Friday, March 11, 2011

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा २०११

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा २०११
सरकार्यवाह श्री. भैय्याजी जोशी द्वारा प्रस्तुत वार्षिक प्रतिवेदन

दिनांक ११ मार्च २०११, पुत्तूर

पू. सरसंघचालक जी, आदरणीय अ.भा.पदाधिकारी गण, अ. भा. कार्यकारी मंडल के सन्माननीय सदस्यगण, क्षेत्र एवम् प्रांत के मा. संघचालक, कार्यवाह, अ.भा. प्रतिनिधि सभा के सदस्यगण, सामाजिक जीवन में विविध क्षेत्रों में कार्यरत समस्त निमंत्रित बन्धु तथा बहनों, युगाब्द ५११२,मार्च २०११ की अ. भा. प्रतिनिधि सभा में आप सभी का स्वागत है।

इस समय स्वाभाविक रूप से ही उन सभी महानुभावों का स्मरण हो आता है, जिनके सान्निध्य में हमने स्नेह, कर्तव्यभाव एवम् ध्येय के प्रति समर्पण भाव का अनुभव किया है और आज वे हमारे मध्य नहीं रहे । प्रसिद्ध न्यायविद्, बंगाल के संघ कार्य के आधार स्तंभ रहे, गहन चिंतन से हमें लाभान्वित करते रहे, कई प्रकार की प्रतिकूलता में अपने कार्य को बल प्रदान करते हुये कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया ऐसे मा. कालीदासजी बसु कालप्रवाह में हमसे बिछुड़ गये। मध्यभारत में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्य का जिन्होंने सिंचन किया, ऐसे अपने श्री शालीग्राम जी तोमर गत कुछ वर्षों से शारीरिक व्याधियों से जुझते हुए, पंचतत्व में विलीन हो गये। नागपुर महानगर के प्रचार प्रमुख विजयजी पत्की, जिनके पिताजी श्री विठ्ठलराव पत्की प. पू. डा. जी के निकटतम सहकारियों में से रहे, एक दुर्घटना में गंभीर रूपसे घायल हुये, उन्हें बचाने के सारे प्रयास असफल रहे और वे हमें छोड़कर विदा हो गये। प्रसन्न व्यक्तित्व के धनी आंध्र में विभाग प्रचारक, प्रांत बौध्दिक प्रमुख तथा वर्तमान में संस्कृत भारती के कार्य में कार्यरत ऐसे श्री सोमसुंदरम्जी, जो कुछ दिनों से कर्क रोग से ग्रस्त थे, अब नहीं रहे। ब्रज प्रांत के पूर्व प्रांत संघचालक मा. कृष्ण सहाय जी का वृद्धावस्था में निधन हो गया है । दिल्ली के कई सामाजिक कार्यों में जिनकी प्रभावी भूमिका रही, पूर्व प्रांत संघचालक मा. सत्यनारायणजी बंसल का वृध्दावस्था तथा लंबी बीमारी के पश्चात देहांत हो गया। विश्व हिन्दु परिषद के सेवा प्रमुख, ज्येष्ठ प्रचारक श्री. अरविंदराव चौथाईवाले का अचानक हृदयाघात के कारण हाल ही में निधन हो गया। राष्ट्र सेविका समिति की राजस्थान क्षेत्र कार्यवाहिका श्रीमती सुदेश मलिकजी तथा आगरा से वि.हि.प. के तत्वावधान में प्रारंभ मातृशक्ति सेवा न्यास की संस्थापक सदस्या श्रीमती उषा जैन जी का भी निधन हुआ है। वर्धा (विदर्भ) के निवासी अ. भा. किसान संघ के महामंत्री रहे श्री बाबासाहेब तकवाले स्वयं के कृषि के गहन अध्ययन से किसानों को मार्गदर्शन करते रहे व किसान संघ का काम बढ़ाने में बहुत बड़ा योगदान रहा, वैसे ही जालंधर के ज्येष्ठ स्वयंसेवक पंजाब प्रांत के बौध्दिक प्रमुख रहे श्री बालकिशन जी वैद तथा पूर्व आंध्र के सेवा प्रमुख रहे श्री सत्यराजू यह तीनों कार्यकर्ता अब हमारे बीच नही रहे। करवीर (कोल्हापुर) पीठ के प.पू. शंकराचार्य विद्याशंकर भारती, अपने कार्य में सदा ही जिनका आशीर्वाद प्राप्त होता था अपने नश्वर शरीर को त्यागकर स्वर्गस्थ हो गये। महाराष्ट्र में अपनी वाणी व्यवहार से जिन्हें राजनीतिक जीवन में विशेष स्थान प्राप्त था, ऐसी श्रीमती सुमतीताई सुकलीकर अनेक स्मृतियां छोड़कर काल के प्रवाह में समा गयीं।

