Friday, January 30, 2015

संविधान की प्रस्तावना से ‘सेक्युलर’ शब्द हटाया जाना चाहिए : शिवसेना

माघ शुक्ल पक्ष एकादशी, कलियुग वर्ष ५११६
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श्री. संजय राउत
नई दिल्ली: शिवसेना ने मांग की है कि संविधान की प्रस्तावना से सेकुलर शब्द को हटा दिया जाना चाहिए क्योंकि भारत कभी सेकुलर राष्ट्र नहीं रहा बल्कि हिंदू राष्ट्र रहा है। पूरा विवाद खड़ा हुआ एक सरकारी विज्ञापन के बाद जिसमें संविधान की प्रस्तावना में सेकुलर शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया। इसके बाद विपक्ष ने सरकार पर जोरदार निशाना साधा।
गणतंत्र दिवस के मौके पर इनफॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्ट्री के एक विज्ञापन को लेकर विवाद छिड़ गया है। इस विज्ञापन से सेकुलर और सोशलिस्ट जैसे शब्द गायब थे। शिवसेना ने केंद्र सरकार से इस विज्ञापन को हटाने की मांग की है।
शिवसेना के मुताबिक भारत हिंदू राष्ट्र है और कभी भी धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र नहीं रहा है। शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत के मुताबिक, ‘भारत सेकुलर देश नहीं है। अगर पाकिस्तान एक मुस्लिम देश है तो भारत भी हिंदू राष्ट्र है।’
शिवसेना की माने तो बीजेपी ने यह गलती जानबूझकर की है और वो इस मामले पर बहस करना चाहती है। यह कहना गलत नहीं होगा कि शिवसेना इस मुद्दे को सियासी रंग देकर मौके का फायदा उठाना चाहती है। यह किसी से छिपा नहीं है कि शिवसेना ने सोशलिस्ट और कम्युनिस्ट पार्टी के तौर पर ही मुंबई में अपने पैर पसारे हैं।
वहीं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पॉलिटिकल एडवाइजर और पूर्व बीजेपी नेता सुधींद्र कुलकर्णी ने भी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनके मुताबिक खुद अटल चाहते थे कि देश सेकुलर और सोशलिस्ट हो और अगर बीजेपी इन शब्दों को हटाती है तो यह अटल बिहारी वाजपेयी की बात ना मानने जैसा होगा। कुलकर्णी ने ट्विटर के जरिए अपनी बात रखी।
स्त्रोत: आज तक 

बच्चों को इस्लाम के नाम पर मारने की ट्रेनिंग दे रहा है बोको हराम !

माघ शुक्ल पक्ष एकादशी, कलियुग वर्ष ५११६
आबुजा - इस्लामिक स्टेट की ही तरह नाइजीरिया में सक्रिय आतंकी संगठन बोको हरम ने भी बच्चों के हाथों में हथियार थमा दिए हैं। संगठन उन्हें इस्लाम के नाम पर लोगों को जान से मारने की ट्रेनिंग दे रहा है। बोको हरम ने बच्चों को ट्रेनिंग देने की फोटोज जारी की हैं, जिसमें उन्हें सेमी-ऑटोमेटिक बंदूक चलाना सिखाया जा रहा है। फोटो में दर्जनों बच्चे इस ट्रेनिंग में शामिल दिखाई दे रहे हैं और एके-४७ चलाना सीख रहे हैं। ये फोटोज उत्तरी नाइजीरिया की हैं, जहां बोको हरम ने सबसे ज्यादा हमले अंजाम दिए हैं।
फोटोज आतंकी संगठन के साथ जुड़े मीडिया ग्रुप अल उर्वा एल वुथाका ने ऑनलाइन जारी किए हैं। ये तस्वीरें ह्यूमन राइट वॉच की चेतावनी के महीने भर बाद सामने आईं हैं, जिसमें कहा गया था कि बोको हरम अगवा लड़के-लड़कियों को हमले के दौरान इस्तेमाल कर सकते हैं। आतंकी संगठन पर कुछ दिन पहले ही उत्तरी नाइजीरिया के एक गांव से 30 बच्चों को अगवा करने का शक जताया गया था, जिसमें लड़कियां भी शामिल थीं।
आतंकी संगठन बोको हरम बीते साल अप्रैल में अंततराष्ट्रीय स्तर पर उस वक्त चर्चा में आया, जब आतंकियों ने चिबोक से २०० स्कूली छात्राओं को अगवा कर लिया था। इसके बाद इस साल जनवरी में बोर्नो के बागा में २००० लोगों को मौत के घाट उतराने की घटना की दुनियाभर में निंदा की गई।
स्त्रोत: दैनिक भास्कर

Thursday, January 29, 2015

RSS All India Pracharak Barga's meet at cuttack

RSS All India Pracharak Barga's meet at cuttack
Bhubaneswr,29/1-The five days summit of All India Pracharak Barga  of  RSS has been inaugurated on 28th  January  2015 at Keshab Dham , cuttack  by Ma. Sarkaryavaha Suresh (Bhayya) Ji Joshi. Pujaniya Sarsanghachalak Ma. Mohan Ji Bhagwat along with  senior pracharaks  from allover India have  participated  in  the said  summit.  . 

संस्कार भारती द्वारा आयोजित ६६तम साधारण तन्त्र दिवस

दारिंगवाडि,29/1-उत्कल प्रान्त के वनवासी जिला ओं मे से कन्धमाल जिला एक प्रमुख जिला है। इस जिले का दारिंगवाडि व्लक के सिमनवाडि पंचायत केन्द्र में संस्कार भारती द्वारा आयोजित ६६तम साधारण तन्त्र दिवस २६ जनवरी १०१५ को एक रचनात्मक रूप से मनाया गया। उत्सव में ४३ गांव से १२८० प्रतिनिधि पूर्ण समय उपस्थित रहे जिनमें ७८२ महिलाएं भाग लिये। जिन्होंने अपनी जीवन में पहली बार भारत का राष्ट्रीय गान "जनगण मन अधिनायक" गाया । पिछले ३ महीनों से यह गित उन गांवों में नित्य सायं कीर्तन संगोष्ठी मे अभ्यास किया जाता था। यह कार्यक्रम प्रात ९ वजे से यात्री १२ वजे तक चला । कार्यक्रम के प्रारंभ राष्ट्रीय ध्वज उत्तोलन शवरी माता श्रीमती  सुनाफुल ओर पुज्ज्य पाद संथ स्वामी जीवन मुक्तानन्द जी के कर कमलोंमे हुआ । ४३ संकीर्तन दल द्वारा नगर भ्रमण अत्यन्त यशस्वी एवं उत्साह पूर्ण वातावरण में हुआ जिसमें २४०० संख्या में उपस्थिति स्मरणीय रहा । साढे चार किलोमीटर कि यह यात्रा पूर्वाह्न  १:१५ मि मे संपर्ण हुई। भोजन उपरांत ३ वजे ग्राम स: परिचय एवं स्वामी जी (जीवन मुक्तानन्द जि) के प्रवचन के समाप्ति के साथ  राष्ट्रीय ध्वज का राष्ट्र गान एवं ध्वजावतरण किया गया। अपराह्न ४:३० के वनवासी। कार्यकर्ता ओं के परिश्रम द्वारा निर्मित मंच का कीर्तन एवं गंगा जल गोमय से प्रदक्षिणा के साथ प्रतिष्ठा किया गया।  वह मंच संस्कार मंडप के नाम से नामित हुआ। एतद् उपरांत मंच पर प्रभु श्री जगन्नाथ जी के चतुर्धा बिग्रह का स्थापित कर  श्री जगन्नाथ आरती से प्रत्येक मुक्ति मंडप में अभ्यास किए गये भजन,नृत्य,कीर्तन,लोक गाथा,लोक नाटिका ओर कटक से पधारे ओडिशी नृत्य,कार्यक्रम को गारिमा प्रदान किया।


ABVP launches campaign “Nasha Mukth Bharath” in Bengaluru

Bengaluru January 29: ABVP’s campaign on Narcotic Drug Free India, the “Nasha Muktha Bharatha”, received massive response from college students, academicians acrosss Karnataka.
The campaign was inaugurated at Jnana Jyothi Auditorium, Bengaluru University Campus in which more than 1500 students attended.
Dr Paul C Salins of Muzumdar Cancer Hospital. Educationist Dr MK Shridhar, noted physicians Dr Jayakar Shetty, Dr Jayakrishna, ABVPs Ravikumar, Ramachandra Shetty, Dr Shyam Bhat were present.
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Nation remembers Social Reformer, former RSS Chief Prof Rajju Bhaiyya on his 95th Jayanti

