती है तब बाजार के भाव बहुत बढ़ जाते हैं। दालों की कीमतें वैश्विक बाजार में अगर नियंत्रित रखनी हैं तो भारत को दालों का उत्पादन बढ़ाना पड़ेगा। उसी प्रकार खाद्य तेल का विषय है, आज हम सबसे अधिक खाद्य तेल आयातक बन गए हैं। यह नहीं चलने वाला तो यह दूसरा एक महत्वपूर्ण बिन्दू है। स्वावलम्बन के विषय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खेती के स्वावलम्बन को हम सुनिश्चित करेंगे तो स्वभाविक रूप से हमारी विश्व के बाजारो पर निर्भरता कम होगी।
उन्होंने कहा कि आज दीनदयाल जी के विचार पर चलना है, स्वावलम्बन को आगे बढ़ाना है तो स्वयंसेवी सैक्टर लघु उद्योगों को प्राथमिकता देनी होगी। स्वरोजगार और सम्पूर्ण रोजगार की दिशा में जाना है तो हम इस देश के छोटे उद्यमों को, ग्रामीण उद्यमों को छोड़कर नहीं सोच सकते। उसी प्रकार खेती की जो समस्या है उसको समाप्त करना है। चित्रकूट के प्रयोगों से सीख सकते हैं। छोटी खेती आमदानी देने वाली हो सकती है। ऐसा चित्रकूट में हो सकता है तो पूरे देश में क्यों नहीं हो सकता। फिर से स्वावलम्बन की खेती प्रारम्भ हो।
उन्होंने बताया कि तीसरी एक महत्वपूर्ण बात स्वावलम्बन के विषय में सम्पूर्ण रोजगार देना एक चुनौती है। इसके लिए लघु उद्योगों को महत्व देने के साथ भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना पड़ेगा। विश्व के अन्दर मैन्युफैक्चरिंग हब भारत नहीं बनेगा तो न देश का स्वावलम्बन सुनिश्चित कर सकते हैं, न देश के हर हाथ को काम दे सकते हैं और न विश्व के लिए हम कुछ उदाहरण बन सकते हैं।
आज इलेक्ट्रॉनिक इम्पोर्ट हमारे पैट्रोलियम इम्पोर्ट की प्रतिस्पर्धा में है। पैट्रोल तो हम आयात कर सकते हैं यह समझ में आता है लेकिन इलेक्ट्रॉनिक इम्पोर्ट? यह हमारे लिए वर्जित होना चाहिए। हमारे पास पुरुषार्थ है, हमारे पास शिक्षित लोगों की बड़ी संख्या है और हमारे पास इसके लिए आवश्यक उद्यमिता के गुण हैं। इसलिए हम जल्दी इसमें कुछ करें अब इसको मेक इन इंडिया कहो, लेकिन हमे आने वाले दिनों में मैन्यूफैक्चरिंग हब इस देश में बनाना है। दीनदयाल जी के सपनों का, नानाजी के विचारों का, स्वावलम्बन को इससे सुनिश्चित करना है।
दीनदयाल जी के सुरक्षा की दृष्टि से दिए गए विचारों को बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए भी  स्वावलम्बन सर्वोपरि है। विश्व को इतनी बार समाप्त करने वाले अणु बम अमेरिका के पास हैं, रूस के पास हैं लेकिन कोई युद्ध नहीं हुआ। पंडित जी ने अणु बम के विषय में तब यह बताया था लेकिन भारत में कई वर्षों बाद बना। इसी परिप्रेक्ष में श्री राव ने बताया कि 125 करोड़ की आबादी का इतना बड़ा देश, जिसकी सुरक्षा की परिभाषा बदल चुकी है। आज हमारी सुरक्षा, हमारे निवेश की सुरक्षा है, हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के सदस्य बनना चाहते हैं। लेकिन आज हम अपने सैनिकों के स्लीपिंग बैग इम्पोर्ट कर रहे हैं, उनके जूते, पिस्तोल, रायफल इम्पोर्ट करते हैं। ऐसा देश विश्व को कैसे चलाएगा। तो ऐसे में 48 बिलियन डालर हर वर्ष हम डिफेंस का सामान विदेशों से खरीद कर सबसे बड़े डिफेन्स सामान के इम्पोर्टर हम बन गए हैं। यह स्वावलम्बन का उदाहरण नहीं हो सकता।
उन्होंने बताया कि यहाँ सुरक्षा का विषय दोनों अर्थों में है, यह हमें आर्थिक दृष्टि से भी अवसर प्रदान कर सकता है, देश की सुरक्षा के सामान का इतना बड़ा उत्पादन अगर इस देश में होना आरम्भ हो जाए तो हमारा बाजार हमारे लिए हो जाएगा । लेकिन इस समय हमारे बाजार अमेरिका के लिए, चीन के लिए हैं यह नहीं होना चाहिए। तो ऐसे में रक्षा क्षेत्र में स्वावलम्बन जरूरी है।
स्वावलम्बन के विषय में गांधी जी, दीनदयाल जी और नानाजी की जो कल्पना है वह है विकेन्द्रित स्वावलम्बन। व्यक्ति से परिवार से समूह से समाज के सम्पूर्ण स्वावलम्बन को हर स्तर पर सुनिश्चित किया जाए तभी हर हाथ को स्थाई रूप से काम मिलेगा। कुछ दिनों-घंटों कि लिए नहीं स्थाई रूप से काम मिलेगा। इससे व्यक्ति का विकास आरम्भ होगा और वो स्थाई विकास होगा, फिर से हजार सालों तक विश्व गुरु बने रहने लायक व्यवस्थाओं की सुनिश्चितता करने में सम्भव है। पंडित जी के एकात्म मानववाद के प्रस्तुतिकरण का पचासवां वर्ष है, दीनदयाल उपाध्याय जी का सौवां वर्ष है, नानाजी ने स्वर्ग जाने से पहले इतने साल तपस्या की है उसका निचोड़ जो व्यवहारिक व्यक्तियों के लिए देना आवश्यक है वह है विकेन्द्रित अर्थव्यवस्था और स्वावलम्बन इन दोनों को उन्होंने कड़ी माना इसलिए स्वावलम्बन के लिए एक जीवंत उदाहरण खड़ा कर के गए वो। पंडित जी के वाक्यों को समझना है, तत्व को समझना है और जीवंत रूप से यह व्यवहारिक है और होगा ऐसा समझना है तो उसको चित्रकूट जाकर देख सकते हैं।
श्री पी. मुरलीधर राव ने बताया कि स्वदेशी आंदोलन में जो संवाद करना चाहिए, उसमें नानाजी को मार्गदर्शक मानते हुए स्वभाविक रूप से उनसे प्रत्यक्ष मिलना, संवाद करना और कई पहलुओं पर चर्चा करने का मौका दिल्ली में मिला। एकात्म मानवदर्शन को प्रस्तुत करने वाले स्वर्गीय दीनदयाल जी के इस दर्शन का दलगत राजनीति से विमुख होकर, इस लोकतंत्रीय राजनीति और उसके साथ स्वदेशी और स्वावलम्बन के माध्यम से इस देश में एक व्यवहारिक स्वरूप खड़ा करना चाहिए। उन्होंने बताया कि एकात्म मानववाद भारत के साहित्य से विस्मृत नहीं हुआ है। भारतीय समाज में इतने आक्रमणों के बाद, उनसे उत्पन्न समस्याओं के बाद, ज्ञान के केंद्र ध्वस्त होने के बाद भी अपनी परम्परा में कई ऐसी इसकी कड़ी हैं जो जीवंत हैं। स्वावलम्बन और स्वदेशी की दृष्टि से जो मानववाद के अलग-अलग पहलू हैं, वो सब इस देश में जीवंत हैं। ऐसा नहीं है कि सब समाप्त हो गए हैं। आज भी कई जगह ऐसी मिसाल खड़ी हैं, पद्धतियां हैं। आज आवश्यकता उन्हें जोड़ कर, खड़ा कर के  है युगानुकूल बनाने की है। इसके लिए एक व्यवहारिक मार्ग अपनाते हुए उनको जोड़कर इकट्ठा करने का काम अगर किसी शिल्पी ने किया है तो वो समाज शिल्पी हैं स्वर्गीय नानाजी देशमुख।
उन्होंने अपने व्याख्यान में बताया कि नानाजी ने चित्रकूट में दीनदयाल जी के एकात्म मानवदर्शन और आर्थिक चिंतत को व्यावहारिक जीवन में साकार करने के लिए में स्वावलम्बन को केन्द्रीय कड़ी बनाया। उन्होंने कहा कि एकात्म मानवदर्शन के सारे तत्वों का साकार रूप स्वावलम्बन है। व्यक्ति के स्वावलम्बन से परिवार का स्वावलम्बन, समूह या समाज का स्वावलम्बन, राष्ट्र का स्वावलम्बन फिर उसके आधार पर सम्पूर्ण मानवता का स्वावलम्बन होना चाहिये। यह एक-दूसरे के विरुद्ध या अलग रखने वाली कड़ी नहीं है और इसमें एक-दूसरे के साथ कोई संघर्ष नहीं है। यह एकात्म की दिशा है और यह एक-दूसरे के पूरक हैं। एक के स्वावलम्बन के लिए दूसरा सहयोगी है। इस तरह की बात को इस जीवन और समाजिक व्यवस्था में कैसे जीवंत बनाना और युगानुकूल बनाना, इस तरीके से नानाजी ने प्रतिरूप देने का जो कार्य है वही दीनदयाल शोध संस्थान के माध्यम से कई जगह प्रयोग किए, लेकिन सम्पूर्ण विश्व में जो जानने लायक प्रयोग है वो चित्रकूट है।
