Monday, May 29, 2017

देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए संस्थानों की विदेशी फंडिंग पर रोक लगानी होगी – मधु किश्वर जी

टना (विसंकें). मानुषी की संस्थापक संपादक एवं विख्यात लेखिका प्रो. मधु किश्वर जी ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए संस्थानों की विदेशी सहायता पर रोक लगानी होगी. जब तक देश की पत्रकारिता, शैक्षणिक संस्थानएनजीओ आदि विदेशी फंडिंग से चलेगी, तब तक आंतरिक सुरक्षा की बात करना बेमानी होगा. आज विदेशी फडिंग का ही नतीजा है कि देश विरोधी पत्रकारिता सम्मानित हो रही है. अमेरिकापाकिस्तान के गेम प्लान को जमीन पर उतारने वाले लोग हमारे मीडियाशिक्षारक्षाव्यवसाय जैसे क्षेत्रों में घुसे हुए हैं. इनके रहते आंतरिक सुरक्षा की कोई भी कोशिश सफल नहीं होगी. मधु जी शनिवार 27 मई को विश्व संवाद केन्द्र द्वारा आयोजित आद्य पत्रकार देवर्षि नारद स्मृति कार्यक्रम में देश की आंतरिक सुरक्षा’ विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रही थीं.
उन्होंने कहा कि आज विदेशी फंडिंग का ही नतीजा है कि फासीवादी जैसे नकारात्मक शब्द को यहां की मीडिया द्वारा बात-बात पर उछाला जाता है और इतना ही नहीं भारत के लिए इस शब्द का उपयोग वैश्विक मंचों पर किया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट मानना है कि देश की आंतरिक सुरक्षा सुढृढ़ रहनी चाहिए. आज जम्मू कश्मीर के हालात बेहद खराब हैं. कुछ-कुछ ऐसी ही स्थिति पश्चिम बंगाल की भी है. दुःख की बात है कि मीडिया में निष्पक्ष रूप से कश्मीर या बंगाल की हिंसक घटनाओं का प्रकाशन-प्रसारण नहीं हो पा रहा है. बंगाल समस्या के पीछे मूल कारण विदेशी घुसपैठ है. इस घुसपैठ पर वहां की राज्य सरकारों की तुष्टिकरण एवं वोट बैंक की नीति का कुप्रभाव रहा है. यही कारण है कि बंगाल एवं पूर्वोत्तर भारत में पिछले 30 वर्षों में करोड़ों विदेशी घुसपैठियों का जमावड़ा हुआ है. इस कारण वहां के स्थानीय लोगों को विस्थापित होना पड़ा. आर्थिक संरचनाएं ध्वस्त हो गयी और कानून व्यवस्था की जो स्थिति खराब हुर्ह, उसका असर पूरे देश पर हुआ.
कार्यक्रम अध्यक्ष पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायधीश वीएन. सिन्हा जी ने कहा कि देश की सुरक्षा को अक्षुण्ण रखने के लिए पर्याप्त कानून हैं, जिनका निष्पक्ष रूप से अनुपालन हो तो एक सशक्त भारत की छवि बरकरार रखी जा सकती है. लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती है, जब उपलब्ध कानून का अपने फायदे के लिए दुरूपयोग होने लगता है. देश की आंतरिक सुरक्षा के मामले में भी यह बात लागू होती है. संविधान की मूल आत्मा के विपरीत जाकर व्यवस्था स्थापित करने और निजी लाभ के लिए उसको परंपरा का रूप देने के कारण ही कश्मीर की समस्या ने एक नासूर का रूप धारण कर लिया है. बंगाल की स्थिति तो उससे भी बुरी है क्योंकि राष्ट्रीय परिदृश्य पर बंगाल में हो रही हिंसक घटनाओं का जिक्र न के बराबर होता है.
प्रो. दीप्ति कुमारी ने कहा कि आज के समय में संगोष्ठी का यह विषय इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि बंगाल में हो रही हिंसक घटनाओं का सही विवरण पारंपरिक मीडिया देने में नाकाम रहा है. ऐसे में यह जरूरी है कि देशहित में कार्य करने वाली संस्थाएं सामने आकर आम जनमानस तक देश में हो रही हिंसक घटनाओं का सही विवरण प्रस्तुत करें.
कार्यक्रम में विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष श्रीप्रकाश नारायण सिंह जी ने गणमान्यजनों का आभार व्यक्त किया. कार्यक्रम के आरंभ में सुपर कॉप के नाम से मशहूर पूर्व डीजीपी केपीएस गिल के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. अतिथियों द्वारा विश्व संवाद केंद्र द्वारा प्रकाशित स्मारिका बिहार में मीडिया’ का विमोचन किया गया. देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद पत्रकारिता शिखर सम्मान’ वरिष्ठ पत्रकार रवीन्द्र कुमार, ‘केशवराम भट्ट पत्रकारिता सम्मान’ रामाशंकर मिश्र तथा बाबूराव पटेल रचनाधर्मिता सम्मान’ छायाकार अजीत कुमार को प्रदान किया गया. पाटलिपुत्र सिने सोसायटी द्वारा आयोजित डॉक्युमेंट्री एवं शॉर्ट फिल्म प्रतियोगिता के पुरस्कार विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया.

No comments: