Friday, September 28, 2012

हर स्वयंसेवक के जीवन को सुदर्शन जी का व्यक्तिगत स्पर्श था : सरसंघचालक


हर स्वयंसेवक के जीवन को सुदर्शन जी का व्यक्तिगत स्पर्श था : सरसंघचालक

Source: NEWS BHARATI, NAGPUR      Date: 9/27/2012 6:58:13 PM
$img_titleरा. स्व. संघ नागपुर महानगर की श्रद्धांजलि सभा
नागपुर, २७ सितंबर २०१२ : गंगाजल के समान निर्मल और अति कोमल मन के धनी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भूतपूर्व सरसंघचालक स्व. कुप. सी. सुदर्शन जी का, प्रत्येक स्वयंसेवक के जीवन को व्यक्तिगत स्पर्श था और यहीं उनका अनोखा भक्तियोग था, इन शब्दों में सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत ने  स्व. सुदर्शन जी को श्रद्धांजलि अर्पण की. रा. स्व. संघ नागपुर महानगर की ओर से कल, बुधवार, २६ सितंबर को आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वे बोल रहे थे.
मंच पर नागपुर के महापौर अनिल सोले और उपमहापौर संदीप जाधव, राष्ट्र सेविका समिति की भूतपूर्व प्रमुख संचालिका प्रमिलाताई मेढे, महानगर संघचालक डॉ. दिलीप जी गुप्ता, स्वामिनी ब्र्रह्मप्रकाशानंद जी, राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात ‘नीरी’ संस्था के भूतपूर्व संचालक डॉ. तपन चक्रवर्ती, राष्ट्रीय सिक्ख संगत के कुलवंत सिंह जी तुली, भूतपूर्व सांसद और दैनिक हितवाद के प्रबंध संपादक बनवारीलाल पुरोहित, महाराष्ट्र भाजपा के महासचिव और विधायक देवेन्द्र फडणवीस उपस्थित थे.
अपने भावपूर्ण मनोगत में डॉ. मोहन जी कहा कि, सुदर्शन जी से सरसंघचालक पद के सूत्र ग्रहण किये तब, मार्गदर्शन के लिए सुदर्शन जी है, इस भावना का सहारा था. आज वह सहारा खो गया है.
सुदर्शन जी का व्यक्तित्व शब्दबद्ध करते हुए डॉ. मोहन जी ने कहा कि, सुदर्शन जी की प्रत्येक कृति और सूचना के पीछे तर्क होता था और वे, वह तर्क अत्यंत सुलभता से समझा भी देते थे. दैनंदिन जीवन और संघ पद्धति में की छोटी-छोटी, सामान्य बातों पर भी उन्होंने गहन चिंतन किया था. उन बातों के पीछे का मूलभूत सार उन्होंने ढूंड निकाला था. उन्होंने अपना व्यक्तित्व अत्यंत कठोर परिश्रम से गढा था. संघकार्य के लिए शरीर से आवश्यक परिश्रम करा लेने की उनकी किमया अद्भूत थी.
उन्होंने आगे कहा कि, संघकार्य ईश्‍वरीय है; सामाजिक भी है. इस कारण वह चलते ही रहेगा. परंतु, अब सुदर्शन जी के विचार, लेख, छायाचित्र हमारे सामने होगे; लेकिन वे नहीं होंगे. उनका सहवास नहीं होगा. यह क्षति हमें सहन करनी ही पड़ेगी. सब स्वयंसेवक सुदर्शन जी को कृतिरूप श्रद्धांजलि अर्पण करेंगे, ऐसी मैं गारंटी देता हूँ, ऐसा उन्होंने कहा.
तर्कपूर्ण विवेचन और भारतीय चिकित्सा पद्धति पर अविचल विश्‍वास ये सुदर्शन जी की विशेषताएँ थी, इन शब्दों में महानगर संघचालक डॉ. दिलीप जी गुप्ता ने मनोगत व्यक्त किया.