दलित साहित्य में जिन्होंने अपनी प्रतिभाशाली लेखनी से समरसता एवम् सामंजस्य बनाए रखने का मौलिक कार्य किया, ऐसे कवि श्री उत्तम मुळे जी व सृजनशील लेखक के रूप में परिचित, नागपुर के ही श्री वामनराव निम्बालकर का शरीर शांत हो गया। मुम्बई के श्रेष्ठ शाहीर विट्ठल उमप जी, अपनी सेवा दीक्षाभूमि नागपुर में प्रस्तुत करते समय मंच पर ही उनका निधन हुआ। मराठी नाट्य जगत में जिन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई थी और 30-40 वर्षों तक मराठी नाट्य जगत के हजारों दर्शकों को अभिभूत किया, ऐसे श्री प्रभाकर पणशीकर पंचतत्व में समा गए। कर्ण मधुर, भावपूर्ण एवम् धीर गंभीर स्वरों के धनी,भक्ति संगीत,शास्त्रीय संगीत के द्वारा प्रदीर्घ समय तक करोड़ों अंतकरणों को आल्हादित करने वाले ऐसे श्रेष्ठ गायक, संगीत भास्कर, भारत रत्न पं. भीमसेन जोशी अपने सुरों को हमारे हृदयों में छोड़कर अस्तंगत हो गए। गुजरात के कला संगीत क्षेत्र के जानेमाने श्री दिलीपभाई धोलकिया जी भी हम से बिछुड गये। स्वदेशी विचार एवम् जीवन शैली के प्रखर प्रवक्ता देश बचाओ आंदोलन के कर्णधार, जिन्होनें अपने विचार एवं वाणी से स्वदेशी अभियान के लिए अद्भुत समर्थन जुटाया ऐसे राजीव दीक्षित को काल ने समय से पूर्व ही हमसे छीन लिया।

गोरखपुर के निवासी पूर्व राज्यपाल श्री महावीरप्रसाद जी, केरल में कांग्रेस के शीर्षस्थ नेता श्री करूणाकरन, महाराष्ट्र के ज्येष्ठ साहित्यिक अ. भा. मराठी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष रहे श्री सुभाष भेंडे, गुजरात के सद्विचार परिवार संस्था के संस्थापक एवम् मानवता हेतु कर्मशील रहे श्री हरिभाई पांचाल पंचतत्व में समा गये। गुजरात के उद्योगपति श्री प्राणलाल भोगीलाल जिनका अपने विविध कार्यो में सदा ही सहयोग प्राप्त होता रहा है, जिन्होंनें सामाजिक जीवन में विशेष प्रतिष्ठा अर्जित की थी, वैसे ही म. गांधीजी के विचारों से प्रेरणा लेकर सेवा समरसता क्षेत्र में कार्य करते हुये अपना जीवन समाज हेतु समर्पित करनेवाले श्री ईश्वरभाई पटेल अपनी इहलोक की यात्रा समाप्त कर गए।

स्वयंस्वीकृत कार्यपथ पर चलते चलते ध्येय के प्रति अडिग निष्ठा अतःकरण में धारण करते हुये व्यक्तिगत जीवन में शुध्दता एवम् पारदर्शिता रखकर अपना आदर्श जीवन सबके सम्मुख प्रस्तुत कर दिया ऐसे ही यह सभी महानुभाव थे।

भविष्य में जिनकी स्मृति मात्र से उर्जा प्राप्त होनी है ऐसे उन सब महानुभावों का हम अपने चर्मचक्षुओ से दर्शन तो नही कर पाएंगे, पर उन्हें सदा ही स्मरण किया जाएगा।

शबरीमलै यात्रा के समय पर घटित दुर्घटनाओं में मृत्यु को प्राप्त हुये एवम् प्राकृतिक आपदाओं, आतंकवाद, नक्सलवाद आदि में हिसांत्मक कार्यवाही के चलते परलोक गमन कर गए ऐसे सभी बंन्धुओं के परिवार जनों के प्रति हम संवेदना व्यक्त करते हैं और दिवंगत महानुभावों को हम श्रध्दांजलि अर्पण करते हैं ।

कार्यस्थिति
प्रतिवर्षानुसार मई जून 2010 में सारे देशभर में 70 स्थानों पर संघ शिक्षा वर्ग संपन्न हुये। प्रथम वर्ष के वर्ग प्रांतो की योजनानुसार एवम् द्वितीय वर्ष के वर्ग क्षेत्रानुसार संपन्न हुये, दक्षिण के प्रांतो में भाषानुसार वर्गो की योजना हुयी थी। गत वर्ष प्रौढ़ स्वयंसेवको के द्वितीय वर्ष के वर्ग देशभर में 4 स्थानों कन्याकुमारी, दिल्ली, रांची, तथा बडोंदरा में आयोजित किए गये थे। तृतीय वर्ष का सामान्य वर्ग यथावत् नागपुर मे संपन्न हुआ। गत वर्ष तृतीय वर्ष - विशेष की योजना नहीं थी। वह वर्ग इस वर्ष शीतकाल में संपन्न होगा।

प्रथम वर्ष में 7230 स्थानों से 11556, द्वितीय वर्ष (सामान्य) में 2087 स्थानों से 2678, द्वितीय वर्ष (विशेष) में 370 स्थानों से 497 शिक्षार्थी सम्मिलित हुये। तृतीय वर्ष के वर्ग में 788 स्थानों से 877 स्वयंसेवक आए थे। गत वर्ष देश भर में संपन्न प्राथमिक शिक्षा वर्गो में 24530 स्थानों से 63741 स्वयंसेवकों ने भाग लिया है।

तृतीय वर्ष के समापन अवसर पर असम राज्य के अवकाश प्राप्त मुख्य सचिव श्री जे. एस. राजखोवा प्रमुख अतिथि के नाते उपस्थित रहे।

वर्तमान में उपलब्ध जानकारी के अनुसार देशभर में 27078 स्थानों पर 39908 शाखाए चल रही हैं और 7990 स्थानों पर साप्ताहिक मिलन एवम् 6431 स्थानों पर संघ मंडली के स्वरूप में कार्य चल रहा है।

अक्टूबर 2010 जलगांव में अ. भा. कार्यकारी मंडल की बैठक में संख्यात्मक वृत्त की समीक्षा की गयी। जहाँ कार्य में लक्षणीय वृध्दि अथवा कमी आयी है उसके कारणों पर सार्थक चर्चा हुयी। अच्छे प्रयोग सामने आए हैं। संख्यात्मक वृत्त की समीक्षा के साथ ही गुणात्मकता पर भी समीक्षा होनी चाहिये।

