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लावा पांडे, बालेश्वर :
भारतीय सेना ने गुरुवार को परमाणु हमला करने में सक्षम अग्नि-2 बैलेस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। ओडिशा के व्हीलर द्वीप स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आइटीआर) से इसका प्रक्षेपण किया गया।
अग्नि श्रंखला की यह मिसाइल 2000 किमी. तक मार कर सकती है। सतह से सतह पर मार करने वाली मध्यम दूरी की इस मिसाइल का प्रक्षेपण, आइटीआर के लांचिंग काम्प्लेक्स-4 में रेल मोबाइल प्रणाली से गुरुवार को सुबह 8:48 किया गया। स्वदेशी ज्ञान-कौशल से निर्मित यह मिसाइल 21 मीटर लम्बी तथा 1 मीटर चौड़ी है। इसका वजन 17 टन है। यह अपने साथ 1000 किग्रा. वजन तक के विस्फोटक ढोने की क्षमता रखती है। यह दो स्तर के ठोस ईधन द्वारा संचालित होती है। डीआरडीओ की मदद से सेना के सामरिक बल कमाड ने इसका परीक्षण किया। अग्नि- 2 का पहला परीक्षण 11 अप्रैल 1999 को किया गया था। अग्नि- 2 का विकास, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रयोगशालाओं और भारत डायनमिक्स हैदराबाद के साथ एडवांस सिस्टम प्रयोगशाला में किया गया है।
अग्नि- 2 के प्रक्षेपण के मौके पर रक्षा विभाग के प्रमुख सलाहकार वीके सारस्वत, डीआरडीओ के मुख्य महानिदेशक अविनाश चंदर समेत आइटीआर व डीआरडीओ के कई वरिष्ठ अधिकारी व वैज्ञानिक मौजूद थे।
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क्या होती है बैलेस्टिक मिसाइल
तकनीकी दृष्टि से बैलेस्टिक प्रक्षेपास्त्र या मिसाइल, उसको कहते हैं, जिसका प्रक्षेपण पथ सब अर्बिटल (बैलेस्टिक पथ) होता है। इसका उपयोग नाभकीय अस्त्र को पूर्व निर्धारित लक्ष्य पर दागने के लिए किया जाता है। यह मिसाइल प्रक्षेपण के प्रारंभिक चरण में ही केवल निर्देशित की जाती है। इसके बाद पथ अर्बिटल मैकेनिज्म के सिंद्धांतों से इसका निर्धारण होता है। अभी तक इन्हें रासायनिक राकेट इंजनों द्वारा प्राणोदित किया जाता है।
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