गो विज्ञान अनुसंधान केंद्र द्वारा गोमूत्र से विकसित कीटनाशक को अमेरिकी पेटेंट
Source: newsbharati Date: 21 Sep 2013 13:50:44 |
अनुसंधान केंद्र के मुख्य समन्वयक सुनील मानसिंगका ने बताया कि इस नवविकसित दवा से फसलों के विकास में चार गुना तक की वृद्धि संभव है। यह विषाणु एवं फंफूद से फसलों की रक्षा करने के अलावा पौधों की प्रतिरोधक क्षमता और मिट्टी की गुणवत्ता को बढ़ाने में सहायक है।
उनके मुताबिक कामधेनु कीटनियंत्रक का निर्माण गोमूत्र, नीम और लहसुन को मिलाकर किया गया है। इसके अलावा तीनों अवयवों को अलग-अलग या एक-दूसरे में मिलाकर भी कीटनाशक दवाओं का विकास किया गया है।
सुनील का दावा है कि इस कीटनाशक के इस्तेमाल से रासायनिक दवाओं पर आने वाले खर्च को 50 हजार करोड़ रुपये मूल्य तक कम किया जा सकेगा।
1996 में स्थापित जीवीएके ने कामधेनु कीट नियंत्रक दवा का विकास राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान और सीएसआइआर [लखनऊ] के साथ मिलकर किया है।
इससे पूर्व जीवीएके द्वारा विकसित कामधेनु अर्क को एंटीबायोटिक्स और कैंसर प्रतिरोधी दवा के रूप में अमेरिकी पेटेंट हासिल हो चुका है।
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