प. पू. सरसंघचालक जी का प्रवास
पू. सरसंघचालक जी के इस वर्ष के क्षेत्रश: हुए प्रवास का केंद्रबिंदु मुख्यतः ‘कार्यकर्ता’ रहा। समाज के प्रभावी तथा नामवंत व्यक्तियों के छोटे छोटे गटो में संपर्क विभाग द्वारा मुंबई, सूरत, संभाजीनगर, भुवनेश्व र, संबलपुर इत्यादि स्थानों में जिज्ञासा पूर्ति एवं वार्तालाप के कार्यक्रम यशस्वी रहे। पुणे महानगर के संपर्क विभाग द्वारा आयोजित ‘संवाद’ कार्यक्रम में समाज के सभी वर्गो से ऐसे 165 प्रभावी व्यक्तियों की उपस्थिति रही।

अखिल भारतीय योजना से विभिन्न अधिकारियों के प्रवास में महाविद्यालयीन विद्यार्थी कार्य, नगरीय कार्य में वृध्दि तथा गुणात्मकता इन विषयों पर सार्थक चर्चा हुई है।

विशेष वृत्त
घोष वर्गः
इस वर्ष घोष विभाग द्वारा विभिन्न प्रांतो में घोष प्रशिक्षण वर्ग अथवा शिबिरों का आयोजन किया गया । 13 स्थानों पर संपन्न वर्गो में 2363 स्वयंसेवको ने भाग लिया है । अ.भा. घोष वर्ग लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें सभी प्रांतो से 298 स्वंयसेवक उपस्थित रहे।

‘नव चैतन्य शिबिर’ मेरठः
मेरठ में महाविद्यालयीन विद्यार्थी एवम् तरूण स्वयंसेवकों का शिबिर संपन्न हुआ। पूरे प्रांत से 2247 स्वयंसेवक सहभागी हुए । 644 स्थानों से 416 महाविद्यालयो सें और 89 छात्रावासों से स्वयंसेवक आए थे। विशेषता यह रही कि 1061 नए स्वयंसेवक बने। युवाओं में सामाजिक दायित्व का बोध एवम् राष्ट्र भाव विकसित हो, इसी दृष्टी से कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विविध विषयों पर जैसे जलसंधारण, पर्यावरण, रक्तदान, नेत्रदान करने का संकल्प लिया गया, यह इस शिबिर की विशेषता रही। मेरठ प्रांत के कार्यकर्ताओं ने जुलाई 2010 से ही विविध कार्यक्रमों का आयोजन करते हुये शिबिर को सफल बनाया है।

पंजाब में संपन्न प्राध्यापक कार्यशालाः
महाविद्यालय तथा विश्वविद्यालयीन कार्यरत प्राध्यापक वर्ग तथा महाविद्यालयीन छात्रों की संघ कार्य में सहभागिता बढ़े, इस दृष्टी से पंजाब प्रांत में विशेष प्रयास किया गया। जिलावार छोटी छोटी बैठकों का आयोजन करते हुये कुछ साहित्य का अध्ययन हो और साथ ही स्थानीय शाखा में आना प्रारंभ हो ऐसा प्रयास किया गया। इसी श्रृंखला में अक्टुबर 2010 को पू. सरसंघचालकजी की उपस्थिति में अमृतसर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में उपकुलपति, डीन एवम् विभागाध्यक्ष, प्रधानाचार्यों सहित कई निदेशकों ने उपस्थित रहकर कार्यशाला को सफल बनाया। कुल 248 संख्या रहीं तथा अनुवर्तन की योजना भी बनी है । पाक्षिक ई-बुलेटिन भेजना प्रारंभ किया गया है ।

मालवा प्रांत में संपन्न विशाल संचलन, एवम् अन्य कार्यक्रमः

व्यापक संपर्क एवम् कार्यवृध्दि का लक्ष्य रखकर मालवा प्रांत ने जिला/विभागश: विशाल संचलनों का आयोजन किया था। प्रांत में 5 स्थानों पर संचलन हुये जिसमें कुल 43600 स्वयंसेवक सम्मिलित हुये। 3 स्थानों पर शारीरिक प्रदर्शन के बड़े कार्यक्रम हुये जिसमें 2077 स्वयंसेवको ने प्रदर्शन किया। कुल 20 जिलों के शीत शिबिरों में 10387 तरूण स्वयंसेवक सम्मिलित हुये।

नर्मदा सामाजिक कुंभ में सहयोग, महाकौशल प्रांत:
सहयोग के दृष्टी से पूरे प्रांत में व्यापक संपर्क की योजना बनाई गयी। जिला प्रमुख, गटनायक प्रमुख एवम् गटनायक निश्चित किये गये। प्रत्येक गटनायक न्यूनतम 20 घरों से संपर्क करे और प्रत्येक घर से कुंभ हेतु एक किलो चावल और आधा किलो दाल तथा एक रूपये का सहयोग प्राप्त करे, इस प्रकार योजना बनी। यह संपर्क अभियान महाकौशल प्रांत के 27 जिलों में 214 स्थानों पर 641 शाखाओं द्वारा संपन्न हुआ। कुल 21593 स्वयंसेवको ने 502674 परिवारों से संपर्क किया और 386 टन अनाज संग्रहित किया गया।