Bengaluru January 29, 2015: Nation remembered well known social reformer and 4th Sarasanghachalak of Rashtreeya Swayamsevak Sangh, Prof Rajesndra Sing who is popularly known as Rajju Bhaiyya on his 95th Birth Anniversary.
Rajju Bhaiya, was the fourth Sarsanghchalak of the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS)
Rajju Bhaiya, was the fourth Sarsanghchalak of the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS)
Prof. Rajendra Singh (29 January 1922 – 14 July 2003 ), popularly called Rajju Bhaiya, was the fourth Sarsanghchalak of the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS). He was chief of that organisation between 1994 and 2000.
He worked as a professor and head of the Department of Physics at Allahabad University but left to devote his life to the RSS in the mid-1960s.
Rajendra Singh was born to Jwala Devi and Balbir Singh on 29 January in either 1921 or 1922 in Shahjahanpur city of Uttar Pradesh, when his father was posted there as an engineer. Originally his father Balbir Singh belonged to village Banail Pahasu of Bulandshahr district. Rajju Bhaiyya  matriculated from Unnao. After that he was enrolled at the Modern School (New Delhi) for a brief period before moving to St Joseph’s College, Nainital. Progressing to Allahabad University, he obtained B.Sc. and M.Sc. degrees. 
Rajju Bhaiyya  was acknowledged as an exceptionally brilliant student by Sir C. V. Raman, the physicist and Nobel Prize-winner, when he was his examiner in M.Sc. He also offered Singh a fellowship for advanced research in nuclear physics.
He joined Allahabad University after majoring in Physics to teach Spectroscopy. He taught at the university for several years, where later he was appointed head of the Physics Department.
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Rajju Bhaiyya  was also considered an expert in nuclear physics which was very rare those days in India. He was a very popular teacher of the subject, using simplicity and clear concepts.
with RSS:
Singh was active in the Quit India Movement of 1942 and it was during this time that he came in contact with the RSS.  From then onwards the Sangh influenced his life. He resigned from his university post in 1966 and offered full-time services to the RSS as a ‘prant pracharak’.  Beginning in Uttar Pradesh, Singh progressed to be the Sar Karyavaha (General Secretary) in the 1980s. In 1994, he was nominated to succeed Bala Saheb Deoras as RSS chief.
While in Uttar Pradesh, Singh worked with Lal Bahadur Shastri, Chandra Shekhar and V.P. Singh. Murali Manohar Joshi was also one of his best students.
Arguably Rajju Bhaiya’s term of six years was one of the most crucial for both Sangh and India. Rajju Bhaiyya shared an excellent rapport with political leaders cutting across ideological lines besides academicians, social workers and intellectuals.
1998 saw the pragmatic shift of Indian politics when the main opposition party, The Bharatiya Janata Party (BJP) scaled new heights by emerging as the largest party in the ruling National Democratic Alliance (NDA) coalition at the Centre. This was a crucial period for the RSS and BJP. The BJP and the RSS shared many common ideologies.
He abdicated the post of Sarsanghchalak on account of his failing health in February 2000 and nominated the K. S. Sudarshan for the post.
During emergency he went underground and toured whole India. Singh was also responsible for organizing human rights convention presided by Justice VM Tarkunde in Delhi in 1976. He was also responsible for setting up friends of India Society International.
One of the most important beliefs of Singh was: “All people are basically nice. One should deal with every person by believing in his goodness. Anger, jealousy, etc. are the offshoots of his past experiences, which affect his behavior. Primarily every person is nice and everyone is reliable.”
Rajju Bhaiyya  was a firm believer in the concept of swadeshi and empowering rural economy. Initiating the rural developmental activities, he had declared in 1995 that the utmost priority should be given in making the villages hunger-free, disease-free and educative. Today, there are over 100 villages where the rural development work done by swayamsevaks has inspired the people of surrounding villages and their experiments are being emulated by those people.
Addressing the Vijayadashami festival at Nagpur in 1995, Singh remembered Mohandas K. Gandhi and Lal Bahadur Shastri. He challenged the way in which the central government was working on fulfilling the dreams of these two statesmen.
Rajju Bhaiyya wanted to establish a memorial named after Bismil in Delhi, the capital of India. He died on 14 July 2003 at Kaushik Ashram in Pune, Maharashtra.

