Saturday, August 25, 2012

जम्मू कश्मीर : तथ्य एवं भावी दिशा

जम्मू कश्मीर : तथ्य एवं भावी दिशा

Source: VSK-JODHPUR Date: 8/25/2012 11:53:28 AM

undefinedजोधपुर : जम्मू कश्मीर राज्य पिछले 65 वर्षों से जिस त्रासदी से गुजर रहा है उसकी जड़ें दिल्ली में हैं। यह समस्या इतनी पेचीदा नहीं होती यदि दिल्ली ने इसे सही परिप्रेक्ष्य में समझा होता और इसके हल के लिये ईमानदार प्रयास किये होते। जम्मू कश्मीर अध्ययन केन्द्र द्वारा आयोजित एक परिसंवाद में अपने विचार व्यक्त करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने यह निष्कर्ष व्यक्त किया।
“जम्मू कश्मीर : तथ्य एवं भावी दिशा” विषय पर आयोजित इस परिसंवाद को राज्य के पूर्व राज्यपाल ले. जन. एस. के. सिन्हा, राज्यसभा में भाजपा संसदीय दल के उपनेता रविशंकर प्रसाद, जम्मू कश्मीर विधानसभा में जम्मू स्टेट मोर्चा के विधायक दल के नेता अश्वनी शर्मा, पैंथर पार्टी के विधायक दल के नेता व पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष बलवंत सिंह मनकोटिया, जम्मू वि. वि. के प्रो. निर्मल सिंह, जम्मू कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ व स्तंभकार दयासागर, तहरीक-ए-इन्साफ के चेयरमैन फारुख मीर, वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय और जवाहरलाल कौल, आई बी के सेवानिवृत अतिरिक्त निदेशक जे एन राय सहित अनेक प्रतिष्ठित लोगों ने संबोधित किया।
राज्य के राज्यपाल रह चुके श्री सिन्हा ने कहा कि 1948 और 1971 में कश्मीर समस्या को हल करने का अवसर भारत को प्राप्त हुआ था लेकिन देश के नेतृत्व ने इस अवसर को गंवा दिया।
जम्मू कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ दयासागर ने राज्य से संबंधित अनेक मुद्दों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य कुछ लोगों की निजी महत्वाकांक्षाओं तथा नेतृत्व की राजनैतिक अपरिपक्वता का शिकार हुआ है। संवैधानिक मुद्दों की गलत व्याख्या की गयी, विलय को सशर्त मानने जैसे भ्रमों के निराकरण के लिये प्रयास करने बजाय उन्हें बढ़ने दिया गया, अलगाववादियों को निरंतर महत्व दिया गया वहीं राष्ट्रीय दृष्टिकोण रखने वालों को उपेक्षित किया गया। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370, जो केवल एक प्रक्रियात्मक तंत्र भर है, को पवित्र गाय बना कर प्रस्तुत किया गया जिसके कारण समस्या ही नहीं बल्कि अलगाव भी बढ़ा। सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता अनिरुद्ध राजपूत ने पॉवर पॉइंट द्वारा अनुच्छेद 370 के प्रभाव को प्रदर्शित किया।
तहरीक-ए-इंसाफ के चेयरमैन व पूर्व विधायक फारुख मीर ने कश्मीर और जम्मू के आतंकवाद पीड़ितों में सरकार के स्तर पर किये जा रहे भेद-भाव की आलोचना करते हुए इसे मानवाधिकार उल्लंघन का मामला बताया। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर की समस्या हिन्दू मुसलमान की नहीं बल्कि वहां के निवासियों के विकास एवं सुरक्षा की है।
जम्मू स्टेट मोर्चा के विधायक दल के नेता अश्वनी शर्मा ने कहा कि 1947 के विभाजन और आक्रमण, 1962, 1965, 1971 और करगिल युद्ध के समय विस्थापन, छंब के विस्थापित और 1989 में आतंकवाद के कारण घर छोड़ने को मजबूर लोगों के लिये ठोस पुनर्वास नीति आज तक नहीं बनायी गई । सरकार की जनविरोधी नीतियों के चलते जम्मू शहर विस्थापितों का शहर बन गया है।
राज्यसभा सदस्य एवं सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता भूपेन्द्र यादव द्वारा राज्य में अनुसूचित जाति, जनजाति तथा पिछड़े वर्गों की दयनीय स्थिति तथा शेष देश में उक्त वर्गों को मिलने वाली सुविधाओं से राज्य के नागरिकों के वंचित रहने पर चिन्ता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि जनजाति वर्ग के लोग आज भी राजनैतिक आरक्षण की सुविधा से वंचित हैं। संविधान के 73 और 74वें संशोधन राज्य में लागू न होने के कारण पंचायती राज व्यवस्था ठप्प है। स्थानीय स्तर पर होने वाले छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिये भी सरकार का मुंह ताकना पड़ताहै। वरिष्ठ पत्रकार जवाहर लाल कौल ने केन्द्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर के पाक अधिक्रांत क्षेत्र को मुक्त कराने के लिए कोई प्रयास नहीं किये जाने पर खेद व्यक्त करते हुए हाल ही में केन्द्र सरकार द्वारा गठित वार्ताकार दल की रिपोर्ट में पाक अधिक्रांत क्षेत्र को पाक प्रशासित क्षेत्र कहे जाने पर घोर आपत्ति व्यक्त की।
परिसंवाद के सह-आयोजक भारतीय वित्त सलाहकार समिति के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया। संचालन श्री अनिल गुप्ता ने किया। उन्होंने सरकार से वार्ताकारों की रिपोर्ट को खारिज किये जाने की मांग की।

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