Saturday, February 28, 2015

स्वस्थ समाज से ही स्वस्थ राष्ट्र का गठन संभव है-डॉ. तोगड़िया

संबलपुर : शुक्रवार की शाम स्थानीय वीर सुरेंद्र साय मार्ग पर स्थित एक निजी हॉस्पिटल के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया  ने बताया कि स्वस्थ समाज से ही स्वस्थ राष्ट्र का गठन संभव है। समाज के स्वस्थ रखने में डॉक्टरों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में डाक्टरों को सेवा भावना के साथ अपना पेशा करने की आवश्यकता है तभी यह राष्ट्र स्वस्थ और मजबूत हो सकेगा, उन्होंने इंडियन हेल्थ लाईन के माध्यम से देश के गरीब लोगों तक चिकित्सा सेवा पहुंचाए जाने पर भी जोर दिया।
स्वस्थ राष्ट्र गठन में डाक्टरों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने इस पेशे में सेवा भावना को आवश्यक बताया है। डॉ. तोगड़िया शुक्रवार की रात और शानिवार के पूर्वाहन संबलपुर में थे और इस दौरान विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल रहे।

इस कार्यक्रम में विश्व हिन्दू परिषद के पश्चिम ओडिशा उपाध्यक्ष डॉ. गुणसागर दास सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. दुर्गाशंकर शतपथी ने कार्यक्रम का संचाल किया।

NAVEEN ANTI-HINDU, REITERATES TOGADIA







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Bhubaneswar,28/2-I wanted to go to Kandhamal to feed poor children and provide treatment to downtrodden by a team of specialist doctors from Cuttack and Bhubaneswar. But the Naveen Patnaik Government did not allow me to go there, this was said by VHP international working president Praveen Bhai Togadia here on Saturday.
Speaking at a Press conference, Togadia said, “European Union nChristians can go to Kandhamal but not a nationalist like me. Naveen is anti- poor, anti-tribal and anti –Hindu.”
Among others, VHP functionaries Arun Kumar Upadhyay, Nagendra Kumar Debadtta, Prahalad Khandelwal and Prasanta Panda were present

VHP-CALLED KANDHAMAL BANDH TOTAL

VHP calls bandh in Kandhamal
PHULBANI-The Vishva Hindu Parishad (VHP) has called for a 12-hour shutdown in Odisha’s Kandhamal district Saturday to protest the ban on the entry of its top leader Pravin Togadia into the region, a leader said Friday. “We have called for a total shutdown in the district. However, the emergency services will continue as usual,” VHP leader Bhagaban Mohanty told.

A 12-hour Kandhamal Bandh called by the Vishwa Hindu Parishad (VHP) on Saturday in protest against the refusal of the State Government to allow VHP international working president Pravin Togadia to enter the district evoked total response. While vehicular traffic came to a standstill, all trade and business establishments, banks, Government offices including the Collectorate office were also closed.
Apart from the district headquarters, the bandh was also total in the Daringbadi and Raikia areas. Reports said armed police forces were frisking vehicles at several places in Madhapur, Kalinga, Tumudibandh, Kotagada and Khajuripada to stop entry of VHP leaders to the district. Besides, four platoons of armed police forces, led by DIG Amitabh Thakur, were deployed at Chari Chhak in Boudh bordering Kandhamal district to stop entry of VHP activists from outside the district.
According to Kandhamal Collector N Thirumala Nayak, the district administration took all requisite measures to prevent any untoward incident during the bandh. Adequate security was provided to all churches in the district, he said. He also said the High School Certificate (HSC) examinations went on smoothly all over the district in the day. Kandhamal VHP leader Bhagaban Mohanty expressed his profound gratitude to the people for their support in making the bandh a total success.

राजस्थान के स्कूली छात्रा ने गौमूत्र से बना दी बिजली !

फाल्गुन शुक्ल पक्ष दशमी, कलियुग वर्ष ५११६
राजसमंद (राजस्थान) - राजसमंद जिले के नाथद्वारा में ८वीं कक्षा में पढने वाली १३ वर्षीय साक्षी दशोरा ने गौमूत्र से बिजली तैयार की है । मावली के गडवाडा व्यास एकेडमी की इस छात्रा ने गाय के गोबर और गौमूत्र साइंटिफिक यूज बताते हुए “इम्पॉटेंस ऑफ काऊब्रीड इन २१ सेंचुरी” प्रोजेक्ट बनाया है। मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के इंस्पायर अवार्ड के तहत उसके प्रोजेक्ट को अब इंटरनेशनल लेवल पर पहचान मिलेगी। ये प्रोजेक्ट दो माह बाद जापान में आयोजित सात दिवसीय सेमिनार में प्रदर्शित होगा। वहां साक्षी व्याख्यान भी देगी।
साक्षी ने अगस्त २०१४ में हुई प्रदर्शनी में इस प्रोजेक्ट के लिए उदयपुर जिले में छटी रैंक, फिर सितम्बर में डूंगरपुर में आयोजित राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में १२ वीं रैंक और इसके बाद नेशनल लेवल दूसरी रैंक हासिल की थी। साक्षी सहित प्रदेश के अन्य तीन बच्चों का भी जापान के लिए चयन हुआ है। साक्षी ने बताया कि गौमूत्र में सोडियम, पोटेशियम, मेग्नीशियम, सल्फर एवं फास्फोरस की मात्रा रहती है।
उन्होंने प्रोजेक्ट में एक लीटर गौमूत्र में कॉपर और एल्युमिनियम की इलेक्ट्रोड डाली जिसे वायर के जरिए एलईडी वॉच से जोडा। बिजली पैदा होते ही वॉच चलने लगी। गौमूत्र की मात्रा के अनुसार बिजली पैदा होगी। बता दें, गौमूत्र कैंसर सहित अन्य बीमारियों से भी बचा सकता है। गोबर से लेप करें तो तापमान कंट्रोल रहेगा। इससे अगरबत्ती भी बनाई जा सकती है।

पाक के पहले हिंदू जस्टिस भगवानदास का निधन !