महापौर अनिल सोले ने कहा कि, सुदर्शन जी सामाजिक, राजनीतिक परिस्थिति पर स्पष्ट भूमिका रखते थे. हर समय वे अंतिम व्यक्ति का विचार करते थे. परिणामों का विचार न कर उन्होंने अंत तक भारतीय अर्थव्यवस्था का पुरजोर समर्थन किया.
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीन गडकरी के प्रतिनिधि के रूप में बोलते हुए विधायक देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि, सुदर्शन जी स्वदेशी और स्वावलंबन के बारे में आग्रही थे. वे केवल समस्या बताकर रूकते नहीं थे, समस्या का हल भी बताते थे. भविष्य में निर्माण होने वाले ऊर्जा के संकट की आहट से वे व्यथित थे. उनका सामाजिक, आर्थिक, सामरिक चिंतन देखने से पता चलता है कि वे विश्‍व स्तर के बुद्धिजीवी (स्टेट्समन) थे. उनके विचारों में भारत के महासत्ता बनने की ऊर्जा थी.
राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी संशोधन संस्था - नीरी - के भूतपूर्व संचालक डॉ. तपन चक्रवर्ती ने सुदर्शन की यादें दोहराई. गोविज्ञान संशोधन केन्द्र के साथ काम करते समय सुदर्शन जी के सहवास का अवसर मिला. उनकी कृति और उक्ति में सहज प्रेरणा होती थी, ऐसा उन्होंने कहा.
राष्ट्रीय सिक्ख संगत के कुलवंत सिंह जी तुली ने कहा कि, उनके सहवास में मैं भक्तिरस में खो जाता था. उनके विचार सादे और सरल थे जो सामान्य आदमी भी सहजता से समझ पाता था. उनका गुरूग्रंथसाहब का अध्ययन, चिंतन और उसके बारे में की आत्मीयता बड़े बड़े सिक्ख धर्मगुरुओं को भी चकित करनेवाली थी. वे सही अर्थ में संत थे.
भूतपूर्व सांसद बनवारीलाल पुरोहित ने स्व. सुदर्शन जी की तुलना योगी महापुरुषों से की. उन्होंने कहा कि सुदर्शन जी कर्मयोगी और ॠषितुल्य व्यक्तित्व के धनी थे.
स्वामिनी ब्रह्मप्रकाशानंद जी ने उनके गुरु आर्ष विद्या गुरूकुलम् के संस्थापक पूजनीय स्वामी दयानंद सरस्वती का संदेश पढ़कर सुनाया. सुदर्शन जी प्रात:स्मरणीय थे, इस एक वाक्य में ही स्वामी दयानंद ने सुदर्शन जी के जीवन का सार बताया. हर कोई देश के लिए कैसे जीये, इसका आदर्श उन्होंने अपने आचरण से लोगों के सामने रखा, ऐसा उन्होंने कहा.
राष्ट्र सेविका समिति की भूतपूर्व प्रमुख संचालिका प्रमिलाताई मेढे ने कहा, सुदर्शन जी विद्वत्ता और वैज्ञानिक दृष्टि के धनी थे. उनके निधन से हुई क्षति की पूर्ति करने का प्रयास करने की जिम्मेदारी हम सब की है.
मा. मोहन जी के मनोगत के पूर्व संस्कार भारती नागपुर के श्याम देशपांडे ने कवि मुकुंद पुल्लीवार कृत गीत प्रस्तुत किया.
नागपुर की सैकड़ों संसथाओं के प्रतिनिधियों ने स्व. सुदर्शन जी के छायाचित्र को पुष्पांजलि अर्पण की. स्वामी रामदेव और गायत्री परिवार के डॉ. प्रणव पंड्या के शोकसंदेश पढ़कर सुनाये गए. कार्यक्रम का संचालन अरविंद कुकडे ने किया.
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