श्री मुरलीधर राव ने वर्तमान में किये जाने वाले आंदोलनों पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि नानाजी ने स्वदेशी आंदोलन को सड़क पर नहीं लाये। इसके बजाए उन्होंने लम्बे समय तक एक अनुकरणीय उदाहरण चित्रकूट में स्वदेशी और स्वावलम्बन की प्रयोग भूमि बना कर खड़ा किया। उन्होंने बताया कि मनुष्य के चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष में से अर्थ सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। इस दृष्टि से पंडित दीनदयाल जी ने अर्थ का बहुत विस्तृत विश्लेषण किया। अर्थ के अभाव में व्यक्ति क्या कर सकता है। अर्थ का जब अभाव होता है तो क्षति किसकी होती है। अर्थ की अभाव की भी स्थिति होती है और अर्थ के प्रभाव की भी स्थिति होती है। अर्थ अधिक होने के कारण व्यक्ति उसके प्रभाव में आ जाता है तो उसके जीवन में अर्थ के सिवा और कोई उद्देश्य, कर्मों की प्रेरणा नहीं रहती।
श्री राव ने स्वावलंबन पर बोलते हुए कहा कि सबसे महत्वपूर्ण है कि हर व्यक्ति को काम मिलना चाहिए, कर्म विहीन स्वावलम्बन की कोई कल्पना नहीं है। देश के नीतिकारों, सरकार चलाने वाले नेताओं और समाजसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ताओं का लक्ष्य होना चाहिए कि सम्पूर्ण रोजगार हो। हर हाथ को काम मिलना सुनिश्चित करना चाहिए, इसमें श्रम बहत महत्वपूर्ण है। अर्थ की जब हम बात सोचते हैं तो इसमें श्रम विहीन और श्रम से विमुख होकर अर्थ की कोई कल्पना नहीं है। उन्होंने चिंता प्रकट कर कहा कि देश में पूर्ण रोजगार कब सम्भव होगा। आज जो रोजगार चल रहे हैं या लोगों को मिल रहे है उसमें पब्लिक सैक्टर और प्राइवेट सैक्टर जिसको हम कॉर्पोरेट सैक्टर कह सकते हैं या बड़े सैक्टर कह सकते हैं वो कुल मिलाकर केवल 7 प्रतिशत लोगों को रोजगार देते हैं। इतने लक्ष्य, योजनाएं बनाने के बाद भी 93 प्रतिशत आज भी जो जॉब्स हैं, जो रोजगार देते हैं तो वो अब भी ऐग्रीकल्चर और स्माल प्राइवेट सैक्टर देते हैं। तो ऐसे सैक्टर को हमें महत्व देना चाहिए। केवल कुछ चंद कारखाने खोलने से बड़े कॉर्पोरेट खोलने से, बड़े उत्पादन की मशीनें लगाने से, मशीनों के आधार पर खेती और मशीनों को आधार पर उत्पादन करने से यह स्वावलम्बन साकार नहीं होगा। आर्थिक और स्थाई स्वावलम्बन तथा विकेन्द्रित अर्थव्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए छोटे-छोटे लघु उद्योगों को भारत में प्रोत्साहन मिले, तभी हर हाथ को काम मिलेगा।
नानाजी के सन्दर्भ में बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में जब हम स्वावलम्बन की बात कहते हैं तो देश में खेती केवल जमीनदारों जागीरदारों द्वारा नहीं होती। भारत छोटे किसानों का देश है, इसलिए छोटी खेतियों को लाभदायक खेती बनाना, उनके लिए वहीं पर आमदानी हो और उसके आधार पर वे स्वावलम्बी बनें। देश के आर्थिक स्वावलम्बन के लिए छोटे लघु उद्योगों के लिए जब हम सोचते हैं तो वो ग्रामीण स्वावलम्बन है। गांव अगर स्वावलम्बी होंगे तो देश की अर्थव्यवस्था स्वावलम्बी होगी। श्री मुरलीधर जे ने बताया कि नाना जी ने जो छोटी खेती है उसको लाभकारी कैसे बनाया जाए, देश की कृषि  के लिए स्वावलम्बन हेतु चित्रकूट में इसका आधार बनाया। पंडित जी ने जो एकात्म मानववाद और आर्थिक नीति की दिशा में कहा उसका व्यवहारिक रूप नानाजी ने चित्रकूट में देने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि पंडित जी ने पंचवर्षीय योजनाओं का विरोध करते हुए लिखा कि बड़े कारखाने और बड़ी मशीनें व्यक्ति को विस्थापित करते हैं। पूंजी अगर हमारे पास कम है तो उस पूंजी के संदर्भ में हम विश्व के अन्य देश जहां पूंजी है, उन पर निर्भर होना पड़ता है। बाहरी पूंजी पर निर्भर होने से राष्ट्र की राजनीति में, राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में दूसरों के हस्तक्षेप को मानना पड़ेगा। यह स्वावलम्बन के खिलाफ जाता है। देश में उत्पादन अधिक होना चाहिए। लेकिन उत्पादन जो अधिक होना चाहिए वो अधिक हाथों से होना चाहिए और वही स्वावलम्बन का मेकर है। वो तभी सम्भव होता है जब उधर कृषि और इधर छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन मिले। स्वावलम्बन के क्षेत्र में स्थाई विकास तभी सम्भव होता है, जब वो स्वावलम्बन को सुनिश्चित करता है। प्रकृति का आवश्यकता से अधिक शोषण कर के इकट्ठा किया विकास स्थाई विकास नहीं होता। 1965 से पहले जो बातें चर्चित नहीं होती थीं वो यूएनओ से लेकर गांवों तक उस स्थाई विकास के अलग-अलग पहलू आज चर्चा में आ रहे हैं।
दीनदयाल जी के कृषि पर दिए विचार प्रकट कर उन्होंने बताया कि खेती ऐसी हो कि पांच हजार साल तक भी जिस भूमि पर खेती करते रहें तो भी उसकी उर्वरा शक्ति समाप्त न हो ऐसी खेती चाहिए। तो वो स्थाई विकास है। स्वावलम्बन और स्थाई विकास यह अलग नहीं हैं। समान वितरण के बगैर स्थाई स्वावलम्बन और स्थाई विकास यह सम्भव नहीं है। इसलिए अपरिमित उत्पादन, समान वितरण, और संयमित उपभोग। स्थाई स्वावलम्बन संयमित उपभोग के बिना सम्भव नहीं नहीं है। ट्रस्टीशिप के बगैर संयमित उपभोग सम्भव नहीं है। जितनी आवश्यकता है उतना ही लेना, मैं मालिक इन सब संसाधनों का हो सकता हूँ मगर मैं उसका ट्रस्टी हूं, इन संसाधनों का मैं ट्रस्टी हूं। ऐसे भावों के बगैर स्थाई विकास सम्भव नहीं है
उन्होंने कहा कि यूनिफार्मिटी के बारे में सोचने वाले कभी भी विश्व के स्वावलम्बन के पूरक नहीं हो सकते। अपना देश आर्थिक व्यवस्था में हजारों वर्ष तक विश्व में नम्बर एक रहा है, 1945 में अमेरिका विश्व की नम्बर एक आर्थिक शक्ति बना और 2015 तक आते-आते अमेरिका की आर्थिक व्यवस्था थकावट के संकेत दे रही है और आने वाले दिनों में लगता नहीं कि वो इससे उबर पाएंगे। स्वावलंबन के कारण ही हजारों वर्षों तक लगातार पूरे विश्व में एक कैप्टन या लीडर के नाते भारत की अर्थव्यवस्था रही। इस प्रकार की समृद्धि, इस प्रकार की कलाएं, इस प्रकार के साहित्य, इस तरह के ज्ञान के सारे विषय विकसित हुए हैं। यह सम्पूर्ण मानव की स्वावलम्बन की जो प्रवृति है और जिसके रहते विकास और अविष्कार होता है।
हरियाणा के महामहिम राज्यपाल श्री कप्तान सिंह सोलंकी ने नानाजी को स्मरण करते हुए कहा कि आज नानाजी की 99वीं जयंती है इसका मतलब जन्म शती उनकी आ ही गई। पंडित दीनदयाल जी की भी जन्मतिथि 25 सितम्बर 1916 है और अब 2016 भी आएगा, इसलिए उम्र के हिसाब से दोनों समकक्ष लगते हैं। विचार कितना महत्वपूर्ण होता है कि जिस व्यक्ति को नानाजी ने कानपुर में स्वयं स्वयंसेवक बनाया उस समय श्रद्धेय भाउराव देवरस जी वहां पर थे, लेकिन हम जानते हैं कि स्वयंसेवक बनने के लिए कोई न कोई सम्पर्क सूत्र रहता है। तो नानाजी सम्पर्क सूत्र थे। लेकिन यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में ही हो सकता है कि कई बार गुरु चेला बन जाता है। श्रद्धेय नानाजी ने उन्हें जो विचार दिया उस विचार को क्रियान्वित करने में उन्होंने अपने जीवन का पूरा अंतिम हिस्सा तक लगा दिया।
स्वावलम्बन के लिए श्री कप्तान सिंह जी ने बताया कि व्यक्ति को एकात्म होना जरूरी है, जिस व्यक्ति का शरीर, मन, बुद्धि निष्काम नहीं है, जो इच्छाओं के वशीभूत है, आदतों के वशीभूत है वो व्यक्ति स्वावलम्बी हो ही नहीं सकता, वो हमेशा दूसरों पर निर्भर रहेगा।
श्री कप्तान सिंह जी ने बताया कि एकात्म मानवदर्शन का जो यह विचार है यह वैकल्पिक विचार नहीं है, यह समाजवाद, पूँजीवाद भी नहीं है यह वास्तव में मानववाद का शाश्वत विचार है। उन्होंने बताया कि उस समय सब इज्म की बात करते थे तो दीनदयाल जी ने उन्हें कहा इज्म की ही बात करनी है तो एकात्म मानववाद की बात करो। मानवता की बात करो, वास्तव में तो यह एक दर्शन है। नानाजी के बारे में उन्होंने बताया कि वे लीडर, स्टेट्समैन और फांउडर तीनों थे इसलिए वो राष्ट्रऋषि थे। दीनदयाल जी का जो विचार था उसको क्रियात्मक मॉडल बनाने के लिए नानाजी ने चित्रकूट में ग्रामोदय विश्वविद्यालय बनाया।