समाज के सभी प्रकार के परिवारों से सहयोग यह विशेष उपलब्धि रही। अनुवर्तन के दृष्टी से छोटे छोटे गाँवों में संघ परिचय वर्ग, कुटुम्ब प्रबोधन तथा भारतमाता पूजन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाऐंगे। वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर सभी परिवारों तक ‘नववर्ष शुभकामना संदेश’ भेजने की भी योजना बन रही है।

बाढ़ ग्रस्त परिवारों हेतु राहत कार्य, उत्तर कर्नाटक
गत वर्ष उत्तर कर्नाटक में बाढ़ के कारण बड़ी मात्रा में गाँव ध्वस्त हुये और हजारों परिवार बेघर हो गए। 2400 स्वयंसेवकों की सहायता से तत्काल 180 गाँवों तक राहत सामग्री पहुचाने का कार्य किया गया।

स्थायी पुनर्वास के दृष्टी से ‘सेवाभारती’ के तत्वावधान में 9 ग्रामों में 1680 निवास बनाने का निर्णय किया गया। अब तक 2 गावों में 130 घरों का निर्माण पूरा होकर लोकार्पण भी संपन्न हुआ है। बागलकोट जिले के ‘सब्बलहुणासि’ ग्राम के लोकार्पण का कार्यक्रम पूजनीय सुदर्शन जी व कर्नाटक शासन के मंत्री श्री गोविंद करनोल की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

प. महाराष्ट्र में सामाजिक सद्भाव बैठकः
प. महाराष्ट्र में 11 स्थानोपर सामाजिक सद्भाव बैठकों में 66 समुदायों से 644 बंधु उपस्थित रहे । अ.भा. सेवा प्रमुख सीतारामजी की उपस्थिति में यह बैठकें संपन्न हुई । पुणे जिले में तलेगांव में विशेष रूपसे 26 जनवरी को ‘भारतमाता पूजन’ का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न जाति संस्था, भाषा भाषी एवम् शैक्षिक संस्थाओं की सहभागिता रही। इसमें 1498 नागरिक उपस्थित हुए।

प. पू. शंकराचार्य जी का कार्यक्रम, देवगिरी प्रांत
नंदुरबार जिले की गुजरात से लगी हुयी नवापूर तहसील में ईसाई मिशन की गतिविधियाँ कई वर्षों से चल रही है। यहाँ हिन्दू धार्मिक आयोजनों का विरोध भी होता रहता है। ऐसे क्षेत्र में करवीर पीठ के पू. शंकराचार्य जी की पदयात्रा 5 दिन आयोजित की गयी। जिसमें 20 गावों में 4000 जनजाती परिवारों से संपर्क किया गया । 3 स्थानों पर छोटे वनवासी संम्मेलन भी हुये। माताओं की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही।

कश्मीर विलय दिवसः
दि. 26 अक्टुबर को ‘कश्मीर विलय दिवस’ के उपलक्ष्य में प्रकट कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। देश भर में 2018 स्थानोंपर 2491 कार्यक्रम हुये, जिसमें 99380 महिलाएँ एवम् 308708 पुरूष वर्ग उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त 7603 स्थानों की 8917 शाखाओं पर भी कार्यक्रम हुये, जिसमें 179809 तरूण व 72466 बाल स्वयंसेवकों की उपस्थिति रही।

विश्व मंगल गौ ग्राम यात्रा अनुवर्तन के दृष्टी से एक और चरण:

ग्राम विकास में कार्यरत देश भर की विविध संस्थाओं का त्रिदिवसीय सम्मेलन कन्याकुमारी में आयोजित हुआ। इस सम्मेलन में 65 संस्थाओं से 154 कार्यकर्ता आये, जिसमें 27 बहनें भी थी।

उसी प्रकार अ. भा. ग्राम विकास वर्ग का आयोजन दीनदयाल धाम, फरह जिला मथुरा में संपन्न हुआ। सभी प्रांतो से ‘ग्राम विकास’ के कार्य में सक्रिय ऐसे 188 कार्यकर्ता उपस्थित रहे। जिसमें निवर्तमान पू. सरसंघचालक मा. सुदर्शन जी भी उपस्थित रहे। दोनों कार्यशालाओं में जल, भू एवम् वन संरक्षण, पर्यावरण,जैवविविधता,कुटीर उद्योग तथा ग्राम आरोग्य आदि विषयों पर इस क्षेत्र में कार्यरत अनुभवी व्यक्तियों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। प्रख्यात गांधीवादी पद्मश्री श्री कुट्टी मेनन जी विशेष रूप से उपस्थित रहे।



सेवा विभाग महिला कार्यकर्ता बैठक
सेवाविभाग के द्वारा देशभर में महिलाओं के द्वारा एवम् महिलाओं के लिये चलाये जा रहे प्रकल्पों के संदर्भ में चर्चा हेतु बैठक का आयोजन नागपुर में किया गया। जिसमें 15 प्रान्तों से 127 कार्यकर्ता उपस्थिति रहें। देशभर में चलनेवाले इस प्रकार के प्रकल्पों का अलग से संकलन तथा समन्वय का प्रयास हो, इस पर विचार किया गया। प्रकल्प के माध्यम से महिला विषयक विभिन्न समस्याओं को लेकर भी कुछ गतिविधियाँ प्रारंभ हों इसकी आवश्यकता अनुभव की गई।