फाल्गुन शुक्ल पक्ष दशमी, कलियुग वर्ष ५११६
rana_bhagwandasकराची –  पाकिस्तान के पूर्व कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश राणा भगवानदास का यहां निधन हो गया। वह कुछ समय से बीमार चल रहे थे। भगवानदास देश के शीर्ष न्यायिक पद पर अपनी सेवा देने वाले एकमात्र हिंदू थे।
भगवानदास का यहां एक निजी अस्पताल में दिल की बीमारी का इलाज चल रहा था। उनका कल निधन हो गया। वह ७३ वर्ष के थे।भगवानदास पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख के तौर पर काम करने वाले पहले हिंदू और दूसरे गैर-मुस्लिम न्यायाधीश थे। वह देश की न्यायपालिका के काफी सम्मानित सदस्य थे।
वह २००७  में न्यायिक संकट के दौरान सुप्रीम कोर्ट के कार्यकारी प्रधान न्यायाधीश थे। जब २००५ और २००६ में प्रधान न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी विदेश के दौरों पर गए थे तब भी भगवानदास ने उनकी जगह प्रधान न्यायाधीश का कार्यभार संभाला था। वह फरवरी २००० से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश थे।
भगवानदास ने पाकिस्तान के फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन के अध्यक्ष के तौर पर भी काम किया। सिंध प्रांत में लरकाना जिले के नसीराबाद में दिसंबर १९४२ में जन्मे भगवानदास ने इस्लामिक स्टडीज में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की थी और उन्हें संविधान और कानून का विशेषज्ञ माना जाता था।
स्त्रोत : Web Dunia

गोरक्षकों पर प्राणघातक आक्रमण करने वाले आरोपी ढूृंढने में पुलिस असफल, नागरिकों का पुलिस थाने पर मोरचा

वाळपई के नागरिकों का वाळपई पुलिस थाने पर मोरचा

morcha_goaमोरचा में सम्मिलित गोप्रेमी
वाळपई - गोरक्षक श्री.हनुमंत परब तथा श्री. अमृत सिंह पर किए गए आक्रमण को १३ दिन बीत चुके हैं, किंतु अभी तक वाळपई पुलिस ने आक्रमणकर्ताओं को अधिकार में नहीं लिया है । अतः वाळपई के संतप्त नागरिकों ने २४  फरवरी को वाळपई पुलिस थाने पर मोरचा का आयोजन  किया । उस मोेरचा में पशुमित्र श्री. सुनील पळ, गोवंश रक्षा अभियान के श्री. हनुमंत परब, वाळपई पत्रकार संघ के अध्यक्ष श्री. मिलिंद गाडगीळ, हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. शेखर बर्वे, भारत स्वाभिमान के श्री. कमलेश बांदेकर, पतंजली योग समिति के श्री. तुळशीदास काणेकर, नाणुस के अखिल विश्व जय श्रीराम गोसंवर्धन केंद्र के श्री. समीर जोशी, श्री. गजानन बोर्डेकर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के श्री. प्रकाश गाडगीळ, श्री. समीर मणेरकर, पद्मनाभ संप्रदाय के श्री. महादेव गांवकर इत्यादि सम्मिलित हुए थे । इस मोरचा के लिए १०० नागरिकों की उपस्थिति थी । पुलिस निरीक्षक पुलिस थाने में अनुपस्थित थे ।
morcha_goa2 पुलिस के साथ विचारविमर्श करते हुए गोरक्षक
उपस्थित पुलिस उपनिरीक्षक श्री. संजय दळवी ने यह आश्वासन देने का प्रयास किया कि ‘अवैध गोमांस के परिवहन पर पाबंदी लगाएंगे ।’ किंतु इस आश्वासन से असंतुष्ट उपस्थित धर्माभिमानियों ने पुलिस को फटकारा । ‘गोमांस की तस्करी कब बंद करेंगे ? गोरक्षकों पर आक्रमण करनेवाले अपराधियों को बंदी बनाकर उन्हें दंड कब देंगे ? गत ४ वर्षों से गोरक्षकों को पुलिस की ओर से किसी भी प्रकार का सहयोग प्राप्त नहीं हुआ है । अतः आप पर विश्वास कैसे करें ?, इस प्रकार के प्रश्न पूछकर उन्हें त्रस्त किया । मोरचा के अंत में नगरपालिका के मंच पर निषेध सभा का आयोजन किया गया । उस समय अनेक गोप्रेमी नागरिकों के भाषण हुए । अंत में श्री. समीर जोशी ने आभार प्रदर्शन किया ।