जन्म से मिले संस्कारों के कारण हिन्दू समाज सभी की सेवा करता है – डॉ. कृष्णगोपाल जी

हिन्दू स्प्रिच्युल एंड सर्विस फेयर - 2015
जयपुर (विसंकें). हिन्दू स्प्रिच्युअल एंड सर्विस फेयर-2015 का 8 अक्तूबर को जयपुर स्थित सवाई मानसिंह स्टेडियम के इन्वेस्टमेंट ग्राउंड में विधिवत आगाज हो गया. इसका शुभारंभ आर्ट ऑफ़ लिविंग के प्रणेता श्रीश्री रविशंकर जी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ किया. इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी, व संत समाज उपस्थित था. इससे पूर्व भव्य कलश यात्रा निकली गई, जिसमें सैंकड़ों महिलाओं ने हिस्सा लिया. कलश यात्रा मोतीडूंगरी गणेश मंदिर से रवाना हुई. जहां एक ओर बैंडबाजे की सुर लहरियां गूंज रही थी, वहीं दूसरी ओर महिलाएं सिर पर कलश लिए मंगल गीत गाते हुए आगे बढ़ रही थी. कलश यात्रा जवाहरलाल नेहरू मार्ग होते हए मेला स्थल पहुंची. इसके बाद संत समाज की उपस्थिति  में हिन्दू स्प्रिच्युअल एंड सर्विस फेयर-2015 का आगाज हुआ. मेला 11 अक्तूबर तक चलेगा, जिसमें अनेक कार्यक्रमों का आयोजन होगा.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल जी ने कहा कि हिन्दू समाज जो सेवा कार्य करता है, उसमें कोई छिपा हुआ स्वार्थ नहीं होता. जन्म से मिले संस्कारों के कारण ही हिन्दू समाज खुले मन से सभी की सेवा करता है और बदले में कोई अपेक्षा न रखते हुए अपने सेवा कार्यों को भुला देता है. उसका प्रचार भी हिन्दू नहीं करता है, अपितु समाज में सेवा करना वह अपना सौभाग्य मानता है. उन्होंने कहा कि वीरों की धरती राजस्थान अपने सेवा कार्यों के कारण विश्व में प्रसिद्ध है. यहां के लोगों तथा संस्थाओं की ओर से बड़े-बड़े सेवा कार्य वर्तमान में चलाये जा रहे हैं.
मेले में राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने वाली हिन्दू सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाएं अपने सेवाकार्यों का प्रदर्शन करेंगी. हिन्दू स्प्रिच्युअल एण्ड सर्विस फेयर के माध्यम से हिन्दू समाज की सेवा शक्ति का सिंहनाद होगा. सर्वे भवन्तु सुखिनः की कामना करने वाले हिन्दू समाज के द्वारा विश्व कल्याण और देश के विकास के लिए किए जा रहे योगदान की जानकारी समाज को मिलेगी. 9 अक्टूबर शुक्रवार को प्रातः
हिन्दू स्प्रिच्युल एंड सर्विस फेयर - 2015
हिन्दू स्प्रिच्युल एंड सर्विस फेयर – 2015
10-00 बजे फेयर ग्राउण्ड सभागार में स्कूल विद्यार्थियों द्वारा आचार्य वंदन एवं सायं 07-00 बजे राजस्थान की माटी से जुड़े कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक  कार्यक्रम ’पधारो म्हारे देश’ प्रस्तुत किया जाएगा.
10 अक्टूबर, शनिवार को कन्या वन्दन, गंगा-गौ-वृक्ष पूजन एवं संगीत संध्या तथा 11, अक्टूबर, 2015 को सायं 04-00 बजे देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के सम्मान में परमवीर वन्दन समारोह होगा. हिन्दू समाज द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों से स्कूल विद्यार्थियों को प्रेरणा मिल सके, इस उद्देश्य से अब तक 275 स्कूलों में 40 प्रकार की प्रतियोगिताओं रचनात्मक, सांस्कृतिक और पारम्परिक खेलों का आयोजन किया गया, सभी प्रतियोगिताओं का फाइनल 8 से 11 अक्टूबर को मेला स्थल पर किया जाएगा. लगभग 4500 पुरस्कार प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय विजेताओं को दिये जाएंगे, तथा इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा से सज्जित 6 रथों द्वारा लगभग 1000 स्कूलों में आमंत्रण का आह्वान किया गया. मेले में विभिन्न 160 संस्थाओं द्वारा 220 स्टॉल लगाई जाएंगी. मेले में ज्ञान-वर्धक 6 सिद्धांतों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी.
हिन्दू स्प्रिच्युल एंड सर्विस फेयर - 2015
हिन्दू स्प्रिच्युल एंड सर्विस फेयर – 2015

