Wednesday, January 04, 2012
देश भक्ति से हर समस्या का समाधान : दास
देश भक्ति से हर समस्या का समाधान : दास
राउरकेला,vsk
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राउरकेला इकाई का दो दिवसीय जिला सम्मेलन संपन्न हो गया है। सेक्टर-6 स्थित सरस्वती शिशु विद्यामंदिर में 31 दिसंबर से एक जनवरी तक चले दो दिवसीय सम्मेलन में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। एक जनवरी रविवार को सम्मेलन के समापन पर भव्य पथ संचलन निकाला गया।
इस सम्मेलन के समापन दिवस पर मुख्य वक्ता के रूप में उत्कल प्रांत शारीरिक प्रमुख ईं. सुदर्शन दास ने शामिल होकर देश की विभिन्न समस्याओं तथा इसके समाधान पर चर्चा की। उन्हाेंने कहा कि प्रखर देशभक्त व्यक्तियों का निर्माण होने से आतंकवाद, माओवाद, भ्रष्टाचार, घुसपैठ आदि समस्याओं का समाधान स्वत ही हो जाएगा। ऐसे देशभक्त व्यक्तियों का निर्माण किसी स्कूल अथवा कालेज में नहीं, बल्कि संघ की शाखाओं में ही संभव है। इस सभा में मुख्य अतिथि के रूप में मकरध्वज मांझी ने भी अपना सारगर्भित वक्तव्य रखा। विवेकानंद साहु ने समारोह का संचालन किया। इस सम्मेलन के समापन दिवस पर अपराह्नं के समय भव्य पथ संचलन निकाला गया। सभा के प्रारंभ में संघ की शाखा में चलने वाले दैनिक कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया गया। इस दो दिवसीय सम्मेलन का संचालन प्रांत प्रचारक प्रमुख सीमांचल खटुआ, विभाग प्रचारक प्रणव नायक, विभाग संघचालक दुर्गामाधव नायक, विभाग कार्यावाह युधिष्ठिर महांत, विभाग सेवा प्रमुख प्रफुल्ल पटेल आदि का सहयोग रहा। इस सम्मेलन में राउरकेला नगर समेत लहुणीपाड़ा, बणई, राजगांगपुर, बिसरा, बीरमित्रपुर, नुआगांव आदि अंचलों के स्वयंसेवक शामिल हुए।
देश भक्ति से हर समस्या का समाधान : दास
देश भक्ति से हर समस्या का समाधान : दास
राउरकेला,vsk
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राउरकेला इकाई का दो दिवसीय जिला सम्मेलन संपन्न हो गया है। सेक्टर-6 स्थित सरस्वती शिशु विद्यामंदिर में 31 दिसंबर से एक जनवरी तक चले दो दिवसीय सम्मेलन में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। एक जनवरी रविवार को सम्मेलन के समापन पर भव्य पथ संचलन निकाला गया।
इस सम्मेलन के समापन दिवस पर मुख्य वक्ता के रूप में उत्कल प्रांत शारीरिक प्रमुख ईं. सुदर्शन दास ने शामिल होकर देश की विभिन्न समस्याओं तथा इसके समाधान पर चर्चा की। उन्हाेंने कहा कि प्रखर देशभक्त व्यक्तियों का निर्माण होने से आतंकवाद, माओवाद, भ्रष्टाचार, घुसपैठ आदि समस्याओं का समाधान स्वत ही हो जाएगा। ऐसे देशभक्त व्यक्तियों का निर्माण किसी स्कूल अथवा कालेज में नहीं, बल्कि संघ की शाखाओं में ही संभव है। इस सभा में मुख्य अतिथि के रूप में मकरध्वज मांझी ने भी अपना सारगर्भित वक्तव्य रखा। विवेकानंद साहु ने समारोह का संचालन किया। इस सम्मेलन के समापन दिवस पर अपराह्नं के समय भव्य पथ संचलन निकाला गया। सभा के प्रारंभ में संघ की शाखा में चलने वाले दैनिक कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया गया। इस दो दिवसीय सम्मेलन का संचालन प्रांत प्रचारक प्रमुख सीमांचल खटुआ, विभाग प्रचारक प्रणव नायक, विभाग संघचालक दुर्गामाधव नायक, विभाग कार्यावाह युधिष्ठिर महांत, विभाग सेवा प्रमुख प्रफुल्ल पटेल आदि का सहयोग रहा। इस सम्मेलन में राउरकेला नगर समेत लहुणीपाड़ा, बणई, राजगांगपुर, बिसरा, बीरमित्रपुर, नुआगांव आदि अंचलों के स्वयंसेवक शामिल हुए।
राउरकेला,vsk
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राउरकेला इकाई का दो दिवसीय जिला सम्मेलन संपन्न हो गया है। सेक्टर-6 स्थित सरस्वती शिशु विद्यामंदिर में 31 दिसंबर से एक जनवरी तक चले दो दिवसीय सम्मेलन में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। एक जनवरी रविवार को सम्मेलन के समापन पर भव्य पथ संचलन निकाला गया।
इस सम्मेलन के समापन दिवस पर मुख्य वक्ता के रूप में उत्कल प्रांत शारीरिक प्रमुख ईं. सुदर्शन दास ने शामिल होकर देश की विभिन्न समस्याओं तथा इसके समाधान पर चर्चा की। उन्हाेंने कहा कि प्रखर देशभक्त व्यक्तियों का निर्माण होने से आतंकवाद, माओवाद, भ्रष्टाचार, घुसपैठ आदि समस्याओं का समाधान स्वत ही हो जाएगा। ऐसे देशभक्त व्यक्तियों का निर्माण किसी स्कूल अथवा कालेज में नहीं, बल्कि संघ की शाखाओं में ही संभव है। इस सभा में मुख्य अतिथि के रूप में मकरध्वज मांझी ने भी अपना सारगर्भित वक्तव्य रखा। विवेकानंद साहु ने समारोह का संचालन किया। इस सम्मेलन के समापन दिवस पर अपराह्नं के समय भव्य पथ संचलन निकाला गया। सभा के प्रारंभ में संघ की शाखा में चलने वाले दैनिक कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया गया। इस दो दिवसीय सम्मेलन का संचालन प्रांत प्रचारक प्रमुख सीमांचल खटुआ, विभाग प्रचारक प्रणव नायक, विभाग संघचालक दुर्गामाधव नायक, विभाग कार्यावाह युधिष्ठिर महांत, विभाग सेवा प्रमुख प्रफुल्ल पटेल आदि का सहयोग रहा। इस सम्मेलन में राउरकेला नगर समेत लहुणीपाड़ा, बणई, राजगांगपुर, बिसरा, बीरमित्रपुर, नुआगांव आदि अंचलों के स्वयंसेवक शामिल हुए।
अधिकार पाने ग्राहक सचेत हों : बगडि़या
अधिकार पाने ग्राहक सचेत हों : बगडि़या
राउरकेला,vsk
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की ओर से आमबगान गुंडिचा मंदिर परिसर में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि समाजसेवी अलोक बगडि़या ने कहा कि उपभोक्ताओं को अधिकार तभी मिल सकता है जब वे जागरूक रहें। उन्होंने उपभोक्ताओं से सामान खरीददारी के समय उसे ठीक तरह से परखने, रसीद लेने आदि के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया, ताकि किसी प्रकर की ठगी या त्रुटि आने पर उपभोक्ता फोरम में जाकर अधिकार का दावा किया जा सकता है।
ग्राहक सप्ताह पर आयोजित इस कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि पूर्व आपूर्ति अधिकारी केदारनाथ पटेल ने उपभोक्ता सामग्रियों का अधिक इस्तेमाल करने वाली महिलाओं को इसके प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम में राउरकेला कालेज के वाइस प्रिंसिपल प्रो. जोगेश्वर साहू, अधिवक्ता प्रमोद कुमार देवता, प्रफुल्ल कुमार मिश्र, पूर्व ओडि़शा प्रशासनिक सेवा अधिकारी शांतनु साहू,अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के प्रांतीय संयुक्त संयोजन सचिव रामचंद्र स्वाई उपस्थित थे। उन्होंने ग्राहक व उपभोक्ताओं की भूमिका एवं जागरूकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी वटकृष्ण पंडा ने किया। इसमें राउरकेला शाखा के संयोजक वद्रीनारायण महापात्र, निखिल प्रधान आदि लोगों ने भी अपने विचार रखे।
राउरकेला,vsk
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की ओर से आमबगान गुंडिचा मंदिर परिसर में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि समाजसेवी अलोक बगडि़या ने कहा कि उपभोक्ताओं को अधिकार तभी मिल सकता है जब वे जागरूक रहें। उन्होंने उपभोक्ताओं से सामान खरीददारी के समय उसे ठीक तरह से परखने, रसीद लेने आदि के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया, ताकि किसी प्रकर की ठगी या त्रुटि आने पर उपभोक्ता फोरम में जाकर अधिकार का दावा किया जा सकता है।
ग्राहक सप्ताह पर आयोजित इस कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि पूर्व आपूर्ति अधिकारी केदारनाथ पटेल ने उपभोक्ता सामग्रियों का अधिक इस्तेमाल करने वाली महिलाओं को इसके प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम में राउरकेला कालेज के वाइस प्रिंसिपल प्रो. जोगेश्वर साहू, अधिवक्ता प्रमोद कुमार देवता, प्रफुल्ल कुमार मिश्र, पूर्व ओडि़शा प्रशासनिक सेवा अधिकारी शांतनु साहू,अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के प्रांतीय संयुक्त संयोजन सचिव रामचंद्र स्वाई उपस्थित थे। उन्होंने ग्राहक व उपभोक्ताओं की भूमिका एवं जागरूकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी वटकृष्ण पंडा ने किया। इसमें राउरकेला शाखा के संयोजक वद्रीनारायण महापात्र, निखिल प्रधान आदि लोगों ने भी अपने विचार रखे।
सामर्थ्यवान दरिद्रता मिटाएं : ध्यानमूर्ति
सामर्थ्यवान दरिद्रता मिटाएं : ध्यानमूर्ति
राउरकेला,vsk
अग्रसेन भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के समापन दिवस पर साध्वी ध्यानमूर्ति ने कृष्ण सुदामा चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृष्ण सुदामा का मिलन लक्ष्मीनारायण व दरिद्रनारायण का मिलन है। इसमें सामर्थ्य व निर्धन में प्रेम भाव को दर्शाया गया है। उन्होंने कृष्ण सुदामा के मिलन को वर्तमान समय से जोड़ते हुए कहा कि शहर में धनी व हर तरह से सामर्थ्यवान लोग हैं। वे लक्ष्मीनारायण की भूमिका में ग्रामीण व वन क्षेत्र में रह रहे असहाय व जरूरतमंद दरिद्रनारायणों का उद्धार करने को आगे हैं। यही उनकी संपत्ति का सदुपयोग भी है।
अग्रसेन भवन में आयोजित भागवत कथा के समापन दिवस पर उन्होंने कंस बध, अवधूत 24 गुरु प्रसंग एवं भागवत के प्रथम से द्वादश स्कंध तक का संक्षिप्त पाठ किया। समापन दिवस पर कृष्ण राधा की पूजा अर्चना एवं फूलों की होली खेली गई एवं प्रसाद सेवन का कार्यक्रम हुआ। समाजसेवी सुदर्शन गोयल ने इसके आयोजन में सहायता के लिए महाराजा अग्रसेन सेवा संघ, प्रशासन एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार प्रकट किया। कार्यक्रम के आयोजन में हरिओम बंसल, पवन अग्रवाल, उत्तम अग्रवाल, तरसेम गर्ग, वेनीगोपाल मलानी, वेंकट अग्रवाल, श्याम बिहारी गोयल, आनंद अग्रवाल, राजेश गर्ग समेत अन्य भक्तों ने अहम भूमिका निभाई।
राउरकेला,vsk
अग्रसेन भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के समापन दिवस पर साध्वी ध्यानमूर्ति ने कृष्ण सुदामा चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृष्ण सुदामा का मिलन लक्ष्मीनारायण व दरिद्रनारायण का मिलन है। इसमें सामर्थ्य व निर्धन में प्रेम भाव को दर्शाया गया है। उन्होंने कृष्ण सुदामा के मिलन को वर्तमान समय से जोड़ते हुए कहा कि शहर में धनी व हर तरह से सामर्थ्यवान लोग हैं। वे लक्ष्मीनारायण की भूमिका में ग्रामीण व वन क्षेत्र में रह रहे असहाय व जरूरतमंद दरिद्रनारायणों का उद्धार करने को आगे हैं। यही उनकी संपत्ति का सदुपयोग भी है।
अग्रसेन भवन में आयोजित भागवत कथा के समापन दिवस पर उन्होंने कंस बध, अवधूत 24 गुरु प्रसंग एवं भागवत के प्रथम से द्वादश स्कंध तक का संक्षिप्त पाठ किया। समापन दिवस पर कृष्ण राधा की पूजा अर्चना एवं फूलों की होली खेली गई एवं प्रसाद सेवन का कार्यक्रम हुआ। समाजसेवी सुदर्शन गोयल ने इसके आयोजन में सहायता के लिए महाराजा अग्रसेन सेवा संघ, प्रशासन एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार प्रकट किया। कार्यक्रम के आयोजन में हरिओम बंसल, पवन अग्रवाल, उत्तम अग्रवाल, तरसेम गर्ग, वेनीगोपाल मलानी, वेंकट अग्रवाल, श्याम बिहारी गोयल, आनंद अग्रवाल, राजेश गर्ग समेत अन्य भक्तों ने अहम भूमिका निभाई।
बरगढ़ के विश्व प्रसिद्ध धनुयात्रा के पांचवे दिन
बरगढ़ के विश्व प्रसिद्ध धनुयात्रा के पांचवे दिन
संबलपुर,vsk : बरगढ़ के विश्व प्रसिद्ध धनुयात्रा के पांचवे दिन, भगवान श्रीकृष्ण की एक और लीला देखने को मिली। श्रीकृष्ण की हत्या करने आए कालिया नाग को भगवान श्रीकृष्ण ने मार डाला।
इसी तरह, मथुरानगरी में महाराज कंस अपनी मौत से भयभीत होकर अपने मंत्रियों के साथ आपात बैठक की और भगवान श्रीकृष्ण से निपटने की योजना बनाने में व्यस्त रहे।
गोपपुर में भगवान कृष्ण और भाई बलराम की शरारत से माता यशोदा परेशान रहीं। श्रीकृष्ण और उनके साथियों ने मिलकर माखन चोरी की और फिर गांव के निकट कालंदी झील में नहाने चले गए, जहां कालिया नाग ने भगवान श्रीकृष्ण को मारने की कोशिश की, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उसे मार डाला। कालिया मर्दन के बाद गोपपुर में लोगों ने श्रीकृष्ण की जय जयकार की। उधर मथुरा नगरी में महाराज कंस अपने साथी राक्षस-राक्षसियों की गोपपुर में हत्या किए जाने को लेकर चिंतित और विचलित रहे। उन्होंने मंत्री परिषद की आपात बैठक बुलाई और पुतना, बका, राकटा, धेनु,संढासुर और तृणा जैसे पराक्रमी राक्षस-राक्षसियों की हत्या के बारे में जानकारी ली।
महाराज कंस ने खुद को दिलासा दिया कि कृष्ण जैसा एक छोटा बालक उसकी हत्या नहीं कर सकता। इसी तरह देववाणी के सच होने पर भी उन्हें संदेह हुआ। आपात बैठक में, महाराज कंस ने आगे की रणनीति तय की और पड़ोसी राजाओं के साथ भी इस विषय पर बैठक करने का निर्णय लिया।
संबलपुर,vsk : बरगढ़ के विश्व प्रसिद्ध धनुयात्रा के पांचवे दिन, भगवान श्रीकृष्ण की एक और लीला देखने को मिली। श्रीकृष्ण की हत्या करने आए कालिया नाग को भगवान श्रीकृष्ण ने मार डाला।
इसी तरह, मथुरानगरी में महाराज कंस अपनी मौत से भयभीत होकर अपने मंत्रियों के साथ आपात बैठक की और भगवान श्रीकृष्ण से निपटने की योजना बनाने में व्यस्त रहे।
गोपपुर में भगवान कृष्ण और भाई बलराम की शरारत से माता यशोदा परेशान रहीं। श्रीकृष्ण और उनके साथियों ने मिलकर माखन चोरी की और फिर गांव के निकट कालंदी झील में नहाने चले गए, जहां कालिया नाग ने भगवान श्रीकृष्ण को मारने की कोशिश की, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उसे मार डाला। कालिया मर्दन के बाद गोपपुर में लोगों ने श्रीकृष्ण की जय जयकार की। उधर मथुरा नगरी में महाराज कंस अपने साथी राक्षस-राक्षसियों की गोपपुर में हत्या किए जाने को लेकर चिंतित और विचलित रहे। उन्होंने मंत्री परिषद की आपात बैठक बुलाई और पुतना, बका, राकटा, धेनु,संढासुर और तृणा जैसे पराक्रमी राक्षस-राक्षसियों की हत्या के बारे में जानकारी ली।
महाराज कंस ने खुद को दिलासा दिया कि कृष्ण जैसा एक छोटा बालक उसकी हत्या नहीं कर सकता। इसी तरह देववाणी के सच होने पर भी उन्हें संदेह हुआ। आपात बैठक में, महाराज कंस ने आगे की रणनीति तय की और पड़ोसी राजाओं के साथ भी इस विषय पर बैठक करने का निर्णय लिया।
बाक्साइट से लेकर लौह अयस्क जैसे खदान द्रव्य समुद्र से उत्तोलन करने के लिए भारतीय वैज्ञानिक तैयार हो रहे हैं।
भुवनेश्वर,vsk
समुद्र से खदान उत्तोलन में केवल पेट्रोलियम सामग्री तक सीमित है, मगर आगे मैगानिज, बाक्साइट से लेकर लौह अयस्क जैसे खदान द्रव्य समुद्र से उत्तोलन करने के लिए भारतीय वैज्ञानिक तैयार हो रहे हैं। भारत के महासागर में व्यापक इलाके के गहरे समुद्र में खदान संपदा के बारे में सर्वे कार्य सम्पन्न होने की बात भू-विज्ञान मंत्रणालय के सचिव डाक्टर शैलेश्री नायक ने कही है। देश के दक्षिण तट को लगे रहने वाले इस महासागर में क्रोमाइट, कापर कोबाल्ट एंवं मैगनीज है। भारत महासागर से क्रोमाइट उत्तोलन करने के लिए सरकार स्वतंत्र नीति बनाएगी। समुद्र से खदान संपदा उत्तोलन करने के लिए इस बीच भू-विज्ञान मंत्रणालय की तरफ से प्रयास जारी रहने की बात डाक्टर नायक ने कही है। उन्होंने कहा है कि इसे उत्तोलन करने के लिए ज्ञान कौशल विकास की दिशा में रीक्ष के वैज्ञानिकों की सहायता ली जा रही है। समुद्र सस्य को मापने के साथ संरक्षित खदान संबल की गुणवत्ता जानने के लिए एक स्वतंत्र यान का विकसित किया गया है। यह समुद्र के 5000 मीटर गहराई तक खदान गुणवत्ता के बारे में अनुध्यान कर सकता है। भारत महासागर समेत ओड़िशा तट से लगे रहने वाले बंगोप सागर में भी खदान संबल मिलने की बात उन्होंने कही है।
समुद्र से खदान उत्तोलन में केवल पेट्रोलियम सामग्री तक सीमित है, मगर आगे मैगानिज, बाक्साइट से लेकर लौह अयस्क जैसे खदान द्रव्य समुद्र से उत्तोलन करने के लिए भारतीय वैज्ञानिक तैयार हो रहे हैं। भारत के महासागर में व्यापक इलाके के गहरे समुद्र में खदान संपदा के बारे में सर्वे कार्य सम्पन्न होने की बात भू-विज्ञान मंत्रणालय के सचिव डाक्टर शैलेश्री नायक ने कही है। देश के दक्षिण तट को लगे रहने वाले इस महासागर में क्रोमाइट, कापर कोबाल्ट एंवं मैगनीज है। भारत महासागर से क्रोमाइट उत्तोलन करने के लिए सरकार स्वतंत्र नीति बनाएगी। समुद्र से खदान संपदा उत्तोलन करने के लिए इस बीच भू-विज्ञान मंत्रणालय की तरफ से प्रयास जारी रहने की बात डाक्टर नायक ने कही है। उन्होंने कहा है कि इसे उत्तोलन करने के लिए ज्ञान कौशल विकास की दिशा में रीक्ष के वैज्ञानिकों की सहायता ली जा रही है। समुद्र सस्य को मापने के साथ संरक्षित खदान संबल की गुणवत्ता जानने के लिए एक स्वतंत्र यान का विकसित किया गया है। यह समुद्र के 5000 मीटर गहराई तक खदान गुणवत्ता के बारे में अनुध्यान कर सकता है। भारत महासागर समेत ओड़िशा तट से लगे रहने वाले बंगोप सागर में भी खदान संबल मिलने की बात उन्होंने कही है।
मैक्सिको वैज्ञानिक को मिला यूनेस्को कलिंग पुरस्कार
भुवनेश्वर: 99 वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस अवसर पर आज किट् अडिटोरियम में आयोजित एक समारोह में मैक्सि्को के वैज्ञानिक रेने राउन डा.कलिन को वर्ष 2012 के लिए प्रवाद पुरुष बीजू पटनायक द्वारा प्रतिष्ठित यूनेस्को कलिंग सम्मान से सम्मानित किया गया है। इस सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक तथा यूनेस्को के सहकारी महानिदेशक डा.ग्रेनेट कालोन्जी ने प्रदान किया है। गौरतलब है कि विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए वर्ष 1952 से यह पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है।
Tuesday, January 03, 2012
एम्बुलेंस सेवा मुफ्त करने की मांग पर भारतीय जनता पार्टी धरना
एम्बुलेंस सेवा मुफ्त करने की मांग पर भारतीय जनता पार्टी धरना
कटक, vsk
कटक बड़ा मेडिकल में मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड को ले जाने के लिए बैट्रीचालित एम्बुलेंस सेवा बहाल है। लेकिन इस सेवा के लिए मरीजों से 30 रुपये के हिसाब से वसूला जा रहा है। इस निर्णय का विरोध करते हुए कटक नगर भारतीय जनता पार्टी की ओर से धरना प्रदर्शन किया गया है। मंगलवार को कटक नगर जिला भाजपा के नए अध्यक्ष ललाटेन्दु बडु, राज्य सचिव नयन किशोर महान्ति की अगुवाई में भाजपाइयों ने एससीबी अधीक्षक कार्यालय के सामने धरना पर बैठ। इसके अलावा कटक बड़ा मेडिकल के विभिन्न समस्याओं को हल करने के लिए मांग किए। अध्यक्ष श्री बडु के मुताबिक राज्य का सबसे बड़ा मेडिकल में इस सेवा को शुरू करते समय स्वास्थ्य मंत्री इस नि:शुल्क घोषित किए थे। अब इसके लिए शुल्क वसूलने के लिए निर्णय क्यों लिया जा रहा है। करोड़ों रुपये का यूजर्स फीस मरीजों से वसूली जा रही है, जिससे यह समस्या के अलावा और कई समस्या का हल कर यहां मरीजों को बेहतर सेवा दिया जा सकता है। इस मौके पर 7 दफा वाला एक ज्ञापन भी एससीबी अधीक्षक को सौंपा गया है
एम्बुलेंस सेवा मुफ्त करने की मांग पर भारतीय जनता पार्टी धरना
एम्बुलेंस सेवा मुफ्त करने की मांग पर भारतीय जनता पार्टी धरना
कटक, vsk
कटक बड़ा मेडिकल में मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड को ले जाने के लिए बैट्रीचालित एम्बुलेंस सेवा बहाल है। लेकिन इस सेवा के लिए मरीजों से 30 रुपये के हिसाब से वसूला जा रहा है। इस निर्णय का विरोध करते हुए कटक नगर भारतीय जनता पार्टी की ओर से धरना प्रदर्शन किया गया है। मंगलवार को कटक नगर जिला भाजपा के नए अध्यक्ष ललाटेन्दु बडु, राज्य सचिव नयन किशोर महान्ति की अगुवाई में भाजपाइयों ने एससीबी अधीक्षक कार्यालय के सामने धरना पर बैठ। इसके अलावा कटक बड़ा मेडिकल के विभिन्न समस्याओं को हल करने के लिए मांग किए। अध्यक्ष श्री बडु के मुताबिक राज्य का सबसे बड़ा मेडिकल में इस सेवा को शुरू करते समय स्वास्थ्य मंत्री इस नि:शुल्क घोषित किए थे। अब इसके लिए शुल्क वसूलने के लिए निर्णय क्यों लिया जा रहा है। करोड़ों रुपये का यूजर्स फीस मरीजों से वसूली जा रही है, जिससे यह समस्या के अलावा और कई समस्या का हल कर यहां मरीजों को बेहतर सेवा दिया जा सकता है। इस मौके पर 7 दफा वाला एक ज्ञापन भी एससीबी अधीक्षक को सौंपा गया है
कटक, vsk
कटक बड़ा मेडिकल में मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड को ले जाने के लिए बैट्रीचालित एम्बुलेंस सेवा बहाल है। लेकिन इस सेवा के लिए मरीजों से 30 रुपये के हिसाब से वसूला जा रहा है। इस निर्णय का विरोध करते हुए कटक नगर भारतीय जनता पार्टी की ओर से धरना प्रदर्शन किया गया है। मंगलवार को कटक नगर जिला भाजपा के नए अध्यक्ष ललाटेन्दु बडु, राज्य सचिव नयन किशोर महान्ति की अगुवाई में भाजपाइयों ने एससीबी अधीक्षक कार्यालय के सामने धरना पर बैठ। इसके अलावा कटक बड़ा मेडिकल के विभिन्न समस्याओं को हल करने के लिए मांग किए। अध्यक्ष श्री बडु के मुताबिक राज्य का सबसे बड़ा मेडिकल में इस सेवा को शुरू करते समय स्वास्थ्य मंत्री इस नि:शुल्क घोषित किए थे। अब इसके लिए शुल्क वसूलने के लिए निर्णय क्यों लिया जा रहा है। करोड़ों रुपये का यूजर्स फीस मरीजों से वसूली जा रही है, जिससे यह समस्या के अलावा और कई समस्या का हल कर यहां मरीजों को बेहतर सेवा दिया जा सकता है। इस मौके पर 7 दफा वाला एक ज्ञापन भी एससीबी अधीक्षक को सौंपा गया है
मानव धर्म पुस्तक का विमोचन
मानव धर्म पुस्तक का विमोचन
राउरकेला,vsk-भंज भवन में आयोजित उत्कल दिव्य जीवन संघ के सम्मेलन व युवा शिविर में अरविंद पंडा द्वारा लिखित व वैदिक साहित्य प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक मानव धर्म का विमोचन संघ के अंतर्राष्ट्रीय महासचिव स्वामी पद्मानाभानंद सरस्वती के हाथों किया गया। उपस्थित लोगों ने इस पुस्तक के विषय वस्तु को वर्तमान समय के लिए अति उपयोगी बताया एवं लेखक के इस चिंतन की सराहना की।
स्वामी जीन ने कहा कि स्व आशीर्वचन से समाज के लिए इसे जरूरी एवं पवित्र कर्तव्य बताया। पुस्तक के प्रणेता श्री पंडा को स्वामीजी ने आशीर्वाद दिया। पुस्तक विमोचन समारोह में स्वामी ब्रह्म साक्षारानंद सरस्वती, स्वामी धर्म प्रकाशानंद सरस्वती एवं प्रो. वृंदावन नायक भी उपस्थित थे। उन्होंने साहित्य के माध्यम से समाज सेवा व समाज को सही रास्ते पर ले जाने पर जोर दिया। उल्लेखनीय है कि श्री पंडा राउरकेला इस्पात संयंत्र में हाट स्ट्रीप मिल विभाग में इलेक्ट्रिकल सेक्शन में वरिष्ठ तकनीशियन के रूप में कार्यरत हैं। उनकी पहली पुस्तक अष्टांग योग पिछले वर्ष 26 जनवरी को योग गुरु स्वामी रामदेव के द्वारा सुंदरगढ़ में विमोचित की गई थी। इस पुस्तक की भी लोगों ने काफी सराहना की और योग क्षेत्र में इसे काफी उपयोगी बताया।
राउरकेला,vsk-भंज भवन में आयोजित उत्कल दिव्य जीवन संघ के सम्मेलन व युवा शिविर में अरविंद पंडा द्वारा लिखित व वैदिक साहित्य प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक मानव धर्म का विमोचन संघ के अंतर्राष्ट्रीय महासचिव स्वामी पद्मानाभानंद सरस्वती के हाथों किया गया। उपस्थित लोगों ने इस पुस्तक के विषय वस्तु को वर्तमान समय के लिए अति उपयोगी बताया एवं लेखक के इस चिंतन की सराहना की।
स्वामी जीन ने कहा कि स्व आशीर्वचन से समाज के लिए इसे जरूरी एवं पवित्र कर्तव्य बताया। पुस्तक के प्रणेता श्री पंडा को स्वामीजी ने आशीर्वाद दिया। पुस्तक विमोचन समारोह में स्वामी ब्रह्म साक्षारानंद सरस्वती, स्वामी धर्म प्रकाशानंद सरस्वती एवं प्रो. वृंदावन नायक भी उपस्थित थे। उन्होंने साहित्य के माध्यम से समाज सेवा व समाज को सही रास्ते पर ले जाने पर जोर दिया। उल्लेखनीय है कि श्री पंडा राउरकेला इस्पात संयंत्र में हाट स्ट्रीप मिल विभाग में इलेक्ट्रिकल सेक्शन में वरिष्ठ तकनीशियन के रूप में कार्यरत हैं। उनकी पहली पुस्तक अष्टांग योग पिछले वर्ष 26 जनवरी को योग गुरु स्वामी रामदेव के द्वारा सुंदरगढ़ में विमोचित की गई थी। इस पुस्तक की भी लोगों ने काफी सराहना की और योग क्षेत्र में इसे काफी उपयोगी बताया।
भारत जैसे विकाशशील देश की प्रगति में वे अपना योगदान करें-ड़ा मनमोहन सिंह
भुवनेश्वर,vsk