144 illegal slaughterhouses to be closed

Phalgun Shuklapaksha 10, Kaliyug Varsha 5116
Mumbai : The state government has decided to come down heavily on illegal slaughterhouses. There are a total of 144 illegal slaughterhouses running across the state, which will be shut down. The announcement was made by state environment minister Ramdas Kadam on Monday.
Of the 144 slaughterhouses, 128 are small and 16 are big ones. “Instructions have been given to all the municipal corporations and municipal councils to take strict action against illegal slaughterhouses,” Mr Kadam said.
He said that so far there is no monitoring on slaughterhouses, which needs to be done by civic authorities. “This results in slaughtering of more than the permissible limit of animals. Similarly, the wastage is also being dumped at public places creating health problems,” the minister said.
Protesting against the alleged harassment from various right-wing groups while carrying cattle to the slaughterhouses, beef dealers association from across the state was on an indefinite strike from the first week of February. The strike was withdrawn only after chief minister Devendra Fadnavis assured them full protection. The police was also directed not to allow anyone to take law and order into their hands.
Mr Kadam said that the small slaughterhouses have permission to slaughter only 10 animals per day but they exceed the limit by way more than what is permissible.
He said that the state government would strictly follow the directives passed by the Supreme Court in Laxmi Narayan Modi versus Government of India over functioning and monitoring of slaughterhouses.
Source : The Asian Age

हिन्दू कोई मजहब नहीं बल्कि जीवन पद्धति है-डा. प्रवीण तोगड़िया

राउरकेला :विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डा. प्रवीण तोगड़िया  सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हिन्दू कोई मजहब नहीं बल्कि जीवन पद्धति है। उन्होंने राजनीतिक दलों से संविधान में संशोधन कर संवैधानिक रूप से भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए कानून बनायें। विहिप के स्वर्ण जयंती पर राउरकेला में शुक्रवार को टेलीफोन भवन मैदान में आयोजित विशाल हिन्दू सम्मेलन को तोगड़िया संबोधित कर रहे थे।
विशाल हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए डा. प्रवीण तोगड़िया ने  धर्मातरण पर राग अलापने वाले राजनीतिक दल के नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि संविधान में इसके खिलाफ कानून बने।  उन्होंने धर्मातरण और लव जिहाद के साथ साथ देश भर के विभिन्न राज्यों में तीन करोड़ से अधिक बंगलादेशी घुसपैठियो के होने पर चिंता जताते हुए इसकी आलोचना की और सभी राज्य सरकारों से बंगलादेशियों को वापस भेजने पर जोर दिया। इस मौके पर उन्होंने हिन्दू जोड़ो अभियान पर हेल्पलाइन जारी किया।
यह विहिप का स्वर्ण जयंती उत्सव मनाने का समय कहीं अधिक महत्वपूर्ण सौ करोड़ हिन्दुओं को आगे ले जाने का समय है। इसके लिए विहिप में कार्य योजना तैयार की है, जिसके क्रियान्वयन से हम समृद्ध, सुरक्षित, संगठित व स्वाभिमानी हिन्दू बन सकते हैं। उन्होंने 2000 साल के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि समय के साथ हिन्दू सिमटता जा रहा है। अगर हम भविष्य के लिए नहीं चेते तो हमारे अस्तित्व पर संकट आना तय है, ऐसे में हमें एकजुट होकर आगे बढ़ने की जरूरत है।
 स्वागत समिति के अध्यक्ष व उद्यमी कमल अग्रवाल ने स्वागत भाषण में सम्मेलन के लक्ष्य व उद्देश्य पर प्रकाश डाला। स्वामी जीवन मुक्तानंद, स्वामी पार्थ चैतन्य, साध्वी निरंजना, विहिप नेता अच्युतानंद कर, अमूल्य मिश्र, डा. सनातन प्रधान, नीलकंठ महंती आदि मुख्य रूप से इसमें उपस्थित थे। इस मौके पर लंबे समय तक विहिप से जुड़े रहकर संगठन की मजबूती में हाथ बंटाने वाले बुजुर्ग कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। इसमें रोशनलाल, संतोष सिंह, बाइधर साबत, तारकनाथ सिंह आदि शामिल हैं।

Friday, February 27, 2015

भुट्टो की हत्या को देश के ही एक प्रमुख मदरसे दारुल उलूम हक्कानिया के छात्रों ने अंजाम दिया था

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्रीबेनजीर भुट्टो की हत्या को देश के ही एक प्रमुख मदरसे दारुल उलूम हक्कानिया के छात्रों ने अंजाम दिया था। संघीय जांच एजेंसी (एफआइए) ने बृहस्पतिवार को रावलपिंडी की विशेष अदालत को इसकी जानकारी दी। खैबर पख्तूनख्वा के नौशेरा जिले के अकोरा खटक में स्थित हक्कानिया मदरसे का संचालन 'तालिबान का पिता' के नाम से कुख्यात मौलवी समी-उल हक करता है। वह कई बार सांसद भी रह चुका है।
बेनजीर की वर्ष 2007 में हत्या कर दी गई थी। इसमें पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति को भी दोषी ठहराया गया है। आतंक रोधी अदालत के जज परवेज इस्माइल ने सुरक्षा कारणों से मामले की सुनवाई अदियाला जेल में की। एफआइए (पेशावर) के इंस्पेक्टर नसीर अहमद व सब-इंस्पेक्टर अदनान ने कोर्ट को दारुल उलूम हक्कानिया के छात्रों की संलिप्तता के बारे में जानकारी दी।
इस दौरान मामले के दो गवाह भी कोर्ट में मौजूद थे। दारुल उलूम हक्कानिया के शिक्षा निदेशक विशाल अहमद ने अपने बयान में स्वीकार किया कि संदिग्ध आत्मघाती हमलावर अब्दुल्ला उर्फ सद्दाम नादिर उर्फ कारी इस्माइल, गिरफ्तार आरोपी राशीद उर्फ तुराबी और फैज मुहम्मद ने मदरसे से पढ़ाई की थी, लेकिन अब इनका मदरसे से कोई लेनादेना नहीं है। अहमद के मुताबिक, सभी आरोपी पढ़ाई होने से पहले ही मदरसा छोड़ चुके थे।
हक्कानिया से ही पढ़े हैं कई शीर्ष आतंकी
तालिबान के कई शीर्ष आतंकियों ने दारुल उलूम हक्कानिया से पढ़ाई की है। यहां पढ़ाई करने वाले अपने नाम के साथ हक्कानी लगाते हैं। हक्कानी नेटवर्क के संस्थापक जलालुद्दीन हक्कानी ने भी इसी मदरसे से पढ़ाई की थी।
मदरसे का मालिक समी-उल हक अफगानिस्तान में तालिबानी न्याय प्रणाली की खुलेआम तारीफ कर चुका है। नवाज शरीफ की ओर से बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा के बाद समी पाकिस्तान तालिबान के आतंकियों से कई बार बात भी कर चुका है।