Saturday, October 10, 2015

विश्वनीय पत्रकारिता के लिए साधना की आवश्यकता – ओपी कोहली जी

112गुजरात (विसंकें). गुजरात पत्रकारिता क्षेत्र में विशेष कार्य करने वाले पत्रकार को ‘साधना’ साप्ताहिक द्वारा “श्री रमणलाल शाह – साधना पत्रकारिता गौरव पुरस्कार” से सम्मानित किया जाता है.  इस वर्ष अहमदाबाद के गांधी लेबर इंस्टीच्यूट में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया. जिसमें गुजरात के महामहिम राज्यपाल ओपी कोहली जी के करकमलों से वरिष्ठ पत्रकार रमेश तन्ना को पुरस्कार प्रदान किया गया.
राज्यपाल ने कहा कि पत्रकारत्व एक व्यवसाय है या मिशन, यह एक प्रश्न है. पत्रकार प्रजा और सरकार के बीच सेतु है. इसलिए उसका संवेदनशील होना जरुरी है. पत्रकारत्व विश्वनीय होना चाहिए और यह साधना के बिना संभव नहीं है. आजकल सकारात्मक घटनाओं की ओर पत्रकारों का ध्यान कम जाता है. फलस्वरुप समाज में नकारात्मक बातें ज्यादा होती हैं. समाज को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिले, ऐसे पत्रकारत्व की आज आवश्यकता है.
13पुरस्कार विजेता रमेशभाई तन्ना ने कहा कि आज सकारात्मक पत्रकारत्व की आवश्यकता है. मीडिया सिर्फ गंदगी ही बताये यह ठीक नहीं है. मीडिया द्वारा बगीचा (उद्यान) भी दिखाया जाना चाहिए. वरिष्ठ पत्रकार एवं गुजरात यूनिवर्सिटी के पूर्व उप-कुलपति डॉ. चंद्रकान्त मेहता ने कहा कि पत्रकारत्व व्यवसाय नहीं परन्तु धर्म है. पत्रकारत्व की आज की दिशा देखकर लगता है कि गांधीजी के तीन बंदरों में दूसरे चार बन्दर और जोड़ने की जरुरत है. गलत लिखना नहीं, गलत सोचना नहीं, गलत प्रकाशित करना नहीं, गलत प्रसारित करना नहीं. ये आदर्श आज पत्रकारत्व में से अदृश्य हो गए हैं, इसीलिए आज पत्रकारत्व के सामने अनेक प्रश्न खड़े हो रहे है. आज सच्चे पत्रकारों की आवश्यकता है, बनावटी पत्रकारों की नहीं. समारोह में गुजरात हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस सुरेश सोनी द्वारा साधना साप्ताहिक के कार्यकर्ताओं का सम्मान किया गया. कार्यक्रम में गणमान्यजन उपस्थित थे.

गोरज संकलन महोत्सव की तैयारी हेतू स्वयंसेवक प्रशिक्षण वर्ग सम्पन्न

जालोर (विसंकें). गोरज संकलन महोत्सव की पूर्व तैयारी हेतू जालोर विभाग का वरिष्ठ स्वयंसेवक संगम तथा प्रशिक्षण वर्ग नन्दगांव (केशुआ) में 3-4 अक्टूबर को सम्पन्न हुआ. श्रीपथमेडा गोधाम महातीर्थ द्वारा आयोजित गो कृपा महोत्सव तथा गोसुरभि पीठ की स्थापनार्थ आगामी 12 नवम्बर को गोवर्धन पूजा से 19 नवम्बर गोपाष्टमी तक सम्पन्न होने वाले गोरज संकलन महोत्सव की पूर्व तैयारी तथा इसके निमित्त गांव गांव में होने वाले गो पूजन के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जालोर विभाग के 1280 स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण नन्दगांव (रेवदर) में सम्पन्न हुआ.
3, 4 अक्टूबर को सम्पन्न हुए दो दिवसीय संगम में विभिन्न सत्रों के माध्यम से प्रत्येक ग्राम में समितियां बनाना, पूजन सम्पन्न करवाना, गो ग्रास व गोरज संकलन करने का प्रशिक्षण दिया गया. उद्घाटन सत्र में परम गोवत्स पू्. राधा कृष्ण जी महाराज ने गो सेवा की महिमा बताते हुए वर्तमान समय में इसके लिए हो रहे प्रयत्न तथा हमारी भूमिका पर विस्तार से बताया.  समापन सत्र को गोधाम महातीर्थ पथमेडा के पू. दत्तशरणानन्द जी महाराज ने सम्बोधित किया तथा इस गो सुरभि पीठ की स्थापना को विश्व की धरती के लिए अद्वितीय बताया.
कार्यक्रम के प्रारंभ में सैकड़ों स्वयंसेवकों ने सप्त संवत्स गोमाताओं तथा एक वंशभ भगवान का वैदिक नीति से पूजन किया. जोधपुर प्रान्त प्रचारक मुरलीधर जी ने कार्यक्रम की आगामी रूपरेखा तथा कार्यक्रम के समाज पर होने वाले प्रभाव पर प्रकाश  डाला.
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जम्मू कश्मीर पर अधूरी जानकारी पूर्ण दृष्ट विकसित करने में असमर्थ – कमलेश तिवारी जी

जोधपुर (विसंकें). जम्मू-कश्मीर अध्ययन केन्द्र (J.K.S.C.) एवं बीएनकेवीएस ग्रुप ऑफ थिएटर सोसायटी, जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में एक नए विमर्श को जन्म देती नाटिका कमलेश तिवारी द्वारा लिखित और निर्देशित ‘जन्नत के साए’ का सफल मंचन 5 अक्टूबर 2015 को सूचना केन्द्र सभागार, जोधपुर में किया गया.
लेखक कमलेश तिवारी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर अध्ययन केन्द्र से जुड़ने के बाद मुझे यह महसूस हुआ कि हम लोग जम्मू-कश्मीर संबंधी तथ्यों से कितने अंजान हैं. मीडिया द्वारा दी गई जानकारी अधूरी है और एक पूर्ण दृष्टि विकसित करने में असमर्थ भी. जम्मू-कश्मीर हमारे देश की राष्ट्रीय संस्कृति और सभ्यता की विरासत को अपने में समेटे हुए है. कई अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं के साथ मेरा ध्यान जम्मू-कश्मीर में देश की आजादी से लेकर अब तक रिफ़्यूजियों और विस्थापितों के रूप में रहने वाले 15 लाख लोगों की ओर विशेष रूप से गया. मुझे लगा कि ये ही हैं जम्मू-कश्मीर के असली पीड़ित जन. देश को आज़ाद हुए 68 वर्ष बीत चुके हैं. हम लोग बड़े शान से साल दर साल लोकतन्त्र का जश्न मनाते रहे हैं, पर हमारे ही बीच रहने वाले इन लोगों की दुर्दशा की ओर हमारा ध्यान कभी नहीं गया. समूचे विश्व में इतने लंबे समय तक रिफ़्यूजी के रूप में रहने वाले यही लोग हैं. लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था में नागरिकों के अधिकार, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग आदि तो जैसे इनके लिए चुप्पी साध के बैठे हों.
जे एंडके11ये नाटिका एक प्रयास है जिससे कि हम लोग केवल घाटी की खबरों और अलगाववादियों की बातों को ही जम्मू-कश्मीर का पर्याय ना मानें, बल्कि एक सर्वांगीण दृष्टि से जम्मू-कश्मीर को समझने और उससे जुड़ने की कोशिश करें. नाटिका में कथ्य की प्रभावोत्पादकता को बढ़ाने के लिए जोधपुर शहर ही नहीं बल्कि राजस्थान के जाने-माने शायरों जनाब सागरुल कादरी, सरफराज शाकिर और बृजेश अम्बर की गज़लों के कुछ शेयरों का प्रयोग भी किया गया है.
नाटिका में जमाल का गजेन्द्र सिंह परिहार, नफीसा का निर्मला राव, राजे का अनुज गांधी, धीरू का अभिनय कमलेश तिवारी ने किया. रूप सज्जा प्रमोद वैष्णव, मंच व्यवस्था श्यामाप्रसाद गौड़, यशवंत गौड़, वाजिद हसन तथा संगीत एवं ध्वनि प्रभाव एमएस ज़ई द्वारा किया गया. अयोध्या प्रसाद गौड़ द्वारा सफल मंच संचालन किया गया. कार्यक्रम में अध्यक्ष लेखक एवं पत्रकार विनोद विट्ठलविशिष्ट अतिथि लॉयन्स क्लब, जोधपुर के अध्यक्ष लॉयन विजय मनोरिया तथा  मुख्य अतिथि न्यूरोलॉजिस्ट एवं समाजसेवी डॉ. नगेन्द्र शर्मा थे.
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जयपुर में हिन्दू स्प्रिच्युअल एंड सर्विस फेयर – 2015 का आगाज