धरना कार्यक्रम
गत कुछ दिनों से हिन्दू आतंकवाद, भगवा आतंकवाद शब्दों का प्रयोग करते हुये हिन्दुत्व को बदनाम किया जा रहा है । उसी प्रक्रिया में संघ को भी विवाद के घेरे में लाने का प्रयास होता आया है । ‘इसी प्रकारकी राजनीति’ के संदर्भ में जनमत आक्रोश प्रकट हो इसी दृष्टी से देशभर के समस्त जिला केंन्द्रो में 10 नवम्बर को धरना कार्यक्रम हो ऐसी योजना बनी । अल्पकालीन सूचना क बाद भी यह कार्यक्रम व्यापक मात्रामें सफल हुआ । देश में 750 स्थानों पर लगभग 10 लाख 58 हजार नागरिक धरने में सम्मिलित हुए। बड़ी संख्या में माता-बहनों की उपस्थिति तथा कार्यक्रम की व्यवस्थितता और अनुशासन यह विशेषता रही। एक स्थान पर अधिकतम संख्या (25000) जबलपुर मे रही। अल्पकालीन सूचना के बाद भी धरने की सफलता जनभावनाओं को दर्शाती है। कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास भी इससे बढ़ा है।

पत्रकार वार्ता
जलगांव में संपन्न अ. भा. कार्यकरी मंडल की बैठक में ही प्रांत केंद्रों में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया जाए ऐसी योजना बनी थी । 224 स्थानोंपर 3492 पत्रकार उपस्थित थे। प्रसार माध्यमों का सकारात्मक सहयोग रहा। तत्पश्चात प्रसार माध्यमों ने पर्याप्त प्रसिद्धि देकर जनभावना का सम्मान ही किया है।

राष्ट्रीय परिदृश्य
राम जन्म भूमि के न्यायालय निर्णय:
30 सितंबर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के द्वारा घोषित निर्णय करोड़ों हिन्दुओं के आस्था एवम् विश्वास पर अपनी स्वीकृति प्रदान करनेवाला रहा है। इस देश की न्याय व्यवस्था ने न केवल भावनाओं का ध्यान रखा, अपितु समग्र उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अपना फैसला सुनाया है । जिससे जन भावना का सम्मान ही हुआ है ।

निर्णय के पूर्व कुछ तत्वों द्वारा अनावश्यक रूप से एक तनावपूर्ण वातावरण निर्माण किया गया था परंतु निर्णय के पश्चात सारे देश के विभिन्न समूहों ने जो शांति एवम् संयम का परिचय दिया है, वह इस देश की गरिमामयी संस्कृति, परंपरा के अनुरूप ही है । परंतु हिन्दू समाज चाहता हैं कि अब इस फैसले के बाद सभी मिलकर ‘‘भव्य राममंदिर’’ के निर्माण कार्य में सहयोग देकर विश्व के सामने एक सौहार्द का आदर्श उदाहरण भी प्रस्तुत करे । देश भर में संपन्न हनुमत शक्ति जागरण में जनता का उत्साहपूर्ण व विशाल संख्या में सहभागिता ने यही संकेत दिया है । 11467 स्थानों पर संपन्न हुये इन कार्यक्रमों में कुल 6378680 नागरिक उपस्थित रहे, जिसमें 2122669 महिलायें भी उपस्थित रही ।

आवश्यकता है कि संसद सर्वसम्मति से कानून बनाकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे।

आतंकवाद
गत दो दशकों से जिहादी आंतक के चलते हजारों निर्दोष सामान्यजन, पुलिस तथा सेना के अधिकारियों की नृशंस हत्याएं हुई हैं । राष्ट्र की सुरक्षा व्यवस्था को तहस-नहस किया जाता रहा है । केवल भारत ही नहीं सारा विश्व समुदाय आतंकवादी तत्वों से ग्रस्त है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि यहाँ की हिन्दू विरोधी शक्तियाँ कुछ घटनाओं को लेकर हिन्दूसमाज को आतंकवादी ठहराते हुये जेहादी आतंकवाद के विरूध्द चलनेवाले प्रयासों को कमजोर करने मे लगे हैं।

देशभक्त हिन्दू संगठन, साधुसंत एवम् हिन्दू समाज के श्रध्दास्थानों की सुरक्षा के प्रति आश्वस्त करने के बजाय ऐसी शक्तियों के बारे में जनसामान्य में भ्रम निर्माण किया जा रहा है । सत्ता प्राप्त करने के अथवा बनाए रखने के स्वार्थपूर्ण उद्देष्यों के चलते तुष्टिकरण की नीति अपनाकर राष्ट्र विरोधी एवम् आतंकवादी शक्तियों की अनदेखी की जा रही है। तथाकथित शीर्षस्थ नेता हिन्दू संगठनों को इस्लामिक आतंकवादी तत्वों से भी अधिक खतरनाक मानते हैं और विदेशी व्यवस्थाओं से वार्ता करने में संकोच भी अनुभव नहीं करते।

लेकिन हमें विश्वास है कि हिन्दू समाज इस षडयंत्र को समझकर इस प्रकार के असत्य तथा भ्रम निर्माण करने वाले प्रयत्नों को विफल करेगा एवम् भविष्य में भी राष्ट्र निर्माण के चल रहे प्रयासों में पूर्ण सहयोग प्रदान करता रहेगा।