राष्ट्र सेविका समिति के प्रबुद्ध वर्ग: शिक्षकों से चाणक्य के अनुसरण का आह्वान

नई दिल्ली  Jan 29 : “राष्ट्र सेविका समिति” ने मंथन के नाम से प्रबुद्ध वर्ग के बीच गोष्ठियां आयोजित करना प्रारम्भ किया है. ऐसी ही एक गोष्ठी दिल्ली प्रांत के मेधाविनी मंडल ने शिक्षक के राष्ट्रीय दायित्व विषय पर यहां 27 जनवरी को आयोजित की. इस गोष्ठी में सभी वक्ताओं ने समान आकांक्षा व्यक्त की कि शिक्षक ऐसे छात्रों का निर्माण करें जो राष्ट्र के अनन्य उपासक सिद्ध हों. उनके जीवन में राष्ट्र सर्वोपरि हो. अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका श्रीमती आशा शर्मा जी ने चाणक्य को शिक्षकों के लिये आदर्शतम व्यक्तित्व निरूपित किया. अपने उद्घाटन भाषण में आशा जी ने कहा कि शिक्षकों की भूमिका महान आचार्य चाणक्य जैसी होनी चाहिये जो कि समय के अनुरूप देश का नेतृत्व कर सकें और व्यक्ति व राष्ट्र को उत्थान की ओर ले जा सकें.
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उन्होंने कहा कि संगठन की संस्थपिका वंदनीया मौसी जी (लक्ष्मीबाई केलकर) कहती थीं कि समाज का 50 प्रतिशत अंश महिलायें हैं.  उनके बेटे संघ शाखा से संस्कार ग्रहण करते थे तो उनको लगता था कि महिला शक्ति भी अपने राष्ट्र का चिंतन करे, नेतृत्व करे, देश के विकास में अपना सम्पूर्ण योगदान दे. इसी प्रेरणा से हिन्दू महिला शक्ति के जागरण हेतु 1936 में “राष्ट्र सेविका समिति” की स्थापना की गई. साथ ही, संकल्प किया गया कि समाज के हर क्षेत्र में नेतृत्व देने की क्षमताओं का विकास किया जाये और उनको संगठित भी किया जाये.
उन्होंने बताया कि राष्ट्र सेविका समिति का कार्य भारत के अलावा 40 देशों में भी चल रहा है. देश में 1028 सेवा प्रकल्प संचालित किये जा रहे हैं, जिनमें परिवार-विहीन, वनवासी क्षेत्र, आतंकग्रस्त क्षे़त्र की बालिकाओं के लिये 40 छात्रावास स्थापित किए गये हैं. इसके अतिरिक्त सिन्धु सृजन नाम से दिल्ली में और दिशा नाम से दक्षिण में छात्राओं के बीच कार्य प्रारम्भ किया गया है. ए. एस. ट्रेनिंग, नि:शुल्क ट्यूशन केन्द्र और वैदिक गणित विषयों से संबन्धित प्रकल्प भी शुरू किए गये हैं.
अध्यक्षता करते हुए साध्वी ऋतम्भरा जी ने कहा कि आजकल जो शिक्षार्थी प्रथम आते हैं, उनकी तरफ ही ध्यान दिया जाता है और अन्तिम पंक्ति वालों को छोड़ दिया जाता है.  शिक्षक यदि चाहें तो अपनी व्यवहार शालीनता एवं कड़े परिश्रम से उन्हें भी अगली पंक्ति में ला सकते हैं.  न्होंने यह भी कहा कि शिक्षक यदि जीवन-पर्यन्त शिक्षक के साथ शिक्षार्थी भी बना रहे तो वह एक उच्च राष्ट्र निर्माता हो सकता है.
उन्होंने कहा, “आज हमें ऐसे सेवा एवं संस्कारों का अग्नि कुंड बनाने की आवश्यकता है जिसमें जलने वाली लकड़ी (शिक्षार्थी) प्रत्येक देश सेवा रूपी यज्ञ में जल कर भस्म बने. यज्ञ की भस्म को मस्तक पर धारण किया जाता है.” उन्होंने शिक्षकों से लालच में आकर अपने ज्ञान रूपी सरोवर को धूमिल न करने का आह्वान करते हुए कहा, “जो बांटता एवं बंटता है उसे प्रसाद कहते हैं, जो अर्जित करता है उसे विषाद कहते हैं, आओ ज्ञान बांटें, मुझे सबसे उच्च शिखर पर जाना, मुझे दूसरे शिक्षक से अधिक अर्जित करना है यह गलत धारणा है.  दो शिखरों अहम और अज्ञानता का मेल कभी नहीं होता.”
शिक्षा बचाओ आंदोलन में अपनी उत्कृष्ट भूमिका के लिये प्रसिद्ध श्री अतुल कोठारी जी ने तीन बार ऊॅं काउच्चारण, तत्पश्चात “ऊँ असतो मा सद्गमय” मंत्र का उच्चारण सभी उपस्थितजनों से कराने के बाद कहा कि शिक्षक इस मंत्र जैसा हो अन्यथा शिक्षा व्यर्थ है. उन्होंने कहा कि शिक्षा एवं जीवन का उद्देश्य एक समान होना चाहिये.
श्री कोठारी ने कहा कि समाज की सभी समस्याओं का कारण चरित्र का संकट है. चिन्तन का विषय यह है कि चरित्र निर्माण कैसे हो?  पाठ्यक्रम का निर्माण कैसे हो? पाठ्यक्रमों में श्री रामायण में श्रीराम, सीता जैसे चरित्रों को अपभ्रंश करके बताया गया है, क्या ऐसा पाठ्यक्रम चरित्र निर्माण कर सकता है?
उन्होंने वेदों में उपलब्ध ज्ञान हासिल करने के लिये गंभीर शोध में अब और विलंब को मानव समुदाय के लिये अति घातक बताते हुए कहा कि शोधकर्ता को  समाज और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्ध होना जरूरी है. अमेरिकी शिक्षकों को अनुकरणीय बताते हे उन्होंने कहा कि वे छात्रों को भावी राष्ट्रपति मानकर पढाते हैं .
गोष्ठी में इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय की प्रो. वाइसचांसलर श्रीमती सुषमा यादव जी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थीं. उन्होंने आदर्श शिक्षक के रूप में नोबल पुरस्कार विजेता प्रख्यात भौतिक विज्ञानी सी.वी. रमन का स्मरण किया. उन्होंने कहा कि सी.वी.रमन को उस दिन भारत रत्न का पुरस्कार मिलना था, जिस दिन उनके एक छात्र का शोध-पत्र पर कार्य का अन्तिम दिवस था. इसलिये उन्होंने पुरस्कार हेतु मना कर दिया. उन्होंने कहा कि अपने शिष्यों के प्रति ऐसा उत्कट दायित्व बोध ही छात्रों में अपने गुरुजनों के प्रति आस्था और आदर की भावना निर्मित कर सकता.