स्थानीय केआइआइटी यानी कीट् विश्वविद्यालय परिसर में प्रधानमंत्री ड़ा मनमोहन सिंह ने आज सुबह 10 बजे 99 वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक स्मारिका का विमोचन भी किया। प्रधानमंत्री ने देश के चुने हुए वैज्ञानिकों को वैज्ञानिक सम्मान से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री ने डा. आर. चिदम्बरम को डा. आशुतोष मुखर्जी सम्मान, डा. एस कैलाश को सीवी रमन शतवार्षिकी पुरस्कार, डा. ए एस कोलेस्कर को श्रीनिवास रामानुज शतवार्षिकी पुरस्कार, डा. मुरलीधर को जगदीश चन्द्र बसु स्मारिकी सम्मान प्रदान किया। देश विदेश से से आए अनेक वैज्ञानिकों को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक भी प्रदान किए गए। कीट् के प्रतिष्ठाता अच्युत सामन्त को जवाहर लाल नेहेरु स्मारक सम्मान से सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि राष्ट्रीय विज्ञान कांग्रेस ने विज्ञान के प्रगति में अपना योगदान किया है। मैडम क्युरी ने एक सदी पहले विज्ञान को लोकप्रिय तथा जनउपयोगी बनाने के लिए पहल की थी। तब से अब तक विज्ञान व तकनिकी ने अनेक तरक्की की है। भारत में भी विज्ञान व तकनीकी अनुसंधान के अनेक कार्य संपादित किए गये हैं। भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा पिछले कुछ सालों में अनेक अनुसंधान कार्य किए गये हैं। सरकार ने विश्वविद्यालय स्तर पर अनुसंधान कार्य को बढ़ावा देने के लिए अनुदान बढ़ाया है। वैज्ञानिकों का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जैसे विकाशशील देश की प्रगति में वे अपना योगदान करें। विज्ञान व इंजीनियरिंग शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों के मन में रुची उत्पन्न करने का आह्वान किया। 12वीं पंचवार्षिय योजना में हमें विज्ञान व तकनीकी के विकाश पर ध्यान देना होगा। प्रधानमंत्री ने विज्ञान के विकाश तथा अनुसंधान कार्य में पब्लिक- प्राईवेट पार्टनरसीप पर जोर देते हुए कहा कि इससे अपेक्षित लक्ष्य की प्राप्ति में सहजता होगी। बायो साईंस में 2000 अनुसंधान कार्यकर्ताओं के अनुसंधान का प्रावधान होगा। सरकार ने देश के लोगों को खाद्य सुरक्षा देने की नयी योजना बनाई है। प्रधानमंत्री ने आशा जताई की विकाश के लिए विज्ञान व तकनीकी के अधिक से अधिक प्रयोग की आवश्यकता जताई। उन्होंने पारंपरिक ऊर्जा स्त्रोत के साथ पवन,सौर ऊर्जा सहित गैर-पारंपरिक ऊर्जा के विकाश पर भी बल दिया।
मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस अवसर पर कहा कि विज्ञान समाज के विकाश का एक महत्वपूर्ण साधन है । विज्ञान हमारे दिमाग का दरवाजा खोलता है। ओड़िशा ने पठानी सामन्त चन्द्रशेखर जैसे अनेक वैज्ञानिक राष्ट्र को दिए हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण में बदलाव तथा वैश्विक स्तर पर ताप का बढ़ना सभी के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि विज्ञान कांग्रेस का यह अधिवेशन प्रदेश में विज्ञान के बढ़ोत्तरी में सहायक सिद्ध होगा।
इस अवसर पर प्रदेश के राज्यपाल मुरलीधर चन्द्रकांत भण्डारे, मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, केन्द्रीय विज्ञान व प्रोद्योगिकी मंत्री विलास राव देशमुख, विज्ञान व प्रोद्योगिकी राज्यमंत्री अश्विनी कुमार, भारतीय विज्ञान कांग्रेस की अध्यक्ष प्रो. गीता बाली सहित अनेक मान्यगण उपस्थित थे। भुवनेश्वर के सांसद प्रसन्न कुमार पाटशाणी, मेयर अनन्त नारायण जेना, कीट विश्व विद्यालय के कुलाधिपति आर.पी.कौशिक, उप-कुलपति डी.के त्रिपाठी सहित देश-विदेश के अनेक सम्माननीय वैज्ञानिक, विभिन्न स्कूल कालेज के हजारों छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। विज्ञान व तकनीकी के विकाश पर ध्यान देने विज्ञान कांग्रेस की अध्यक्षा प्रो. गीता बाली ने स्वागत भाषण प्रदान करते हुए कहा कि भारत विज्ञान के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कीट विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एएस कोलास्कर ने धन्यवाद दिया।
स्थानीय केआइआइटी यानी कीट् विश्वविद्यालय परिसर में प्रधानमंत्री ड़ा मनमोहन सिंह ने आज सुबह 10 बजे 99 वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक स्मारिका का विमोचन भी किया। प्रधानमंत्री ने देश के चुने हुए वैज्ञानिकों को वैज्ञानिक सम्मान से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री ने डा. आर. चिदम्बरम को डा. आशुतोष मुखर्जी सम्मान, डा. एस कैलाश को सीवी रमन शतवार्षिकी पुरस्कार, डा. ए एस कोलेस्कर को श्रीनिवास रामानुज शतवार्षिकी पुरस्कार, डा. मुरलीधर को जगदीश चन्द्र बसु स्मारिकी सम्मान प्रदान किया। देश विदेश से से आए अनेक वैज्ञानिकों को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक भी प्रदान किए गए। कीट् के प्रतिष्ठाता अच्युत सामन्त को जवाहर लाल नेहेरु स्मारक सम्मान से सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि राष्ट्रीय विज्ञान कांग्रेस ने विज्ञान के प्रगति में अपना योगदान किया है। मैडम क्युरी ने एक सदी पहले विज्ञान को लोकप्रिय तथा जनउपयोगी बनाने के लिए पहल की थी। तब से अब तक विज्ञान व तकनिकी ने अनेक तरक्की की है। भारत में भी विज्ञान व तकनीकी अनुसंधान के अनेक कार्य संपादित किए गये हैं। भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा पिछले कुछ सालों में अनेक अनुसंधान कार्य किए गये हैं। सरकार ने विश्वविद्यालय स्तर पर अनुसंधान कार्य को बढ़ावा देने के लिए अनुदान बढ़ाया है। वैज्ञानिकों का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जैसे विकाशशील देश की प्रगति में वे अपना योगदान करें। विज्ञान व इंजीनियरिंग शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों के मन में रुची उत्पन्न करने का आह्वान किया। 12वीं पंचवार्षिय योजना में हमें विज्ञान व तकनीकी के विकाश पर ध्यान देना होगा। प्रधानमंत्री ने विज्ञान के विकाश तथा अनुसंधान कार्य में पब्लिक- प्राईवेट पार्टनरसीप पर जोर देते हुए कहा कि इससे अपेक्षित लक्ष्य की प्राप्ति में सहजता होगी। बायो साईंस में 2000 अनुसंधान कार्यकर्ताओं के अनुसंधान का प्रावधान होगा। सरकार ने देश के लोगों को खाद्य सुरक्षा देने की नयी योजना बनाई है। प्रधानमंत्री ने आशा जताई की विकाश के लिए विज्ञान व तकनीकी के अधिक से अधिक प्रयोग की आवश्यकता जताई। उन्होंने पारंपरिक ऊर्जा स्त्रोत के साथ पवन,सौर ऊर्जा सहित गैर-पारंपरिक ऊर्जा के विकाश पर भी बल दिया।
मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस अवसर पर कहा कि विज्ञान समाज के विकाश का एक महत्वपूर्ण साधन है । विज्ञान हमारे दिमाग का दरवाजा खोलता है। ओड़िशा ने पठानी सामन्त चन्द्रशेखर जैसे अनेक वैज्ञानिक राष्ट्र को दिए हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण में बदलाव तथा वैश्विक स्तर पर ताप का बढ़ना सभी के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि विज्ञान कांग्रेस का यह अधिवेशन प्रदेश में विज्ञान के बढ़ोत्तरी में सहायक सिद्ध होगा।
इस अवसर पर प्रदेश के राज्यपाल मुरलीधर चन्द्रकांत भण्डारे, मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, केन्द्रीय विज्ञान व प्रोद्योगिकी मंत्री विलास राव देशमुख, विज्ञान व प्रोद्योगिकी राज्यमंत्री अश्विनी कुमार, भारतीय विज्ञान कांग्रेस की अध्यक्ष प्रो. गीता बाली सहित अनेक मान्यगण उपस्थित थे। भुवनेश्वर के सांसद प्रसन्न कुमार पाटशाणी, मेयर अनन्त नारायण जेना, कीट विश्व विद्यालय के कुलाधिपति आर.पी.कौशिक, उप-कुलपति डी.के त्रिपाठी सहित देश-विदेश के अनेक सम्माननीय वैज्ञानिक, विभिन्न स्कूल कालेज के हजारों छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। विज्ञान व तकनीकी के विकाश पर ध्यान देने विज्ञान कांग्रेस की अध्यक्षा प्रो. गीता बाली ने स्वागत भाषण प्रदान करते हुए कहा कि भारत विज्ञान के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कीट विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एएस कोलास्कर ने धन्यवाद दिया।
Monday, January 02, 2012
आदिवासी कल्याण के लिए स्वीकृत धन राशी का उपयोग राजधानी भुवनेश्वर में फ्लाई ओवर बनाने के काम में उपयोग
भुवनेश्वर:vsk आदिवासी कल्याण के लिए स्वीकृत धन राशी का उपयोग राजधानी भुवनेश्वर में फ्लाई ओवर बनाने के काम में उपयोग होने के आरोप पर सीएजी ने जांच में पाया है कि पूर्त विभाग ने आदिवासी विकास के लिए उदिष्ट धन का दुरुपयोग किया गया है। सीएजी की रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार की आंख खुली है और सरकार ने निर्देश जारी किया है कि अब से आदिवासी कल्याण के लिए दिए जाने वाले धन का उपयोग केवल उसी वर्ग के कल्याणकारी कार्यो में ही किया जाएगा। सीएजी की रिपोर्ट विधानसभा में रखे जाने के बाद राज्य सरकार के लिए इस मुद्देपर जबाव देते नहीं बना था। उपर से मुख्यमंत्री के अधीन वाले पूर्त विभाग में दुरुपयोग होने से सरकार की मुश्किल बढ़ गई थी। अब सरकार ने 12 वीं पंचवार्षिक योजना के अंतर्गत वर्ष 2012 से 2016-17 तक आदिवासी विकाश हेतु स्वीकृत धन को उसी वर्ग के हित हेतु खर्च करने तथा आदिवासी उप-योजना (टीएसपी) एवं अनुसूचित जाति उप-योजना(एससीएसपी) तैयार करने का निर्देश भी दिया गया है। राज्य सरकार के अतिरिक्त शासन सचिव तथा विकाश कमिश्नर रवि नारायण सेनापति ने इस आशय का निर्देश जारी किया है। सभी विभागों को यह निर्देश जारी करते हुए कहा गया है कि भविष्य में इस मामले पर गंभीरता पूर्वक कार्य किया जाना है।
Sunday, January 01, 2012
अन्तर्राष्ट्रीय ओड़िशी नृत्य उत्सव- 350 कलाकारों ने भाग लि
भुवनेश्वर, vsk
पिछले 23 दिसम्बर से रवीन्द्र मण्डप व उत्कल मण्डप में चल रहा अन्तर्राष्ट्रीय ओड़िशी नृत्य उत्सव शुक्रवार को संपन्न हो गया। इस नृत्य उत्सव में एकक, डबल व समूह नृत्य में करीब 500 कलाकारों ने भाग लिया। जबकि 200 से अधिक वाद्य शिल्पी व संगीतकारों ने उनका सहयोग किया। यहां तक कि ओड़िशी पर आधारित इन 8 दिनों के मध्य आयोजित कार्यशाला में 210 विद्वानों ने यहां पहुंचकर ओड़िशी के विकास में वर्तमान देखी जा रही समस्या पर चर्चा कि। उसी तरह इस 8 दिवसीय उत्सव में भुवनेश्वर, पुरी, गंजाम, अनुगुल, ढेंकानाल, कटक, केन्द्रापड़ा, जगतसिंहपुर, भद्रक, बालेश्वर, व सुन्दरगड़ जिला के कलाकारों के साथ पश्चिम बंगाल, दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, पांडीचेरी, आन्ध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश के 350 कलाकारों ने भाग लिया है। इस साल अन्तर्राष्ट्रीय ओड़िशी नृत्य महोत्सव में विदेशी कलाकारों ने भी दर्शकों का दिल जितने में सफलता हासिल की। मलेशिया, अमेरिका, इंगलैण्ड, स्वीडेन, ताइवान, चीन, पेरू, आस्ट्रेलिया, जापान आदि देशों के 150 कलाकारों ने इस ओड़िशी नृत्य महोत्सव में शिरकत किया है।
उत्सव के अंतिम संध्या को पर्यटन व संस्कृति विभाग के सचिव अशोक त्रिपाठी, पर्यटन निदेशक हरिशंकर उपाध्याय, संस्कृति विभाग के निदेशक सुशील कुमार दास, गुरू रामहरि दास, आईपीएपी के मुख्य प्रताप दास व पूर्ण पटनायक प्रमुख अतिथि के तौर पर उपस्थित रहकर कलाकारों को प्रोत्साहित किया। उत्सव के अंतिम रजनी में सबसे पहले सुचित्रा महापात्र, सुमित्रा महापात्र व संगीता गोसाईं ने मधुराष्टक के जरिए तथा इसके बाद गुरू घनश्याम स्वांई व कलाकारों द्वारा परिवेषित ताल वृंदवाद्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद गुरु रूपश्री महापात्र व साथियों द्वारा माहारी नृत्य परिवेषण किए जाने के साथ-साथ नीलकण्ठेश्वर अनुष्ठान के छोटे-छोटे कलाकारों ने गोटीपुअ नृत्य परिवेषण किया गया। इसके बाद ओड़िशी डांस एकेडमी द्वारा पल्लवी, नृत्याभिनय कृपानिधान, रूद्राक्ष फाउण्डेशन द्वारा पल्लवी व अन्त में गुरू श्रद्धा अनुष्ठान के कलाकारों ने रामायण विषयवस्तु पर आधारित नृत्याभिनय -दशानन- परिवेषण किया।
अन्तर्राष्ट्रीय ओड़िशी नृत्य उत्सव- 350 कलाकारों ने भाग लिया
भुवनेश्वर, vsk
पिछले 23 दिसम्बर से रवीन्द्र मण्डप व उत्कल मण्डप में चल रहा अन्तर्राष्ट्रीय ओड़िशी नृत्य उत्सव शुक्रवार को संपन्न हो गया। इस नृत्य उत्सव में एकक, डबल व समूह नृत्य में करीब 500 कलाकारों ने भाग लिया। जबकि 200 से अधिक वाद्य शिल्पी व संगीतकारों ने उनका सहयोग किया। यहां तक कि ओड़िशी पर आधारित इन 8 दिनों के मध्य आयोजित कार्यशाला में 210 विद्वानों ने यहां पहुंचकर ओड़िशी के विकास में वर्तमान देखी जा रही समस्या पर चर्चा कि। उसी तरह इस 8 दिवसीय उत्सव में भुवनेश्वर, पुरी, गंजाम, अनुगुल, ढेंकानाल, कटक, केन्द्रापड़ा, जगतसिंहपुर, भद्रक, बालेश्वर, व सुन्दरगड़ जिला के कलाकारों के साथ पश्चिम बंगाल, दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, पांडीचेरी, आन्ध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश के 350 कलाकारों ने भाग लिया है। इस साल अन्तर्राष्ट्रीय ओड़िशी नृत्य महोत्सव में विदेशी कलाकारों ने भी दर्शकों का दिल जितने में सफलता हासिल की। मलेशिया, अमेरिका, इंगलैण्ड, स्वीडेन, ताइवान, चीन, पेरू, आस्ट्रेलिया, जापान आदि देशों के 150 कलाकारों ने इस ओड़िशी नृत्य महोत्सव में शिरकत किया है।