जम्मू-कश्मीर की वर्तमान परिस्थितियाँ चिंताजनक
1947 से लेकर आज तक कई बार कश्मीर राज्य के पूर्ण एवं अंतिम विलय पर सहमति बनी, लेकिन आज भी जम्मू-कश्मीर को लेकर चिंता का वातावरण बना हुआ है । वास्तव में जम्मू-कश्मीर समस्या का मूल केंद्र सरकार की ढुलमुल नीतियों में है। गत 63 वर्षों में लाखों करोड़ रू. की राशी विभिन्न योजनाओं पर अनुदान देने एवं एक लाख से अधिक निरपराध जनसामान्य, पुलिस व सेना के हजारों जवानों के बलिदान के पश्चात् भी जम्मू-कश्मीर में देश के अन्य राज्यों के समान मानसिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक एकात्मता स्थापित करने में हम सफल नहीं हो सके हैं । विभिन्न राजनैतिक दल अपने निहित राजनैतिक उद्देष्यों की पूर्ति हेतु अलगाववादी शक्तियों को प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से बल ही प्रदान करते रहे हैं, ऐसा दिखाई देता है । कश्मीर घाटी के 4 लाख से अधिक मूल हिन्दू निवासियों का जबरदस्ती पलायन करवाकर घाटी को हिन्दू विहीन करने का प्रयास, सीमा पार से सशस्त्र घुसपैठ, आई.एस.आई. एवं पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी कमांडरों द्वारा कश्मीर घाटी में सक्रिय अलगाववादी संगठनों के नेताओं को खुला समर्थन एवं युवकों को प्रशिक्षण, शस्त्रादि उपलब्ध कराना आदि भारत विरोधी अघोषित युध्द का ही स्वरूप है। आतंकवाद के माध्यम से अपने उद्देश्यपूर्ति में सफल न हो पाने के कारण उन्होंने अपनी रणनीति में बदल किया है, आन्दोलनात्मक आतंकवाद (Agitational Terrorism) यह आतंकवाद का ही नया रूप है।

समय बीतने के साथ अराष्ट्रीय शक्तियाँ वहाँ अपनी जडें मजबूत करती जा रही हैं । कश्मीर घाटी में सक्रिय अलगाववादी शक्तियाँ देश की राजधानी दिल्ली तथा अन्य शहरों में गोष्ठियाँ आयोजित कर, भारत विरोधी खुला प्रचार करने में जुटी हुई हैं ।

वास्तविकता तो यह है कि वर्तमान में चल रहा यह भारत विरोधी आंदोलन जम्मू-कश्मीर के 22 में से केवल 5 जिलों तक सीमित है। गुज्जर, बकरवाल, शिया, कश्मीरी सिख व पंडित, जम्मू के विभिन्न शरणार्थी समूह, डोगरा, बौद्ध तथा राष्ट्रवादी मुस्लिम समूह इस आंदोलन में सहभागी नहीं हैं । परंतु वातावरण ऐसा बनाया जा रहा है कि जैसे सारा जम्मू- कश्मीर भारत से अलग होना चाहता है। वास्तव में केवल 14 प्रतिशत क्षेत्र की भी आधी से कम जनसंख्या इस आन्दोलन में भागीदार है। महिलाओं एवम् बच्चों द्वारा भारतीय सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी करवाकर एवं मीडिया व देशभर में फैले राष्ट्रविरोधी समर्थकों द्वारा ऐसा वातावरण निर्माण करने का प्रयास किया गया है कि सारे घाटी के निवासी आजादी चाहते हैं ।

मुख्यमंत्री श्री उमर अब्दुल्ला द्वारा जम्मू-कश्मीर के पूर्ण विलय को नकारना, जम्मू-कश्मीर को विवादित मानना, केंद्र के वार्ताकारों (Interlocuter)के समूह द्वारा भी ऐसा वातावरण बनाना और केंद्र सरकार एवम् कांग्रेस नेताओं द्वारा उन्हें खुला समर्थन इस बात का संकेत है कि अलगाववादी और राज्य एवम् केंद्र सरकार किसी समझौते पर पहुँचने की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं । पिछले दिनो यदि राष्ट्र वादी शक्तियां, भारतीय सेना आदि का दबाव नही होता तो किस प्रकार की घोषणायें हो जाती कहना कठिन है । जम्मू-कश्मीर एक राजनैतिक समस्या और इसके राजनीतिक समाधान के नाम पर डा. मुखर्जी के बलिदान एवं प्रजा परिषद के ऐतिहासिक आन्दोलन के बाद 1953 से जारी एकीकरण की प्रक्रिया को उलट कर 1953 के पूर्व की स्थिति, स्वायत्तता, स्वशासन, आदि फार्मूलों की बातें चल रही हैं ।

कुछ घटनाओं को लेकर ‘‘मानवाधिकार के हनन’’ का अनावश्यक हौवा खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है। सुरक्षा बलों के विषेशाधिकारों को बनाए रखते हुये उनका मनोबल बना रहे, यह आवश्यक है। इसी में सामान्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होने वाली है।

समय की मांग है कि अलगाववादी तत्वों पर कठोर कार्यवाही हो और राष्ट्रवादी शक्तियों को बल प्रदान किया जाए । देश के अन्यान्य राज्यों में रहने वाले समाज संगठित शक्ति के साथ राज्य एवम् केंद्र सरकार पर दबाव बनाएँ, इसी से देश की ‘अखंडता’ सुरक्षित रह सकेगी। अन्य प्रांतों के समान ही जम्मू-कश्मीर की भी भारत के साथ एकात्मता पूर्णरूपेण हो। इसका समाधान संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने, जम्मू-कश्मीर के अलग संविधान एवं अलग झंडे की व्यवस्था को समाप्त कर सीमा पार की गतिविधियों को देखते हुये, उसे शेष राज्यों के समान बनाने में ही है । एक देश-एकजन-एक राष्ट्र का भाव स्थापित करना ही समस्या का हल है।