Wednesday, January 28, 2015

हिंदू बेटियों से भेदभाव कर रहे अखिलेश : प्रवीण तोगडिया

माघ शुक्ल पक्ष नवमी, कलियुग वर्ष ५११६
लखनऊ : हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डाॅ. प्रवीण तोगडिय़ा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर हिंदू बालिकाओं से भेदभाव आरोप करने का आरोप लगाया है। मेरठ में प्रवीण तोगडिय़ा कल विहिप की ओर से जिमखाना मैदान में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में पहुंचे थे।
बारिश व सर्दी के बावजूद मैदान में भीड़ देखकर उत्साहित तोगडिय़ा ने ने कहा कि पिछले डेढ़ दो हजार वर्ष के इतिहास में हिंदुओं को अपमानित ही किया गया है। इसलिए अब हिंदुओं को जगाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हिंदू बेटियों के साथ भेदभाव कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के ब्राह्मणों, ठाकुरों, जाटों व अन्य हिंदुओं की बेटियों ने क्या गुनाह किया था, जिनके लिए बालिका कन्या धन जैसी कोई ऐसी योजना नहीं बनाई गई। डा. तोगडिय़ा ने कहा कि कम से कम यादवों की बेटियों को तो योजना का लाभ मिलना चाहिए था। तोगडिय़ा ने कहा कि अब कश्मीर के साथ ही भोपाल, जयपुर, अहमदाबाद व मेरठ आदि जगहों पर हिंदू सुरक्षित नहीं हैं।

मंदिर में दर्शन के बाद होगा जश्न

डा. तोगडिय़ा ने कहा कि सम्मेलन जश्न के लिए नहीं, बल्कि हिंदुओं को जगाने के लिए हैं। उन्होंने कहा कि जश्न उस दिन मनाया जाएगा, जिस दिन मेरठ के हिंदू अयोध्या पहुंचकर राम मंदिर में दर्शन करेंगे तभी हिंदुओं के जश्न का समय आएगा। उन्होंने कहा कि विकास तभी मायने रखेगा जब भारत हिंदू राष्ट्र बन जाएगा। उन्होंने कहा कि विश्व के व्यापार का केंद्र कहा जाने वाला वल्र्ड ट्रेड सेंटर का नामों निशान भी नहीं रह गया। इसलिए विकास के साथ ही देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की जरूरत है।

नहीं होने देंगे धर्मांतरण

डा.तोगडिय़ा ने हिंदुओं को धर्मांतरण न होने देने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि हिंदू बेटियों का धर्मांतरण नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने लव जिहाद के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाने और आंदोलन करने के लिए युवाओं को प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने आजादी के बाद से अब तक लगातार घटती हिंदू जनसंख्या के प्रतिशत पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा सौ करोड़ हिंदुओं की सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि को बनाए रखने के लिए हिंदुओं को जागना पड़ेगा। गोहत्या को रोकने के लिए डा. तोगडिय़ा ने हिंदुओं को गाय की रक्षा के लिए प्रेरित किया।
स्त्रोत : दैनिक जागरण