ओडिशा-झारखंड के बांसजोर सीमा में प्रवीण तोगडि़या का स्वागत


बीरमित्रपुर में प्रवीण तोगडि़या का स्वागत

बीरमित्रपुर : विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया के शुक्रवार को रांची से बीरमित्रपुर से होकर राउरकेला आने पर ओडिशा-झारखंड के बांसजोर सीमा पर विहिप व भाजपा कर्मियों ने उनका भव्य स्वागत किया गया। करीब साढ़े बारह बजे प्रवीण तोगड़िया काफिले के साथ सीमा पर पहुंचे।

प्रवीण भाई तोगड़िया के कंधमाल दौरे को प्रशासन द्वारा अनुमति न दिए जाने के मामले पर विहिप ने नाराजगी जताते हुए आन्दोलन की धमकी दी है

भुवनेश्वर : विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण भाई तोगड़िया के कंधमाल दौरे को प्रशासन द्वारा अनुमति न दिए जाने के मामले पर विहिप ने नाराजगी जताते हुए आन्दोलन की धमकी दी है। हालांकि प्रशासन ने विहिप के अन्य कार्यक्रम पर किसी तरह की आपत्ति न होने की बात कही है।
विहिप का आरोप है कि समुदाय विशेष की तुष्टिकरण के लिए तोगड़िया पर प्रतिबंध लगाया गया है। गौरतलब है कि विश्व हिन्दू परिषद की ओर से इस साल जन्माष्टमी से स्वर्ण जयन्ती उत्सव मनाया जा रहा है। इस सिलसिले में बिहिप ने 28 फरवरी को फुलवाणी में एक जनसभा का आयोजन किया है, जिसमें प्रवीण भाई तोगड़िया के सम्मिलित होने की बात थी। मगर कंधमाल के कुछ क्रिश्चियन संगठनों ने इससे जिले में शांति भंग की आशंका जाहिर करते हुए इसके खिलाफ प्रशासन से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था। इससे पहले भी सन 2010 में तोगड़िया को कंधमाल जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। प्रवीण भाई के कंधमाल प्रवेश पर लगे प्रतिबंध पर विश्व हिन्दू परिषद की ओडिशा शाखा ने गहरा असंतोष जताते हुए इसे विद्वेष पूर्ण कार्रवाई बताया। यहां यह बताना उचित होगा कि स्वामी लक्ष्मणानन्द सरस्वती हत्याकांड के बाद कंधमाल जिले में सांप्रदायिक दंगा हुआ था और जिले में दोनों समुदाय के मध्य तनाव काफी बढ़ गया था।

बांग्लादेशी लेखक अविजित रॉय की जिहादीयोंद्वारा हत्या

ढाका : मशहूर बांग्लादेशी वैज्ञानिक व लेखक अविजित रॉय की गुरुवार को राजधानी ढाका में हत्या कर दी गई। कुछ अज्ञात लोगों ने रॉय और उनकी पत्नी पर रात 9.30 बजे हमला किया। इलाज के दौरान अस्पताल में उनकी मौत हो गई। रॉय की पत्नी रफीदा अहमद की हालत गंभीर है। प्रख्यात लेखिका तसलीमा नसरीन ने रॉय की हत्या की भर्त्सना की है।avijit_roy
बताया जा रहा है कि रॉय और उनकी पत्नी रफीदा गुरुवार रात एक पुस्तक मेले से लौट रहे थे। ढाका यूनिवर्सिटी के पास अचानक कुछ अज्ञात लोगों ने उन पर हमला कर दिया। इस हमले में रॉय और रफीदा बुरी तरह घायल हो गए। रॉय के सिर में गहरी चोट आई, जिसके बाद दोनों को ढाका मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। सिर में लगी गंभीर चोट की वजह से रॉय की इलाज के दौरान मौत हो गई।
अमेरिका में नौकरी कर चुके रॉय को इस्लामी चरमपंथियों की ओर से लगातार धमकियां मिल रही थीं। उनकी हत्या पर भारत में निर्वासन में रह रहीं तसलीमा ने ट्वीट किया, आतंकियों ने रॉय की हत्या कर दी, लगता है हम आदिम युग में जी रहे हैं।
स्त्रोत : जागरण