उत्सव के अंतिम संध्या को पर्यटन व संस्कृति विभाग के सचिव अशोक त्रिपाठी, पर्यटन निदेशक हरिशंकर उपाध्याय, संस्कृति विभाग के निदेशक सुशील कुमार दास, गुरू रामहरि दास, आईपीएपी के मुख्य प्रताप दास व पूर्ण पटनायक प्रमुख अतिथि के तौर पर उपस्थित रहकर कलाकारों को प्रोत्साहित किया। उत्सव के अंतिम रजनी में सबसे पहले सुचित्रा महापात्र, सुमित्रा महापात्र व संगीता गोसाईं ने मधुराष्टक के जरिए तथा इसके बाद गुरू घनश्याम स्वांई व कलाकारों द्वारा परिवेषित ताल वृंदवाद्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद गुरु रूपश्री महापात्र व साथियों द्वारा माहारी नृत्य परिवेषण किए जाने के साथ-साथ नीलकण्ठेश्वर अनुष्ठान के छोटे-छोटे कलाकारों ने गोटीपुअ नृत्य परिवेषण किया गया। इसके बाद ओड़िशी डांस एकेडमी द्वारा पल्लवी, नृत्याभिनय कृपानिधान, रूद्राक्ष फाउण्डेशन द्वारा पल्लवी व अन्त में गुरू श्रद्धा अनुष्ठान के कलाकारों ने रामायण विषयवस्तु पर आधारित नृत्याभिनय -दशानन- परिवेषण किया।
पिछले 23 दिसम्बर से रवीन्द्र मण्डप व उत्कल मण्डप में चल रहा अन्तर्राष्ट्रीय ओड़िशी नृत्य उत्सव शुक्रवार को संपन्न हो गया। इस नृत्य उत्सव में एकक, डबल व समूह नृत्य में करीब 500 कलाकारों ने भाग लिया। जबकि 200 से अधिक वाद्य शिल्पी व संगीतकारों ने उनका सहयोग किया। यहां तक कि ओड़िशी पर आधारित इन 8 दिनों के मध्य आयोजित कार्यशाला में 210 विद्वानों ने यहां पहुंचकर ओड़िशी के विकास में वर्तमान देखी जा रही समस्या पर चर्चा कि। उसी तरह इस 8 दिवसीय उत्सव में भुवनेश्वर, पुरी, गंजाम, अनुगुल, ढेंकानाल, कटक, केन्द्रापड़ा, जगतसिंहपुर, भद्रक, बालेश्वर, व सुन्दरगड़ जिला के कलाकारों के साथ पश्चिम बंगाल, दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, पांडीचेरी, आन्ध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश के 350 कलाकारों ने भाग लिया है। इस साल अन्तर्राष्ट्रीय ओड़िशी नृत्य महोत्सव में विदेशी कलाकारों ने भी दर्शकों का दिल जितने में सफलता हासिल की। मलेशिया, अमेरिका, इंगलैण्ड, स्वीडेन, ताइवान, चीन, पेरू, आस्ट्रेलिया, जापान आदि देशों के 150 कलाकारों ने इस ओड़िशी नृत्य महोत्सव में शिरकत किया है।
उत्सव के अंतिम संध्या को पर्यटन व संस्कृति विभाग के सचिव अशोक त्रिपाठी, पर्यटन निदेशक हरिशंकर उपाध्याय, संस्कृति विभाग के निदेशक सुशील कुमार दास, गुरू रामहरि दास, आईपीएपी के मुख्य प्रताप दास व पूर्ण पटनायक प्रमुख अतिथि के तौर पर उपस्थित रहकर कलाकारों को प्रोत्साहित किया। उत्सव के अंतिम रजनी में सबसे पहले सुचित्रा महापात्र, सुमित्रा महापात्र व संगीता गोसाईं ने मधुराष्टक के जरिए तथा इसके बाद गुरू घनश्याम स्वांई व कलाकारों द्वारा परिवेषित ताल वृंदवाद्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद गुरु रूपश्री महापात्र व साथियों द्वारा माहारी नृत्य परिवेषण किए जाने के साथ-साथ नीलकण्ठेश्वर अनुष्ठान के छोटे-छोटे कलाकारों ने गोटीपुअ नृत्य परिवेषण किया गया। इसके बाद ओड़िशी डांस एकेडमी द्वारा पल्लवी, नृत्याभिनय कृपानिधान, रूद्राक्ष फाउण्डेशन द्वारा पल्लवी व अन्त में गुरू श्रद्धा अनुष्ठान के कलाकारों ने रामायण विषयवस्तु पर आधारित नृत्याभिनय -दशानन- परिवेषण किया।
Saturday, December 31, 2011
Ayyappa devotees from Andhra find highly motivated swayamsevaks in Salem
Ayyappa devotees from Andhra find highly motivated swayamsevaks in Salem
Recently, the volunteers of Ayyappa Sewa Samajam was on the relief work of deceased persons when a van carrying Ayyappa devotees from Guntur District of Andhra Pradesh. The van met with an accident when the van collided with a bus at Thoppur, near Salem, Tamilnadu killing seven pilgrims in the early hours of the day. Two persons who were survived were admitted in the hospital. The DSP Muthu Karruppan and SP Muthusamy along with volunteers, tried to trace the whereabouts of the deceased persons. The volunteers of Ayyappa Sewa Samajam suggested that the addresses and details can be traced through mail for verification, so that the two persons admitted in the hospital were not disturbed. They took photo of the departed persons, called the relatives over phone, and took their mail id. They sent the photos for verification through mail. A police official was kind enough to offer as his contribution, a part of the expense. The entire expenses for post-mortem, ambulance etc. were met by the volunteers. The Salem unit of Ayyappa Seva Sangam helped in arranging ambulances to send the bodies to the natives to Guntur. To cap it all, when the ambulance entered the native village carrying the dead bodies after post-mortem, it is reported that around 15000 villagers were waiting. The anxiety of the villagers resulted in a glass pane of the ambulance getting broken. The driver was so impressed by the size of the mourning crowd that he did not press for the re-imbursement of the broken window.
It is to be remembered that High Court of Kerala had recommended the services of the Samajam for helping Ayyappa devotees during the pilgrimage. It is remarkable that the Samajam came into being as a result of extensive field study of the pilgrim route to Sabarimala by Swayamsevaks.