राभा हिन्दुओं पर अत्याचार
ईसाई नववर्ष के प्रथम दिन असम और मेघालय के सीमावर्ती क्षेत्र में घटित घटना भविष्य के संकटों का संकेत देती है। गारो और राभा समुदाय कई पीढ़ियों से सौहार्दपूर्ण वातावरण में रहते आये हैं । वे अपनी परंपराए और पर्व घुल-मिल कर मनाते हैं । दोनों समूह अपनी अपनी आस्था मान्यताओं के साथ विनम्र रहकर एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते आए हैं । इस क्षेत्र में जब ईसाई मतांतरण बढा़ और गारो समाज का बड़ा तबका ईसाई बनने के साथ ही गारो -राभा के मध्य दूरियाँ बढ़ने लगी । राभा समाज के लोगों के मतांतरण करने में असफलता के चलते यह दूरी बढ़ती गयी, परिणामतः असहिष्णुता का वातावरण बनता गया। इसके बावजूद राभा समाज ईसाई् मिशन के कार्यक्रमो के आयोजनों मे सहयोग करता रहा । मेघालय राज्य बनने के बाद गारो समाज का राजनीति में प्रभाव बढ़ता गया, परिणामतः मिशन की गतिविधियों में वृद्धि हुई। सैकडों मिशनरियों की शक्ति तथा प्रचुर साधनों के बावजूद भी उन्हें अपेक्षित सफलता नही मिल पाई । यही कारण है कि आज गारो व राभा के मध्य संघर्ष, हिंसा व आतंक का वातावरण बन गया है । अलगाववादी तत्वों, बंगलादेशी घुसपैठियों, मुसलमान तथा कुछ राजनेताओं के संयुक्त प्रयासों से राभा-गारो के मध्य संघर्ष की स्थिति बनती गई। यही संघर्ष जनवरी के प्रारंभ में भीषण रूप से प्रकट हुआ है।

विगत वर्षों में दिमासा व कार्बी के मध्य तथा दिमासा व जेमी के मध्य का संघर्ष अराष्ट्रीय शक्तियों के इसी रूप का प्रकटीकरण रहा है। जनवरी 2011 का संघर्ष भी उन पुरानी घटनाओं का ही स्मरण कराता है। तथाकथित धर्मनिरपेक्षवादी लोग इस तथ्य की अनदेखी कर अपनी छद्म धर्मनिरपेक्षता को ही प्रकट करते हैं ।

मेघालय सरकार इसे आपसी गलतफहमी बताकर कारणों के मूल में जाने का साहस नहीं कर पा रही हैं । 31 गावों से लगभग 30000 राभा बन्धु निर्वासित हो गये हैं । उनकी सुरक्षा के स्थायी प्रबन्ध एवम् पुनर्वास की व्यवस्था होने की आवश्यकता है।

उत्तर-पूर्व क्षेत्र में जहाँ-जहाँ हिन्दू अल्पसंख्यक होते गये, उनकी सुरक्षा को लेकर प्रश्न निर्माण होते रहें हैं । इसके पूर्व भी मेघालय के शिलांग क्षेत्र से असमीया, बंगलाभाषी तथा हिन्दीभाषीक समूहों के हजारों लोगो को समय समय पर भगाया गया है । वे विगत 13 वशों से अन्य प्रान्तों में विस्थापित जीवन जीने को मजबूर हैं । मिजोरम से स्वधर्म में आस्था रखने वाले रियांग जनजाति के 40000 लोगों को भी विस्थापित होना पड़ा है । इन क्षेत्रो में रहने वाली विभिन्न जनजातियों की मान्यताओं एवम् परपंराओं की रक्षा भी नितान्त आवश्यक है ।

भ्रष्टाचार: एक चुनौती
विविध अध्ययनों के निष्कर्ष भ्रष्टाचार के भयानक स्वरूप को प्रकट करते है। उपभोगवाद के बढ़ते स्वार्थ-लालसा बढ़ती गई, परिणाम स्वरूप अनैतिक अवैध मार्ग से अर्थसाधन प्राप्त करने की बढ़ती प्रवृत्ति यही वर्तमान भ्रष्टाचार की समस्या का मूल कारण है । संवैधानिक पदों का दुरूपयोग करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है । ऐसी मनोवृत्ति के कारण संवैधानिक व्यवस्थाएँ भी भ्रष्ट होती दिखाई देती हैं । दुर्भाग्यपूर्ण पक्ष यह है कि व्यवस्थाओं में सुधार का प्रयास करने वाले एवं विरोध करने वालों के जीवन की सुरक्षा को लेकर प्रश्नचिन्ह लगा है। कालाधन और भ्रष्टाचार के कारण देश की अर्थव्यवस्था तथा आर्थिक संतुलन को लेकर देश के नीति-निर्धारक, अर्थशा स्त्री, सामाजिक चिंतकों के मध्य मूलभूत चिंतन हो एवं स्वस्थ व्यवस्था निर्माण हो इसकी आवश्यकता है । छुपाई गई अवैध संपत्ति को विदेश से देश में लाने की व्यवस्था भी होनी चाहिए ।

विविध समूह तथा संस्थाओं द्वारा भ्रष्टाचार के विरोध में होनेवाले आंदोलनों को जनता का बढ़ता समर्थन, जनभावनाओं को ही व्यक्त करता है।

हिन्दू जागरण के शुभ संकेत
हिन्दू समाज के सम्मुख कई प्रकार की चुनौतियाँ और संकट होने के बावजूद भी जन सामान्य हिन्दुत्व के प्रति श्रद्धा रखते हुए, विभिन्न आयोजनों में सहभागी होता है । गत कुछ कार्यक्रमों ने इस जनभावना का दर्शन कराया है ।