जयपुर (विसंकें). हिन्दू स्प्रिच्युअल एंड सर्विस फेयर-2015 का 8 अक्तूबर को जयपुर स्थित सवाई मानसिंह स्टेडियम के इन्वेस्टमेंट ग्राउंड में विधिवत आगाज हो गया. इसका शुभारंभ आर्ट ऑफ़ लिविंग के प्रणेता श्रीश्री रविशंकर जी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ किया. इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी, व संत समाज उपस्थित था. इससे पूर्व भव्य कलश यात्रा निकली गई, जिसमें सैंकड़ों महिलाओं ने हिस्सा लिया. कलश यात्रा मोतीडूंगरी गणेश मंदिर से रवाना हुई. जहां एक ओर बैंडबाजे की सुर लहरियां गूंज रही थी, वहीं दूसरी ओर महिलाएं सिर पर कलश लिए मंगल गीत गाते हुए आगे बढ़ रही थी. कलश यात्रा जवाहरलाल नेहरू मार्ग होते हए मेला स्थल पहुंची. इसके बाद संत समाज की उपस्थिति  में हिन्दू स्प्रिच्युअल एंड सर्विस फेयर-2015 का आगाज हुआ. मेला 11 अक्तूबर तक चलेगा, जिसमें अनेक कार्यक्रमों का आयोजन होगा.
मेले में राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने वाली हिन्दू सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाएं अपने सेवाकार्यों का प्रदर्शन करेंगी. हिन्दू स्प्रिच्युअल एण्ड सर्विस फेयर के माध्यम से हिन्दू समाज की सेवा शक्ति का सिंहनाद होगा. सर्वे भवन्तु सुखिनः की कामना करने वाले हिन्दू समाज के द्वारा विश्व कल्याण और देश के विकास के लिए किए जा रहे योगदान की जानकारी समाज को मिलेगी. 9 अक्टूबर शुक्रवार को प्रातः
हिन्दू स्प्रिच्युल एंड सर्विस फेयर - 2015
हिन्दू स्प्रिच्युल एंड सर्विस फेयर – 2015
10-00 बजे फेयर ग्राउण्ड सभागार में स्कूल विद्यार्थियों द्वारा आचार्य वंदन एवं सायं 07-00 बजे राजस्थान की माटी से जुड़े कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक  कार्यक्रम ’पधारो म्हारे देश’ प्रस्तुत किया जाएगा.
10 अक्टूबर, शनिवार को कन्या वन्दन, गंगा-गौ-वृक्ष पूजन एवं संगीत संध्या तथा 11, अक्टूबर, 2015 को सायं 04-00 बजे देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के सम्मान में परमवीर वन्दन समारोह होगा. हिन्दू समाज द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों से स्कूल विद्यार्थियों को प्रेरणा मिल सके, इस उद्देश्य से अब तक 275 स्कूलों में 40 प्रकार की प्रतियोगिताओं रचनात्मक, सांस्कृतिक और पारम्परिक खेलों का आयोजन किया गया, सभी प्रतियोगिताओं का फाइनल 8 से 11 अक्टूबर को मेला स्थल पर किया जाएगा. लगभग 4500 पुरस्कार प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय विजेताओं को दिये जाएंगे, तथा इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा से सज्जित 6 रथों द्वारा लगभग 1000 स्कूलों में आमंत्रण का आह्वान किया गया. मेले में विभिन्न 160 संस्थाओं द्वारा 220 स्टॉल लगाई जाएंगी. मेले में ज्ञान-वर्धक 6 सिद्धांतों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी.
हिन्दू स्प्रिच्युल एंड सर्विस फेयर - 2015
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लव-जिहाद – धर्म छुपाकर निशारत खान ने हिन्दू युवती से किया दुष्कर्म

लुधियाना : लुधियाना में लव जिहाद का एक मामला सामने आया है जिसमें एक लडकी ने एक मुस्लिम युवक पर उसे अपने आप को हिंदू बताकर शादी का झांसा देकर धोखाधड़ी व बलात्कार करने के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने पर्चा दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।
अपने आप को हिंदू बताकर व अपना धर्म छुपाकर आरोपी ने उसे अपने प्रेम जाल में फंसार फिर उसे शादी का झांसा देकर कई बार उससे बलात्कार किया। इस दौरान हर बार आरोपी उससे जल्द हिंदू रीति रिवाज के अनुसार शादी करने का वायदा करता रहा, फिर धीरे-धीरे शादी की बात कर अपने परिजनों से न मिलवाने पर उसकी असलियत सामने आ गई कि उक्त युवक ने उससे झूठ बोला था कि वह हिंदू है जबकि वह मुस्लिम है और मोहल्ला गंज का रहने वाला निशारत खान है । उसकी असली पहचान का पता चलने पर उसने अपने माता-पिता को साथ लेकर पुलिस में शिकायत की जिस पर जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी व बलात्कार की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है l
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान पीड़िता लडकी की तरफ से लगाए गए आरोप सही पाए गए जिसके बाद पीड़िता का मेडिकल करवाने के बाद मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच कर रहे एएसआई कुलविंदर सिंह के अनुसार आरोपी अभी फरार है और उसकी तलाश में छापेमारी जारी है और उसे जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
स्त्रोत : पंजाब केसरी