7,000 Pakistani Hindu migrants to get permanent citizenship

Phalgun Shuklapaksha 9, Kaliyug Varsha 5116
Barmer, Rajasthan : Nearly 7,000 Pakistani Hindu migrants who have been living like refugees in various towns of Rajasthan will start getting permanent citizenship and long term visas from Monday. The first camp for the purpose will be held at Barmer on Monday.
Notably, there are seven migrant camps in Jodhpur which receive an ever-ending flow of migrants almost every week by Thar Link Express, the weekly train between India and Pakistan.
Most of those who come never return as minorities have been facing difficult living conditions in Pakistan since the demolition of the Babri Masjid in 1991. The situation worsened with the strengthening of the Taliban.
However, life is tough for the migrants here. They primarily belong to the Scheduled Castes and the Scheduled Tribes and live in camps on the outskirts of the city, which lack even basic facilities for water supply, education, health and even shelter.
The camp at Alkausar Nagar does not even have a toilet, one of the focus areas of the Prime Minister; neither does it have regular water supply.
“We have to get water from the nearby Madrasa, our children do not get admission in government schools and we cannot afford private schools,” says a fresh migrant who came to Rajasthan with his family just last month but did not wish to be identified for fear of persecution of his family back in Karachi.
Those who get long-term visas have to wait for seven years before they are entitled to apply for Indian citizenship, which is not an easy task.
“Many people also return because the living conditions are so bad here, but the inflow of people still continues. Government agencies often cite security reasons for grant of citizenship, though most of us were citizens of undivided India; they can at least give us refugee status,” says Mr. Sodha, who was a migrant but is now an Indian citizen.
The migrants are settled in Barmer, Jaisalmer, Bikaner and now Jodhpur because the Thar Express arrives here.
Meanwhile, BJP-ruled Madhya Pradesh has also decided to grant citizenship rights to over 20,000 Hindu migrants from Pakistan.
The move follows chief minister Shivraj Singh Chouhan’s assurance during the recent civic polls – which the BJP won decisively – that “no Pakistani Hindu would be asked to leave the state” as long as he is at the helm and that he would seek Prime Minister Narendra Modi’s intervention.
Chouhan had made the promise in Indore, home to the largest number of such people in the state.
Special camps have now been lined up in Bhopal and Indore where senior officials from the Union home and external affairs ministries work with local authorities to help such migrants get such rights.
The process starts with the local collector recommending citizenship rights. The file is sent to the home and foreign ministries in Delhi for vetting and returns to the collector, who then issues the certificate.
Source : News 18

VHP rejects fresh proposal to accommodate both a mosque and temple to resolve Ayodhya dispute

Phalgun Shuklapaksha 9, Kaliyug Varsha 5116
“To think that Mandir and Masjid should be constructed together is evidence of mental bankruptcy,” said VHP representative (File Photo) [Courtesy : DNA]
Vishwa Hindu Parishad (VHP) on Tuesday rejected a fresh proposal for accommodating both a mosque and a temple to resolve the Ayodhya dispute and smelt a conspiracy in it as the suggestion was evidence of “mental bankruptcy”.
“This is not the first time that such a proposal has been floated. This type of conspiracy can never happen. To think that Mandir and Masjid should be constructed together is evidence of mental bankruptcy,” VHP joint general secretary Surendra Kumar Jain said told reporters. He said this when his attention was drawn to a fresh initiative by the main litigant in Babri Masjid case Hashim Ansari.
Ansari met Akhara Parishad president Mahant Gyan Das today to discuss proposals for resolution of Ayodhya dispute and put it before the Supreme Court. The formula for out-of-court settlement broadly talks about the 70-acres of disputed premises accommodating both mosque and temple with a partition wall which will be 100 feet high, according to Gyan Das, the chief priest of Ayodhya’s famous Hanuman Garhi temple.
Jain said the proposal itself was an “insult” to judiciary as the High Court had clearly stated that there was a temple which was demolished for a mosque.
“These people are not aware of law. We cannot accept this,” he reiterated.
Strongly defending the ‘ghar wapsi’ programme of the Hindu outfits, he described the initiative as a kind of “vaccination to kill the virus of hatred.” At the same time, he supported enactment of law against religious conversion.
Source : DNA

Rs 1,00,786 bounty on Muslim cleric who called Shiva ‘messenger of Islam’