माँ नर्मदा सामाजिक कुंभः
माँ नर्मदा सामाजिक कुंभ फरवरी 2011 में मंडला में संपन्न हुआ। इस कुंभ में अद्भुत शक्ति का परिचय मिला है । सामाजिक समस्याओं तथा हिन्दु समाज को दुर्बल बनाने के चल रहे प्रयासों के निर्मुलन करने हेतु ‘जनजागरण’ की कल्पना से ‘‘माँ नर्मदा सामाजिक कुंभ“ का आयोजन किया गया था। इस समारोह में 336 जिलों से 1179 तहसीलों से 40000 ग्रामों से 415 विभिन्न अनुसूचित जाति, जनजाति, तथा अन्य 400 जातियों का प्रतिनिधित्व रहा। अनुमान है कि तीन दिनों में लगभग 30 लाख यात्री इस कुंभ में सहभागी हुये है । पू. शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वतीजी महाराज, पू. स्वामी सत्यमित्रानंदजी, साध्वी ऋतंभराजी, पू. आसाराम बापू और अनेक साधु-संत, महात्माओं की उपस्थिति ने आयोजन को सफल बनाया । प.पू. सरसंघचालक मा. मोहनजी भागवत, रा. से. समिति की प्रमुख संचालिका वन्दनीय प्रमिलाताई, म. प्र. व छत्तीसगढ़ के मा. मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और डा. रमन सिंह आदि महानुभाव भी उपस्थित थे। जनता व प्रशासन का सहयोग इस आयोजन की विशेषता रही।

विश्व संस्कृत पुस्तक मेला:
देश की प्रतिष्ठित संस्कृत संस्थाओं ने मिलकर बंगलौर में विश्व संस्कृत पुस्तक मेले का आयोजन किया । यह मेला 14 संस्कृत विश्व विद्यालय, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, अ.भा. संस्कृत पुस्तक प्रकाशन संघ, संस्कृत भारती आदि संस्थाओं की सहभागिता से 7से 10 जनवरी तक सम्पन्न हुआ । इस प्रकार का आयोजन संस्कृत के इतिहास में पहली बार हुआ है ।

इस मेले में विभिन्न राज्यों के 128 प्रकाशको ने साहित्य उपलब्ध कराये। विशेषता यह रही कि मेंले में केवल संस्कृत अथवा संस्कृत संबध्द पुस्तकों को ही रखना था, 4 दिन में 4 करोड़ रूपयों की 12 लाख पुस्तकों की बिक्री हुई है । 4 लाख लोगो ने मेला दर्शन किया। ‘‘ज्ञानगंगा’’ नामक भारतीय ज्ञान विज्ञान परंपरा की प्रदर्शनी इस मेले का आकर्षण रही । प्रदर्शनी देखकर प्रबुध्द वर्ग समेत लगभग तीन लाख लोग आश्चर्यचकित रहे व प्रेरणा पायी ।

भारत के 26 राज्यो से व विश्व के 12 देशों से 7146 प्रतिनिधि आये थे। इस कार्यक्रम में 310 नयी संस्कृत पुस्तकों का लोकार्पण हुआ जो अपने आप में एक उच्चांक है।


विश्व संघ शिबिर:
विश्व अध्ययन केंद्र द्वारा 29 दिसंबर 2010 से 3 जनवरी 2011 तक पुणे में एक शिबिर का आयोजन किया गया । 35 देशों से 330 बंधु, 152 बहने तथा 35 छोटे बालक उत्साह से सम्मिलित हुए। भारत के बाहर जिन्होने हिन्दु संगठन कार्य प्रारंभ किया ऐसे श्री जगदीश जी शास्त्री भी उपस्थित थे । विदेशों में हिन्दुओं की स्थिति, हिन्दु संस्कृति प्रचार, प्रसार के प्रयास, स्थान स्थान पर होने वाले हिन्दु सम्मेलन आदि विषयों पर चर्चा हुई । भारत में चलनेवाले विविध कार्यो की जानकारी भी प्रस्तुत की गयी । शिबिर का समापन कार्यक्रम प्रसिद्ध उद्योगपति अभय फिरोदिया, भाऊसाहेब चितले जी की उपस्थिति में संपन्न हुआ। प.पू. सरसंघचालक जी का उद्बोधन हुआ। समापन समारोह में पुणे के 15000 गणमान्य महानुभावों की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही। विभिन्न देशों से आये हुये बंधुओं को स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही ‘शिवराज्याभिषेक’ के मंचन का दर्शन भी हुआ।

आवाहन
समय समय पर तत्कालीन सामाजिक, राजनैतिक परिस्थिति की समीक्षा के साथ ही अपने संघ कार्य की भी हम समीक्षा करते रहते है, यही अपनी पद्धति है । हमें वर्तमान चुनौतियों और अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर अपने कार्य की गति व शक्ति को बढ़ाते रहना है । इसी दृष्टी से अपनी सभी संरचनायें सशक्त बने व कार्यकर्ताओं की शक्ति बढ़ती रहे, इसपर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है । पू. श्री गुरूजी के वचनों का स्मरण होता है । वे कहते हैं “आज का संसार एक ही भाषा, शक्ति की भाषा समझता है। केवल अपरिमित शक्ति के दृढ़ आधार पर ही राष्ट्र का उत्कर्ष होता है और उसकी यशस्वी स्थिति बनी रह सकती है । यह हमारी कर्तव्यभूमि है, इस प्रकार की भावना रखकर प्रयत्नपूर्वक कर्तव्यपथ पर अग्रसर होना चाहिए । साधारण व्यक्ति अपने जीवन के उद्देष्यों की पूर्ति में पूर्णरूपेण सफल होता है”।



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