Sunday, October 04, 2015

लोकगाथाओं में स्थित इतिहास को इतिहासकार भी नहीं बदल सकते – प्रेम कुमार धूमल

हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश). ठाकुर जगदेव चन्द स्मृति शोध संस्थान नेरी में इतिहास लेखन में लोकगाथाओं का योगदान’ पर चल रहा त्रिदिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद रविवार 04 अक्तूबर को समाप्त हो गय. इस अवसर पर नेता विपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की. धूमल ने कहा कि स्वर्गीय ठाकुर राम सिंह ने ठाकुर जगदेव चन्द स्मृति शोध संस्थान नेरी के माध्यम से हिमाचल में एक बहुत बड़े शोध संस्थान की विरासत खड़ी की है. यह संस्थान भारतीय इतिहास के प्रमाणिक स्रोतों का प्रयोग करके निष्पक्ष लेखन कार्य करे, ऐसी आशा की जानी चाहिए.
धूमल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश हिमालय के आंचल में बसा होने के कारण देश के आधारभूत इतिहास का सबसे बड़ा स्थल है और इसी से इतिहास लेखन की नई दिशाएं निकल सकती हैं. हमारे देश के इतिहास के साथ खिलवाड़ हुआ है. जो राष्ट्र अपने देश के सही इतिहास की जानकारी नहीं रख पाते, उन राष्ट्रों का अस्तित्व समाप्त हो जाता है. कुछ इतिहाकारों ने इतिहास के पन्नों को बदलने की कोशिश की है, लेकिन जो इतिहास लोकगाथाओं के माध्यम से है, उसे ऐसे इतिहासकार कभी नहीं बदल सकते. धूमल ने कहा कि अब डीएनए के माध्यम से भी यह साबित हो चुका है कि आर्य इसी देश के मूल निवासी थे.
20151004_113658कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि देश में इतिहासकारों के दो समूह बन गए हैं. ये दोनों समूह ब्रिटिश शासन को तो विदेशी मानते हैं, लेकिन तुर्कोंअरबोंईरानियोंअफगानों और मुगलों के शासन को विदेशी मानने से इंकार करते हैं. इसलिए भारतीय इतिहास को लेकर भ्रम पैदा होता है. जो इतिहासकार अरबों से लेकर मुगलों तक के शासन को विदेशी नहीं मानते, वे जानबूझ कर तथ्यों को तोड़मरोड़ कर इन शासकों को लोक कल्याणकारी सिद्ध करने में जुटे हैं. लेकिन इस काल की लोकगाथाओं को खंगाला जाए तो उनके इस झूठ का पर्दाफाश हो जाता है.
कार्यक्रम के अध्यक्ष पंजाब सरकार में पूर्व मंत्री डॉ. बलदेव चावला ने कहा कि हमारे इतिहास में यह बताया जाता है कि आर्य विदेशों से आकर भारत में बसे जो बिल्कुल गलत है. वहीं इतिहास में सिकंदर महान का वर्णन किया जाता है, जबकि तथ्य इसके विपरीत है क्योंकि पोरस ने यहां पर सिकंदर को हराया था. इसी तरह आजादी की पहली लड़ाई जो अंग्रेजों के साथ 1857 में लड़ी गई उसे भी गलत तरीके से पेश किया जाता है.
तीन दिनों तक चले इस परिसंवाद में देशभर से 88 विद्वानों ने भाग लिया, जिसमें 63 शोध पत्र पेश किए गए. समापन समारोह के दौरान मुख्य अतिथि प्रो प्रेम कुमार धूमल ने 63 शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले शोधार्थियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया. इस अवसर पर कांगड़ा के युवा इतिहासकार विवेक शर्मा को ठाकुर रामसिंह युवा इतिहासकार पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. उन्हें यह सम्मान कांगड़ी लोकपरंपरा में रामायण के इतिहास पर प्रदान किया गया.
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RSS Sarasanghachalak Mohan Bhagwat paid tributes to Swami Dayanand Saraswati at Rishikesh Ashram

Rishikesh Uttarakhand October 03, 2015: RSS Sarasanghachalak Mohan Bhagwat visited Swami Dayanand Ashram at Rishikesh in Uttarakhand, and paid tributes to Swami Dayananda Saraswati swamiji who passed away recently.
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RSS Sarasanghachalak Mohan Bhagwat is on an organisational tour in Uttarakhand, is attending the on-going 3-day baitak at Haridwar of select RSS functionaries from Paschim Uttara Pradesh Kshetra.

Saturday, October 03, 2015

Gram Vikas’ is possible through enriched ‘Gou-Samvardhan’: RSS Sarasanghachalak Bhagwat at Haridwar

Haridwar October 2, 2015: RSS Sarasanghachalak Mohan Bhagwat inaugurated and addressed 3-day meet of RSS functionaries of Western Uttar Pradesh Kshetra, who volunteers for RSS Seva projects such as Gram Vikas, Parivar Prabodhan, Gou-Samvardhan etc with the objective of comprehensive rural development.
In his address, RSS Sarasanghachalak Mohan Bhagwat said an ideal Gram Vikas is possible if the society enriched with Gou-Samvardhan, Social Harmony and value based family systems.
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हरिद्वार। 02 अक्टूबर(विसंके)। समाज यदि एकमत होकर चलेगा तो इससे सामाजिक एकता को बल मिलेगा। सबको मंदिर में प्रवेश,पानी का सामूहिक श्रोत,अंतिम संस्कार के लिए समान श्मसान स्थल की व्यवस्था होनी चाहिए। ग्राम विकास के बिना देश विकास नहीं हो सकता। ग्राम विकास के लिए गौ संवर्धन अनिवार्य है। गांवों को स्वालंबी बनाने की दिशा में भी योजना बनाकर कार्य करने का समय है। यह कहना है राष्ट्रीय  स्वयंसेवक संघ के परमपूजनीय सरसंघचालक श्रीमान मोहन भागवत जी का। वे आज यहां हरिद्वार के भूपतवाला स्थित निष्काम सेवा ट्रस्ट में आयोजित पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के तीन दिवसीय कार्यकर्ता बैठक का संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सामाजिक मजबूती की पहली शर्त सामाजिक समरसता है। हमेें इसको मजबूत करने की आवश्यकता है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक समरसता की अनुभूति हो इसके लिए सम्मिलित प्रयास की जरूरत है।
भागवत जी ने कहा कि जहां भी हमारी समरसता की कड़ी कमजोर होगी वहीं समाज को तोड़़ने वाली शक्तियां प्रभावी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सामाजिक सद्भावना बढ़ाने के लिए सामाजिक धार्मिक संगठनों को आपसी संवाद बढ़ाना होगा और मिलजुल कर कार्य करना होगा।
उन्होंने कहा कि हमारा विचार तो एकात्मता का है लेकिन यह हमारे आचरण में भी उतरना चाहिए तभी इसकी सार्थकता प्रामाणिक होगी। परिवार प्रबोधन के विषय में उन्होंने कहा कि परिवार व्यवस्था में क्षरण और पारिवारिक मूल्यों में आ रही गिरावट के चलते हिंदू समाज में कमजोरी आ रही है। इससे बचने के लिए हमें इस व्यवस्था की मजबूती के लिए लगना होगा।उन्होंने कहा कि इसके लिए सप्ताह में कम से कम एक दिन सामूहिक भोजन और भजन पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। बच्चों को अपनी संस्कृति का ज्ञान और गौरव बताएंगे तो वह कभी भटकेंगे नहीं और देश के अच्छे नागरिक बनेंगे। पूजनीय सरसंघचालक ने कहा कि अपने उत्सवों का उपयोग समाज व परिवार प्रबोधन के लिए करें।
भागवत जी ने गौ संवर्धन को देश के विकास का मार्ग बताते हुए कहा कि गौ संवर्धन से देश संवर्धन होगा। उन्होंने कहा कि आज गौ आधारित खेती समाज के ध्यान में आ रही है। भारतीय नस्ल की गाय के औषधीय गुणों के परिणाम सब अनुभव कर रहे है। इसलिए गौ संवर्धन के कार्य की गति बढ़ा कर नए-नए प्रयोगों के आधार पर कार्य विस्तार किया जाना चाहिए।
पूजनीय सरसंघचालक ने भारतीय संस्कृति पर बोलते हुए कहा कि देव संस्कृति ही हिन्दू संस्कृति है। जब देव संस्कृति प्रभावी थी तब विश्व में कोई युद्ध नहीं थे। पर्यावरण भी शुद्ध था। हमने अपनी संस्कृति को छोड़ा इसलिए समस्याएं बढ़ी। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति मानवता की भलाई के लिए काम करती है। इसमें कट्टरता के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि मतान्तरण के कारण देश में ऐसे राष्ट्र विरोधी तत्व खड़े हो गए जो देश को हानि पहुंचा रहे हैं। उन्होंने आह्वान करते हुए कहा कि देश की एकता के लिए सभी मत,पंथ,संप्रदाय सभी एकजुट होकर चले तभी भारत सुरक्षित रहेगा।
भागवत जी ने कहा कि संघ व्यक्ति निर्माण में लगा है। व्यक्ति निर्माण और उसके माध्यम से समाज निर्माण करना ही लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज निर्माण से हम व्यवस्था निर्माण की ओर बढ़ते है। जब व्यक्ति का व्यक्तित्व मजबूत होगा तो व्यवस्था परिवर्तन स्वतः होता है। उन्होंने कहा कि हमें समाज निर्माण पर ध्यान देना है।
तीन दिन तक चलने वाली इस बैठक में संघ की विविध क्षेत्रों में चल रही गतिविधियों की समीक्षा होगी। इसमें मुख्य रूप से पांच विषयों पर बातचीत होगी जिसमें गौ संवर्धन,ग्राम विकास,परिवार प्रबोधन,सामाजिक समरसता और धर्म जागरण के विषय प्रमुख तौर पर शामिल होंगे। बैठक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र में शामिल उत्तरांचल,मेरठ और ब्रज प्रांत के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

Friday, October 02, 2015

हुर्रियत नेता गिलानी ने जम्मू-कश्मीर में गोमूत्र से बनी दवाएं बांटने का किया विरोध