Phalgun Shukla paksha 9, Kaliyug Varsha 5116
Bareilly (Uttar Pradesh): Muslim cleric and leader of the Jamiat Ulema Hind, Mufti Mohammad Ilyas Qasmi, had referred to Lord Shiva as the “first messenger of Islam” in Ayodhya on Thursday, asserting that Indian Muslims were followers of the Sanathan Dharma. Now, the Bareilly-based All India Faizan-e-Madina Council, a socio-political group, has announced a bounty of Rs 1,00,786 on his head. The ‘national president’ of the outfit, Mooen Siddiqui Noori, on Monday said the cash award would be given only to a Muslim. An “Islamic” sword would also be presented to the killer.
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Qasmi, long known as a champion of communal amity in Ayodhya, has also said that Muslims should not be averse to being called Hindus, for the people of China were called Chinese, and the people of Japan, Japanese.
“Qasmi made these strange remarks against the Sharia on insistence from the RSS. If he really had any knowledge, his comments would be backed by the holy scripture,” Noori added.
Faizan-e-Madina, say its members, aids families of poor girls in meeting marriage expenses. It also helps in the education of underprivileged children.
Noori said he would like to teach all people making such irresponsible statements a lesson. “For teaching such people a lesson so they never make such remarks again, I have decided that any Indian Muslim who gives me the head of Qasmi will be given a cash reward of Rs 1,00,786. He will also get an ‘Islamic sword’.”
In Shariat-governed Saudi Arabia, criminals are punished with an Islamic sword, Noori explained.
“Sharia is not enforced in our country, but we can follow it to deal with traitors. I am aware that my announcement will land me in jail, but I’m not scared,” Noori claimed.
Qasmi had reportedly said in Ayodhya on Thursday that “every Indian is a Hindu” and “Lord Shiva and Goddess Parvati are part of the lakh and twenty four thousand prophets sent to earth with a mission to establish humanity, true religion and God’s rule in the world.”
Nadeem Qureshi, president of the All India Jan Sewa Committee, a Bareilly-based organisation, had also recently taken a complaint to the police, saying Qasmi’s comments were offensive and hurt religious sentiments.
Asked if police would take preventive action against the Madina Council, SP Rajeev Malhotra said: “I am not yet fully aware of this. I will take appropriate action at the right time.”
Source: Times Of India

RSS Chief Bhagwat not the first, many Scholars questioned Mother Teresa in the past too