Recently, the volunteers of Ayyappa Sewa Samajam was on the relief work of deceased persons when a van carrying Ayyappa devotees from Guntur District of Andhra Pradesh. The van met with an accident when the van collided with a bus at Thoppur, near Salem, Tamilnadu killing seven pilgrims in the early hours of the day. Two persons who were survived were admitted in the hospital. The DSP Muthu Karruppan and SP Muthusamy along with volunteers, tried to trace the whereabouts of the deceased persons. The volunteers of Ayyappa Sewa Samajam suggested that the addresses and details can be traced through mail for verification, so that the two persons admitted in the hospital were not disturbed. They took photo of the departed persons, called the relatives over phone, and took their mail id. They sent the photos for verification through mail. A police official was kind enough to offer as his contribution, a part of the expense. The entire expenses for post-mortem, ambulance etc. were met by the volunteers. The Salem unit of Ayyappa Seva Sangam helped in arranging ambulances to send the bodies to the natives to Guntur. To cap it all, when the ambulance entered the native village carrying the dead bodies after post-mortem, it is reported that around 15000 villagers were waiting. The anxiety of the villagers resulted in a glass pane of the ambulance getting broken. The driver was so impressed by the size of the mourning crowd that he did not press for the re-imbursement of the broken window.
It is to be remembered that High Court of Kerala had recommended the services of the Samajam for helping Ayyappa devotees during the pilgrimage. It is remarkable that the Samajam came into being as a result of extensive field study of the pilgrim route to Sabarimala by Swayamsevaks.
Friday, December 30, 2011
Monday, December 26, 2011
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MUTHU JI OF SALEM
MUTHU JI OF SALEM
Bharadwaj, a youth from Kanchipuram, Tamilnadu went to Japan in the 10th century (736 AD). To the Japanese he was ‘Baramon’. He taught them Buddhism, Ramayana, Sanskrit, Dharma, Hindu Philosophy and gave them culture, art and music. Today everything with which the Japanese rightly feel proud of as their ancient heritage and culture was given to them by this monk. The Japanese have three scripts - one of them based on Tamil and Sanskrit. That was given by “Baramon Bharadwaj”.
A Japanese delegate Shri Shuzo Matsunoga participated in the Fifth World Tamil Conference held at Thanjavur in 1981 (30 years ago). He presented a paper on ‘Thirukural & Thiruvalluvar in the eyes of Japan’. Muthu, now 91years young, of Omalur off Salem, Tamilnadu came in contact with Sri Shuzo Matsunoga after the Conference. They discussed at length the Tamil culture and literature. Shuzo translated the English version of G U Pope’s Thirukuraal (aphorisms) as guided by Muthu Ji. Shuzo also translated various books of Subramania Bharathi (Kuil Paatu), Naaladiar, Vallalarr poems, Manimegalai and Silapathigaram into Japanese language. Shuzo not only translated the literature but also the culture/rituals of tamils from birth to death, which was greatly relished by the Japanese. Shuzo also bagged a prize for translation of tamil work in 1985 organized by University of Tanjore who also authors a book “My India as seen through letters”.
Shri Ravikumar and Shri Muthu
Postal Stamp released by the Japanese Government
Now, the Government of Japan has included this Thirukural as a lesson in the text book at college level. To cap it all, when the Japanese Government proposed to release a postal stamp to honour Shuzo Matsunoga for his works, he humbly refused and said, “To translate this tamil literature into Japanese language, Muthu from Salem has helped me. So the credit goes to him”. On his recommendation the Japanese Government released a postal stamp on Muthu (Salem) for 80 Yen (Rs.27/-) in 2007. Muthu, a humble and noble person, did nothing for selfish end. It was all for the tamil literature. He communicated all this over to his friend in Japan only through 200 letters, while, in the Facebook age, individuals transmit info electronically.
Shri Ravikumar of Vishwa Vibhag during his tour of Tamilnadu, met Muthu Ji. He was received well. Muthu ji lauded RSS for its social service and patriotic fervor.
PASUPATHI OF OMALUR
Ravikumar of Vishwa Vibhag met Pasupathi, a wall writer of Salem Tamilnadu who inspires people by writing telling quotes on the walls of Salem City. His father, a freedom fighter inspired him to do something good to the society and to the nation. On his motivation, Pasupathi spends three hours weekly (on Thursday) to write good quotations at 20 places which will be displayed for a week. He has been continuously doing this service silently for about 20 years. His quotations have inspired many people. Recently, when his quotations were uploaded in the Face Book, (www.facebook.in/mmmcorner) Dr. Raghunathan, Brimingham, UK was inspired and compiled the quotations as a book on the occasion of his daughters’ wedding. Thus the good word spreads.
Bharadwaj, a youth from Kanchipuram, Tamilnadu went to Japan in the 10th century (736 AD). To the Japanese he was ‘Baramon’. He taught them Buddhism, Ramayana, Sanskrit, Dharma, Hindu Philosophy and gave them culture, art and music. Today everything with which the Japanese rightly feel proud of as their ancient heritage and culture was given to them by this monk. The Japanese have three scripts - one of them based on Tamil and Sanskrit. That was given by “Baramon Bharadwaj”.
A Japanese delegate Shri Shuzo Matsunoga participated in the Fifth World Tamil Conference held at Thanjavur in 1981 (30 years ago). He presented a paper on ‘Thirukural & Thiruvalluvar in the eyes of Japan’. Muthu, now 91years young, of Omalur off Salem, Tamilnadu came in contact with Sri Shuzo Matsunoga after the Conference. They discussed at length the Tamil culture and literature. Shuzo translated the English version of G U Pope’s Thirukuraal (aphorisms) as guided by Muthu Ji. Shuzo also translated various books of Subramania Bharathi (Kuil Paatu), Naaladiar, Vallalarr poems, Manimegalai and Silapathigaram into Japanese language. Shuzo not only translated the literature but also the culture/rituals of tamils from birth to death, which was greatly relished by the Japanese. Shuzo also bagged a prize for translation of tamil work in 1985 organized by University of Tanjore who also authors a book “My India as seen through letters”.
Shri Ravikumar and Shri Muthu
Postal Stamp released by the Japanese Government
Now, the Government of Japan has included this Thirukural as a lesson in the text book at college level. To cap it all, when the Japanese Government proposed to release a postal stamp to honour Shuzo Matsunoga for his works, he humbly refused and said, “To translate this tamil literature into Japanese language, Muthu from Salem has helped me. So the credit goes to him”. On his recommendation the Japanese Government released a postal stamp on Muthu (Salem) for 80 Yen (Rs.27/-) in 2007. Muthu, a humble and noble person, did nothing for selfish end. It was all for the tamil literature. He communicated all this over to his friend in Japan only through 200 letters, while, in the Facebook age, individuals transmit info electronically.
Shri Ravikumar of Vishwa Vibhag during his tour of Tamilnadu, met Muthu Ji. He was received well. Muthu ji lauded RSS for its social service and patriotic fervor.
PASUPATHI OF OMALUR
Ravikumar of Vishwa Vibhag met Pasupathi, a wall writer of Salem Tamilnadu who inspires people by writing telling quotes on the walls of Salem City. His father, a freedom fighter inspired him to do something good to the society and to the nation. On his motivation, Pasupathi spends three hours weekly (on Thursday) to write good quotations at 20 places which will be displayed for a week. He has been continuously doing this service silently for about 20 years. His quotations have inspired many people. Recently, when his quotations were uploaded in the Face Book, (www.facebook.in/mmmcorner) Dr. Raghunathan, Brimingham, UK was inspired and compiled the quotations as a book on the occasion of his daughters’ wedding. Thus the good word spreads.
v s k odisah news 26 dec 2011
Odia samachar Srilipe Front
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