गोमूत्र एक आयुर्वेदिक दवा है किंतु केवल वो गाय का होनेसे तथा हिन्दुद्वेष से गिलानी उसे सांप्रदायिक रूपसे से देख रहे है – सम्पादक, विसंकें,उड़ीसा
जम्मू – हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी ने जम्मू-कश्मीर की भाजपा-पीडीपी गठबंधन सरकार पर आरोप लगाया है कि वह फ्री मेडिकल कैंप में लोगों को गोमूत्र से बनी दवाएं बांट रही है।
हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने मांग की है कि कश्मीर में संजीवनी वटी की आपूर्ति रोकी जाए। हुर्रियत के मुताबिक, इस दवा को बनाने में गोमूत्र का इस्तेमाल होता है।
सैयद अली शाह गिलानी ने प्रदेश सरकार का विरोध करते हुए कहा कि वह राज्य में गोमूत्र के इस्तेमाल से बनी दवाएं मुफ्त में बांटकर लोगों की भावनाओं से ख‍िलवाड़ कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे सांप्रदायिक ताकतों की साजिश है, जो मुसलमानों की ‘हराम’ की चीजें बांटकर उनकी भावनाओं से खेल रही है।
हुर्रियत ने संजीवनी वटी पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि यह कोई जीवनरक्षक दवा या कोई ऐसी जरूरी दवा नहीं है, जिसके बिना कश्मीर घाटी के लोगों की सेहत प्रभावित होती हो।
स्त्रोत : आज तक

अशोक जी के जीवन से अनुशासन, कर्मठता, राष्ट्र-प्रेम, धर्म-रक्षा और दूरदर्शिता की सीख लेनी चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी

नई दिल्ली (इंविसंके). पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत जी ने कहा कि मैं यहां उपस्थित सभी परम श्रद्धेय संतगण और भाई-बंधुओं एवं कुटुम्बों को नमन करता हूं. अशोक जी ने संघ की परंपरा की जो बात कही है, वो सौ प्रतिशत सत्य कहा है. संघ में व्यक्ति का महत्व नहीं होता, संगठन का महत्व होता है. अशोक जी एक तपस्वी हैं. जीवन में, वर्तमान परिस्थिति में, मनुष्य का शारीर स्तम्भ जीवन को कैसे जीना? ये हमें इस पुस्तक को पढ़कर अनुकरण करने से प्राप्त होगा. एक बार बीबीसी चैनल पर इनका इंटरव्यू था. जिसमें एक-दो प्रश्न होने के बाद अशोक जी बीच में रोकते हुए कहा कि मैं यहां आपके प्रश्नों का उत्तर देने नहीं आया हूं. बल्कि, मैं अपने संदेश को आपके चैनल के माध्यम से सभी को बताने आया हूँ. उसके बाद जिस हिम्मत से अंग्रेजों के चैनल से, उन्हीं के घर में, जिस निर्भयता के साथ जो दो टूक बातें कही थीं. उसके लिए बड़ी हिम्मत चाहिए, जो इनके अंदर मैंने वहां देखी थी. अशोक जी के बारे में यह किताब तो पढ़कर जो जानेंगे, वो तो आपसब जानेंगे ही. पर, मैं बता दूं अशोक जी “एक खुली किताब हैं.” जिनके बारे में आप जब चाहें तब जान सकते हैं. जो हमारे लिए अनुकरण की बात है. इनके जैसी राष्ट्रभक्ति, अपने जीवन में हमसब को प्रयास कर लानी होगी. हमें अनुशासन, लगन, कर्मठता, सेवाभाव, राष्ट्र-प्रेम, धर्म-रक्षा और दूरदर्शिता की सीख इनके जीवन से लेनी चाहिए.
हिन्दुत्व के पुरोधा पुस्तक का लोकार्पण
हिन्दुत्व के पुरोधा पुस्तक का लोकार्पण
विहिप के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक अशोक सिंघल जी के 90वें वर्ष में प्रवेश करने पर, विश्व हिन्दू परिषद द्वारा अभिनन्दन एवं उनके जीवन पर आधारित ग्रन्थ “अशोक सिंघल : हिंदुत्व के पुरोधा” का लोकार्पण हुआ. लोकार्पण पू. सरसंघचालक मोहन राव भागवत जी के करकमलों से केदारनाथ साहनी सभागार, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविक सेंटर, नई दिल्ली में संपन्न हुआ.
कार्यक्रम के शुरुआत में स्वामी सत्यमित्रानंद जी ने कहा – मैं यहां अशोक सिंघल जी को एक सामाजिक पुरूष और महात्मा के रूप में देखता हूं. मुझे लगता है कि अशोक जी को 60 वर्ष की उम्र से ही महात्मा कहना चाहिए था. ऐसा नहीं हुआ, पर जो अब हुआ वो बहुत अच्छा हुआ है. जो धैर्य धारण करता है, वही महात्मा होता है और अशोक जी के रग-रग में धैर्य है. ऐसे महात्मा कभी-कभी ही इस धरती पर जन्म लेते हैं. हमें खुशी है कि उस महात्मा के रूप में अशोक जी आज हम सब के बीच में उपस्थित हैं. अशोक जी का जीवन वेद प्रचार, गाय रक्षा, गंगा, राष्ट्र भक्ति और हिंदुत्व के लिए ही समर्पित रहा है. मैं ऐसे महात्मा को प्रणाम करता हूँ.
कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह जी ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन क्षेत्र में ऐसे विरले ही पुरोधा हमें मिलते हैं और ऐसे ही पुरोधा के रूप में हमें अशोक जी मिले हैं. जो हमारे राष्ट्र के लिए एक धरोहर हैं. स्वतंत्र भारत में दो बड़े आन्दोलन हुए. जिनमें से एक “कार सेवा” था. जिसके कर्णधार सिंघल जी थे. सिंघल जी कहते हैं कि मैं हिंदुत्व का पूजारी हूँ और हिन्दू को किसी मजहब की सीमा में नहीं बांधा जा सकता. यह एक मानवीय धर्म है, जो अति प्राचीनतम है. इतिहास भी साक्षी है, इस बात का. सिंघल जी ने जीवन में
हिन्दुत्व के पुरोधा पुस्तक का लोकार्पण
हिन्दुत्व के पुरोधा पुस्तक का लोकार्पण
कभी मर्यादाओं का अतिक्रमण नहीं किया है. मैं प्रभु श्री राम जी से प्रार्थना करता हूं कि अशोक जी अपने जीवन के 125 वर्ष को पूर्ण करें. उन्होंने कहा कि भारत ही दुनिया का एक मात्र ऐसा देश है. जहां इस्लाम के 72 फिरके मिलते हैं, जो विश्व के किसी भी अन्य देश और यहां तक कि किसी भी इस्लामिक देश में 72 के 72 फिरके नहीं मिलते हैं.
कार्यक्रम में अशोक सिंघल जी ने सभी को नमन करते हुए कहा कि “संघ में व्यक्ति का महत्व नहीं होता, संगठन का महत्व होता है.” मैं आज जो कुछ भी हूं वो अपने गुरुदेव की कृपा से हूं. मैंने सेवा की और मुझे उस सेवा से शक्ति मिली. अपने पू. गुरुदेव जी को याद करते कहा कि मेरे गुरुदेव सामान्य व्यक्तित्व से संपन्न थे. उनसे ही मैंने प्रेरणा प्राप्त कर सामान्य जीवन को अपनाया. मैं 18 वर्ष अपने जीवन के कानपुर में अपने गुरुदेव के सानिध्य में बिताते हुए सेवा की. वहीं गुरु जी से मैंने समस्त महाभारत सुना. मेरे जीवन को जिसने गढ़ा उसका श्रेय भी तो होना चाहिए. उसका श्रेय मेरे गुरुदेव को जाता है. मेरे गुरुदेव दूरदर्शी थे. वो कहा करते थे, ये भारत वर्ष फिर से एक दिन शिखर पे चढ़ेगा, जो आज साकार होता दिखाई दे रहा है.
कार्यक्रम में “अशोक सिंघल : हिंदुत्व के पुरोधा” के लेखक महेश भागचंदका ने कहा कि अशोक सिंघल जी को लोग देश, धर्म, समाज और संस्कृति के रक्षक के रूप में जीवन भर संघर्ष करने वाले और कई आन्दोलनों के सफल नेतृत्वकर्ता के रूप में जानते हैं. छात्र जीवन से ही सिंघल जी ने अपने को राष्ट्र और धर्म की सेवा के लिए समर्पित कर दिया था. अपने जीवन के महत्वपूर्ण 65 वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में धर्म और देश की सेवा में समर्पित किए हैं. हिंदुत्व एवं हिन्दू समाज को देश-विदेशों में नई पहचान दिलाने वाले महान तपस्वी, ओजस्वी व्यक्तित्व के धनी हैं अशोक जी. पाठकों को पुस्तक के माध्यम से अस्सी के दशक में चरम पर पहुंची राम जन्मभूमि मंदिर आन्दोलन, देश में धर्मान्तरण के खिलाफ चलाई गई मुहिम और साथ ही अस्पृश्यता के विरूद्ध जनजागरण की विस्तार से जानकारी मिलेगी. यह पुस्तक हिंदुत्व को समझने में बेहद सहायक साबित होगी. एक समर्पित योद्धा की तरह धर्म, देश, समाज, और संस्कृति की रक्षा के लिए घर-परिवार, निजी स्वार्थ को छोड़कर तपस्वी जीवन व्यतीत करने वाले महान व्यक्तित्व के कर्तृत्व को समेटना मेरे लिए एक आत्मिक आनन्द को प्राप्त करने जैसा है.
कार्यक्रम में विहिप के वरिष्ठ पदाधिकारी, कार्यकर्ता, प्रमुख मठों-अखाड़ों के महंत, साधू- संत, दलाई लामा के प्रतिनिधि उपस्थित थे. मंच
हिन्दुत्व के पुरोधा पुस्तक का लोकार्पण
हिन्दुत्व के पुरोधा पुस्तक का लोकार्पण
संचालन चंपत राय जी ने किया. कार्यक्रम में अशोक जी के जीवन पर आधारित वृत्तचित्र भी दिखाया गया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश भय्या जी जोशी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य गणमान्यजनों का शुभकामना संदेश दिखाया गया.