An article in IBNLIVE.COM
New Delhi: A statement on Mother Teresa by the RSS chief Mohan Rao Bhagwat has led to a nationwide controversy. Speaking at an RSS programme, Mohan Bhagwat said that Mother Teresa’s caring for the poor and the sick had religious motives and the conversion was the main intention. Minutes after he made this comment, people on the other side of the ideology started questioning and condemning his statement.
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The opposition Congress to TMC to the Left have strongly criticized his views on Mother Teresa asking him to withdraw it. Twitter is also abuzz with both pro and anti Teresa tweets. However, it is not the first time that Mother Teresa’s works are being questioned or criticized.
Mother Teresa faced several controversies even during her own lifetime. She was questioned by many including the several Western scholars. Some of them were the same Roman Catholics like Mother Teresa herself.
When the Vatican decided to beatify her, researchers were called into question the saintly image of Mother Teresa after carrying out research into her life. According to a report in United Kingdom’s ‘Daily Mail‘ published in March 2013, a number of critics have questioned how much of the saintly image of her is justified. Writing in journal Studies in Religion/Sciences, Prof Serge Larivie and Genevieve Chenard, say Teresa’s hallowed reputation does not stand up to scrutiny. Professor Larivie said, ‘While looking for documentation on the phenomenon of altruism for a seminar on ethics, one of us stumbled upon the life and work of one of Catholic Church’s most celebrated woman and now part of our collective imagination – Mother Teresa.
‘The description was so ecstatic that it piqued our curiosity and pushed us to research further.’ After studying nearly 300 documents on her life, they concluded that a number of issues surrounded the nun were not taken into account by the Vatican. These included ‘her rather dubious way of caring for the sick, her questionable political contacts, her suspicious management of the enormous sums of money she received, and her overly dogmatic views regarding, in particular, abortion, contraception, and divorce.’
They also say that following numerous natural disasters in India she offered prayers and medallions of the Virgin Mary but no direct or monetary aid. But she accepted the Legion of Honour and a grant from the Duvalier dictatorship in Haiti, said Prof Larivee, and although millions of dollars were transferred to the various bank accounts, most of the accounts were kept secret. Dr Larivie says, ‘Given the parsimonious management of Mother Teresa’s works, one may ask where the millions of dollars for the poorest of the poor have gone?’
Some claim that her image may have been built upon a meeting in 1968 with the BBC’s Malcom Muggeridge, an anti-abortion journalist who shared her right-wing Catholic values. It was his promotion of her which led to her fame, they say.
However her critics also admit that Mother Teresa was genuinely engaged in the service of the poorest of the poor and terminally ill patients and lepers. But they also argue that ‘Nevertheless, the media coverage of Mother Teresa could have been a little more rigorous.’
Renowned writer Christopher Hitchens made the most controversial remarks on Mother Teresa. Mother Teresa’s image as an innocent do-gooder was false, Hitchens had said, and he attacked it hard during his career. According to a report in ‘Christian Post’, quoting Mark Twain, Hitchens said about Teresa “Give a man the reputation for being an early riser and that man can sleep until noon.” Hitchens insisted that Mother Teresa was anything but the apolitical savior of the poor that she was known to be. Rather, he blasted the nun for being a willing political tool for the Vatican, a validator of corrupt, right-wing political leaders, and even more surprisingly, a suppressor, rather than savior, of the poor. Mother Teresa was incorrectly adored by the media, he insisted. In “Hell’s Angel”, a documentary, Hitchens made about Mother Teresa, the author reveals that what irked the most about Mother Teresa was claim to being apolitical, despite evidence he believed disproved her claim. Hitchens argued in the documentary that Mother Teresa’s use of her international fame to argue for anti-abortion policies was the result of her being a political tool for the Vatican, and she is said to have urged political leaders around the world to pass anti-abortion legislation in their countries, an ever-important issue for the Catholic Church.
Mother Teresa was born in Albania, in 1910. She became a nun at the age of 18, devoting her life to helping the poor. One of her most famous projects was a home in Calcutta ‘Missionaries of Charities’, that took in the dying and destitute, in order to give them comfort in their last days. She died in Calcutta in 1997, at the age of 87. She was beatified by Pope John Paul II in 2003.
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An article in FIRSTPOST.COM
The RSS chief, Mohan Bhagwat, is under fire for questioning Mother Teresa’s motives in serving India’s poor, for which she received a Nobel prize for peace. Among other things, Bhagwat said: “People like Mother Teresa did good work and service. But the aim was to convert the poor to Christianity. This kind of service is devalued if conversions are done in the name of service or work,” he said.
This statement drew criticism from the usual suspects, the politically “secular” elite, but two points are worth making in this regard.
First, motives may vary from individual to individual, and so if one does good work with a narrow motive, it does not automatically become tainted. I may help someone with the aim of going to heaven or to gain plaudits, but that does mean my act is, by definition, wrong or questionable. However, it would be right to point out my motives – to the extent they are important to understand why someone is doing something. This way we can discount the level of altruism in one’s acts.
Second, the question we really need to ask is this: would Mother Teresa herself have disagreed with what Mohan Bhagwat said about her motives? It is no secret that she believed fervently in the church and its message, and she was clear about her loyalties. She was, for example, opposed to contraception, divorce, etc, because the church taught her so and it was against god’s law. But she certainly did not believe in conversion by force or inducement.
The best way to understand what she stood for is to read her in her own words. An interview published by India Todayin 1983 throws light on what she would have made of Bhagwat’s comment about her motives. She did not claim neutrality in her service to the poor. Asked to choose between the Church’s Inquisition and Galileo, she unhesitatingly said she was with the church. She is unlikely to have disagreed too much with Bhagwat.
I am quoting parts of the India Today interview verbatim for the reader to draw her own conclusions (read the full interview from the archive here).
As a Christian missionary, do you adopt a position of neutrality between the Christian poor and other poor?
A. I am not neutral. I have my faith.
Do you believe in conversion?
A. To me, conversion means changing of heart by love. Conversion by force or bribery is a shameful thing. It is a terrible humiliation for anyone to give up religion for a plate of rice.
Just as the caste system in Hinduism is a fetter, do you feel that the labyrinthine regulations of the Catholic Church too are a fetter?
A. I never felt that way. Nor did I feel the necessity to change the rules of the Catholic Church. It is not relevant, too. In the hour of death, we are going to be judged by what we have done to the poor. We have consecrated our lives to give wholehearted and free service for the poorest of the poor.
Can the Church do any wrong?
A. No, as long as it stands on the side of God.
Mother, if you were born in the Middle Ages, and were asked, at the time of Galileo’s inquisition, to take sides, which would you have chosen – the Church or modern astronomy?
A. (Smiling) The Church.
Given her controversial stand, Mother Teresa did not lack for critics, with many of them suggesting that her reputation far exceeded her actual achievements in the service of the poor. Serge Larivie and Genevieve Chenard, writing in theStudies in Religion/Sciences Journal, probed her reputation and concluded that it did not stand up to scrutiny.
The Daily Mail quoted Prof Larivie in one of its reports as saying that the ecstatic references to Mother Teresa everywhere prompted them to examine her record, for which the Vatican beatified her in 2003. The researchers studied nearly 300 documents and found many things wrong with her Missionaries of Charity, including “her rather dubious way of caring for the sick, her questionable political contacts, her suspicious management of the enormous sums of money she received, and her overly dogmatic views regarding, in particular, abortion, contraception, and divorce.”
Dr Larivie noted Mother Teresa’s “parsimoniousness” and apparent unwillingness to offer the poor and disaster-struck real material succour – and opting for prayers – when she had more than enough resources for it. He said: “Given the parsimonious management of Mother Teresa’s works, one may ask where the millions of dollars for the poorest of the poor have gone?”
The tabloid said “her image may have been built upon a meeting in 1968 with the BBC’s Malcom Muggeridge, an anti-abortion journalist who shared her right-wing Catholic values” – a point made by Mother Teresa’s most trenchant critic, Christopher Hitchens (Author of God is not Great).
In a devastating article in Slate.com after the Vatican beatified her, Hitches called her a fanatic, a fundamentalist and a fraud.
Nobody should go as far as Hitchens in criticising Mother Teresa, but one cannot but conclude that the Church was as important to her as service to the poor. That she was motivated by a love for Jesus is for sure, but it is not likely that she would have worked for the poor purely for social motives. The church and her faith were probably above all else.
MEENAKSHI LEKHI on Mother Teresa:
On Feb 24, Accusing Congress of trying to make “political capital” out of RSS chief Mohan Bhagwat’s remarks, BJP leader Meenakshi Lekhi on Tuesday claimed that Mother Teresa had herself in an interview said that her job was to bring people to the fold of Christianity.
Speaking to reporters outside Parliament House, the BJP MP said politicisation of such comments needs to be avoided and objected to remarks by Congress members and several other leaders on the issue.
“All my request to Jyotiraditya Scindhia, Mrs (Sonia) Gandhi and several others is don’t describe people, the way you want to describe them,” Lekhi said. She claimed that in a book, Mother Teresa had herself said that she worked to bring people to the fold of Christianity.
“And kindly read Navin Chawla’s book, who was an old Congress loyalist, on Mother Teresa, where Mother Teresa herself during an interview says that ‘a lot of people confuse me as social worker, I am not a social worker. I am in the service of Jesus and my job is to spread the word of Christianity and bring people to its fold’,” Lekhi added.

क्रीड़ा भारती ने छात्र-छात्राओं को बताये सूर्य नमस्कार के गुण

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मेरठ. सूर्य सप्तमी के अवसर पर मेरठ के माधव कुंज शताब्दीनगर में क्रीड़ा भारती द्वारा सूर्य नमस्कार कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने अभ्यास करवाकर नियमित सूर्य नमस्कार करने का आग्रह किया. क्रीड़ा भारती के प्रांत अध्यक्ष डा. विकास अग्रवाल ने विद्यार्थियों को सूर्य नमस्कार के गुण बताते हुए कहा कि नियमित सूर्य नमस्कार करने से मस्तिष्क का विकास होता है तथा शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है. उन्होंने उपस्थित जनों से नियमित सूर्य नमस्कार अभ्यास करने की अपील की. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पंचवटी ग्रुप के अध्यक्ष जगदीश जी ने क्रीडा भारती के अभियान की सराहना की. क्रीडा भारती के महानगर अध्यक्ष जगत सिंह दौसा ने जानकारी देते हुए बताया कि क्रीडा भारती द्वारा अभियान में 30 विद्यालयों में एक लाख सूर्य नमस्कार कराये गये.
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हम विविधताओं को स्वीकार करने वाली संस्कृति का अनुसरण करते हैं – सरसंघचालक


_DAS5193मुंबई (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने कहा कि स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर जी ने किसी पक्ष, जाति, संप्रदाय अथवा गट का नहीं, उन्होंने पूरे समाज का विचार किया. संपूर्ण राष्ट्र का चिंतन किया. समग्र जीवन का विचार उन्होंने प्रस्तुत किया. इसीलिए उनके विचार आज भी उतने ही प्रभावी व सटीक हैं. उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अगर उनके जीवन में किये गये काम का १ प्रतिशत काम भी हम अपने जीवन में कर सकें तो यह जीवन सफल हो जाएगा. मातृभूमि के लिए जीना व उसी मातृभूमि के हित के लिये मृत्यु प्राप्त करना, यह सावरकरजी का आदर्श हम सभी को अपनाने की जरुरत है.
वह मुंबई में ‘विक्रम नारायण सावरकर – एक चैतन्य झरना’ नामक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे. इस अवसर पर मंच पर स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के अध्यक्ष अरुण जोशी विराजमान थे.
_DAS5371सरसंघचालक ने कहा कि सावरकर जी ने अपना सारा जीवन जिस समाज के लिये समर्पित किया, उस समाज ने सावरकरजी को क्या दिया? देश स्वतंत्र होने के पश्चात भी एक लज्जाजनक अभियोग से उनका नाम जोड़ना तथा उन्होंने अपने देश के लिये जहां बहुत दर्द झेला, वहां के स्मारक पर से उनका नाम हटाया जाना, लेकिन सावरकर ने अपने पूरे जीवन काल में किसी व्यक्ति को दोष नहीं दिया. वह अपने देश के लिये तन-मन-धन पूर्वक आजीवन जीते रहे. उनकी यह सोच हमारे जीवन को वास्तव में उजागर कर सकती है.
सावरकरजी ने स्वतंत्रता और समयानुकूलता इन दो तत्वों का अपने जीवन में हमेशा प्रचार किया. स्वातंत्र्य का अर्थ स्वआचरण का तंत्र, प्राचीन परंपराओं में से अच्छी बाते लेना गलत बातें छोडना और गलत बातों के लिये अपने पूर्वजों का आदरपूर्वक खंडन करना यह सावरकरजी का विचार था. प्राचीन काल के संदर्भ को लेते हुए गलत परंपराओं का अनुसरन करने के वे विरोधी थे. धर्म की उन्होंने बहुत स्पष्ट व्याख्या की. सब को समाकर लेता है, वह धर्म, कोई भी पूजा पद्धति धर्म नहीं होती. सदाचार से श्रेय व प्रेम प्राप्त होता है. यह अपने पुरखों का विचार है. विविधताओं को स्वीकार करने की बुध्दि जिस मातृभूमि ने हमें दी और जिस उदात्त संस्कृति का हम अनुसरण करते है, उसको मानने वाले वह हिेंदू है, ऐसी व्याख्या सावरकरजी ने कालानुरूप की._DAS5337
इस अवसर पर ज्येष्ठ विदर्भवादी नेता और पूर्व सांसद जांबुवंतराव धोटे ने बताया कि विक्रम राव सावरकर चैतन्य स्रोत थे. हर वस्तु की एक उम्र होती है, उसी तरह नैतिक मूल्यों की भी एक उम्र होती है. नैतिक मूल्यों की यह उम्र समाप्त हो रही है, उसी समय विक्रमराव जैसे द्रष्टा हमें छोड कर चले गये यह हमारे हित में नही है. आज हमारे देश में बहुत विकट स्थिति निर्माण हो गयी है. खुद को पूरोगामी कहने वाले लोग अगर कोई अपने विचार रखते है, तो उन पर हमला बोल देते है. हिंदू, हिंदूत्व व हिंदूराष्ट्र जैसे शब्दों का उच्चारण करते ही इन लोगों के पसीने छूट जाते है. सरसंघचालक डॉ. भागवत ने मदर तेरेसा के बारे में जो कहा वह शत प्रतिशत सत्य था. इतना ही नहीं हमारे देश के लगभग सभी इसाई व मुस्लिम इतिहास काल में हिंदू ही थे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देशभक्त बनाने वाला कारखाना है