Friday, November 27, 2015

डॉ. आंबेडकर ने धारा 370 का कभी समर्थन नहीं किया – इंद्रेश जी

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नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार जी ने कहा कि आज संविधान की प्रस्तावना को सही से समझने की सबसे ज्यादा जरुरत है. जिसके अनुसार भारत एक देश है, जिसमें विभिन्न पंथ, मत, भाषा, जाति के लोग रहते हैं. जिसका मतलब है कि भारतीय संस्कृति इन सब विविधताओं के साथ भी एक है. इंद्रेश कुमार जी संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी पर संविधान के मौलिक रूप की व्याख्या कर रहे थे. उन्होंने संविधान के बारे में मूलत: तीन बातों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर ने कभी भी धारा 370 का समर्थन नहीं किया व इसे तत्कालीन प्रधानमंत्री के कहने पर अस्थाई रुप से जोड़ा गया, उस समय तो संविधान बनाने वाली सभा के 10 में से 6 सदस्य इसके खिलाफ थे. उन्होंने सेक्लूयर शब्द को लेकर कहा कि यह शब्द मूल प्रस्तावना में नहीं था, इसे बाद में जोड़ा गया. अन्य धर्मों के लोगों से प्रश्न करते हुए कहा कि वे यह तो चाहते हैं कि हिंदू चर्च, मस्जिद आदि में जाये, पर क्या यह वे अपने ऊपर भी लागू करते हैं. अब समय आ गया है, जब एकतरफा सेक्यूलरिज्म़ नहीं चलेगा.
‘सविंधान की प्रस्तावना’ विषय पर दिल्ली के इंडिया इंटरनेश्नल सेंटर पर राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद् व राष्ट्रीय उर्दु भाषा विकास परिषद् द्वारा संयुक्त रुप से संगोष्ठी आयोजित की गई थी. संगोष्ठी के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इन्द्रेश कुमार जी थे. संगोष्ठी के IMG_20151126_130146अन्य वक्ता नेशनल बुक्स ट्रस्ट के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा, इग्नू की प्रो. चांसलर सुषमा यादव, राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद् की उपाध्यक्षा अरुणा जेठवानी, वरिष्ठ सिंधी शिक्षाविद् प्रो. मुरलीधर जेटली, वरिष्ठ उर्दु शिक्षाविद् प्रो. ख्वाजा मुइंतिन थे. संगोष्ठी का संचालन राष्ट्रीय उर्दु भाषा विकास परिषद् के निदेशक सैयद अली करीम ने किया और आभार राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद् डा. रविप्रकाश टेकचंदाणी ने व्यक्त किया. बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि प्रत्येक नागरिक के लिये संविधान जानना बेहद जरुरी है, तभी वह उसमें निहित आचरण को निभा पायेगा. हम भारतवासी है व भारत हमारा है, यही भाव संविधान का मूल मंत्र है. प्रो. मुरलीधर जेटली ने सिंधी भाषा कैसे संविधान में जोड़ी गई, उसका विस्तार से इतिहास बताया. सुषमा यादव ने संगोष्ठी की प्रशंसा करते हुए कहा कि विभिन्न भाषाओं द्वारा संविधान को जानने का प्रयास हो रहा है. बाबा साहेब आंबेडकर के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर उनकी चलती तो आज भारत आर्थिक व सामाजिक लोकतंत्र के ज्यादा नजदीक होता. अरुणा जेठवानी व प्रो. ख्वाजा मुइंतिन ने भी संगोष्ठी को महत्वपूर्ण बताया.

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