VYAKTI VISHESH – ABP News report on RSS Sarasanghachalak Mohan Bhagwat

Thursday, October 01, 2015

असम की पुलिस का दावा – राज्य के लोगों की बढी इस्लामिक स्टेट में दिलचस्पी

गुवाहाटी : असम में जिहादी एक्टिविटीज के बढ़ते मामलों के बीच यहां की पुलिस को इंटरनेशनल टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन आईएसआईएस के पांव पसारने का डर सता रहा है। ऐसी आशंका असम के डीजीपी खगन शर्मा ने जाहिर की है।
मंगलवार को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शर्मा ने कहा कि अभी तक असम से किसी ने भी आईएसआईएस ज्वाइन नहीं किया है, लेकिन लोगों की इस आतंकी संगठन में दिलचस्पी बढ़ी है। इसे लेकर वे बेहद चिंतित और अलर्ट हैं। शर्मा ने कहा, ”बहुत सारे लोगों ने आईएसआईएस की वेबसाइट्स सर्फ की है। रिकॉर्ड तादाद में इन वेबसाइट्स पर हुए हिट्स को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि यह महज दिलचस्पी से कुछ ज्यादा है। ऐसा जम्मू-कश्मीर या आंध्र प्रदेश में भी हो रहा है।”

साइबर सेल कर रहा मॉनिटर

डीजीपी के मुताबिक, असम पुलिस के क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) का साइबर सेल डिपार्टमेंट ऐसे मामलों पर काम कर रहा है। डीजीपी ने कहा, ”हमारे पास इस तरह के मामलों से निपटने लायक इक्विपमेंट नहीं हैं। हालांकि, नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन भी इस तरह के मामलों पर नजर रख रहा है।”
डीजीपी के मुताबिक, ”हाल ही में हमने बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमातुल मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के २४ मेंबर्स को अरेस्ट किया है। बांग्लादेश सरकार की ओर से इस संगठन के खिलाफ कदम उठाने की वजह से इसके मेंबर असम और भारत के कुछ दूसरे राज्यों में फैल गए हैं। इससे पहले हमने हूजी के आतंकियों को भी गिरफ्तार किया है।”

भारत में बढ़ रही दिलचस्पी

मोदी सरकार भले ही यह कह रही हो कि आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) का देश के युवाआें पर बेहद कम असर है, लेकिन पिछले महीने सामने आया एक सर्वे इससे अलग तस्वीर पेश कर रहा है। सर्वे से पता चला है कि, देश के युवा इस आतंकी संगठन की गतिविधियों पर बेहद करीब से नजर रख रहे हैं। इसके अलावा, संगठन की सोशल मीडिया एक्टिविटीज में भी हिस्सा ले रहे हैं। आईएसआईएस के कंटेंट के लिए राज्यों में सबसे ज्यादा ट्रैफिक जम्मू-कश्मीर से और शहरों में श्रीनगर से आ रहा है। वहीं, मुंबई ऐसा पांचवां शहर है, जहां से आईएसआईएस का कंटेंट सर्च किया जा रहा है।
संदर्भ : भास्कर

मेड इन चाइना’ उत्पादों से पर्यावरण को हो रहा है नुकसान : अध्ययन में हुआ खुलासा !

वाशिंगटन: ‘मेड इन चाइना’ वस्तुओं के लिए बेशक आपको कम किमत चुकानी पड रही है, लेकिन उनमें अन्य स्थानों पर बने उत्पादों की तुलना में कॉर्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन उल्लेखनीय रूप से उंचा होता है, जो जलवायु को प्रभावित कर रहा है।
एक नए अध्ययन में यह दावा किया गया है। इस रिपोर्ट के सह लेखक स्टीवन जे डेविस ने कहा कि पिछले १५ साल में चीन के विनिर्माण में उल्लेखनीय तेजी आयी है, जिससे विश्व अर्थव्यवस्था एक नई उंचाई पर पहुंच गई है। डेविस अमेरिका के इर्विन में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर हैं। उन्होंने कहा कि यह सब कुछ पर्यावरण की लागत पर मिला है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय और मैरिलैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं को भी चीन के उत्पादों में उंचे उत्सर्जन का स्तर मिला है।
स्त्रोत : प्रभात खबर

मालेगांव धमाका : NIA ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा – ‘हम पर कोई दबाव नहीं, सरकारी वकील के आरोप गलत’


नई दिल्‍ली : २००८ के मालेगांव बम धमाका मामले में NIA ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल कर दिया है। NIA ने कहा है कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद से यानि २०१४ से इस मामले में किसी भी आरोपी को ज़मानत नहीं मिली है।
इससे पहले NIA ने कोर्ट में कहा था कि मामले के ट्रायल को धीमा करने के आरोप गलत हैं। हलफनामे में कहा गया कि इस मामले कि पैरवी कर रही NIA की पूर्व वकील रोहिणी सालियान के आरोप बेबुनियाद है कि उनके ऊपर दबाव डाला गया कि वो इस आरोपियों को लेकर नरम रवैया अपनाए या फिर केस को कमज़ोर करें।
एनआईए ने अपने हलफ़नामे में ये भी कहा कि NIA की पूर्व वकील रोहिणी सालियान का ये आरोप भी गलत है कि जब वो इस मामले में विशेष वकील थीं तो सभी आदेश NIA के पक्ष में थे। जांच एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि १४ आरोपियों में से ४ को २०११ और २०१३ के बीच ज़मानत मिल गई थी। वो भी तब जब रोहिणी इस मामले को बॉम्बे उच्च न्यायालय में लीड कर रही थीं।
जांच एजेंसी ने ये हलफ़नामा उन दो याचिकाओं के जवाब में दिया है, जिसमें ये मांग कि गई थी कि एनआईए की पूर्व वकील रोहिणी सालियान के आरोपों की जांच CBI या फिर SIT से कराई जाए। साथ ही इस मामले में NIA के लिए विशेष वकील नियुक्त किया जाए, ताकि मामले कि निष्पक्ष सुनवाई हो सके। सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते मामले की सुनवाई कर सकता है।
संदर्भ: एनडीटीवी