Thursday, December 15, 2016

भुवनेश्वर में विशाल ¨हदू अध्यात्म सेवा मेले

भुवनेश्वर
राजधानी में विशाल ¨हदू अध्यात्म सेवा मेले का भव्य आगाज गुरुवार को हुआ। अपराह्न में सर्वप्रथम श्रीराम मंदिर से बरमुंडा मेला परिसर तक पारंपरिक वाद्य यंत्र के साथ मनमोहक झांकियों के बीच कलश यात्रा निकाली गयी। जिसे देखने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे लोगों की भीड़ एकत्र थी। कलश यात्रा मेला परिसर में पहुंचने के बाद मेला का शुभारंभ पुरी के गजपति महाराज दिव्य ¨सहदेव ने किया। इससे पहले मुरली मनोहर शर्मा ने पांच दिन तक चलने वाले इस मेले के दौरान होने वाले विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
पांच दिवसीय इस मेले का शुभारंभ करते हुए गजपति महाराज ने कहा कि वह पहली बार इस तरह का मेला उत्कल प्रांत में देख रहे हैं। गजपति महाराज ने कहा कि जहां पर अध्यात्म है। सेवा वहां अपने आप जुड़ जाती है। उसी तरह यदि आप निष्काम सेवा करें तो अध्यात्म से अपने आप जुड़ जाएंगे। गजपति महाराज ने कहा कि ¨हदू का पहला कर्तव्य अध्यात्म के रास्ते पर चलना है। जहां पर अध्यात्म नहीं है, सेवा नहीं है वहां ¨हदुत्व नहीं हो सकता है। अध्यात्म से प्रेरित निष्काम सेवा आतरिक मैला साफ हो जाता है। सनातन वैदिक धर्म पूरी दुनिया को यह शिक्षा देते आ रहा है।
























मेले में शाम को अतिथि के तौर पर उपस्थित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुस्लिम मंच के आवाहक इंद्रेश कुमार ने इस अवसर पर कहा कि भारत ईश्वरीय देश है। दुनिया में जितने भी अवतार हुए हैं, सब भारत में हुए हैं। जिस प्रकार से ईश्वर एवं खुदा की कोई जन्मतिथि नहीं है उसी तरह भारत की कोई जन्मतिथि नहीं है। भारत को दुनिया के देशों का नेतृत्व करना है। यह बात हमें अभी से समझनी होगी। विश्व का एकमात्र मानवीय और आध्यात्मिक देश भारत है। उन्होंने इस अवसर पर हिन्दू स्प्रीचुअल र्सिवस फेयर का मतलब भी विस्तार से बताया। ¨हदू र्सिवस का मतलब गरीब व गरीबों का सम्मान करना है, क्योंकि वही हमें स्वर्ग देगा। उन्होंने उपस्थित लोगों से मानवीय कर्तव्य को करने का अनुरोध किया। ¨हदू संस्कृति से ¨हदू सेवा का जन्म हुआ है। जिसे कोई नहीं दे सकता, उसे ईश्वर देता है और उसे ¨हदू फेयर कहते हैं। दूसरों की सेवा में अपना सौभाग्य समझेंगे यह ¨हदू र्सिवस है।
मौके पर परमहंस प्रज्ञानंद जी महाराज ने कहा कि कुछ ऐतिहासिक गलती के कारण ¨हदू संस्कृति संकुचित हो रही है। जो अपने माता-पिता को मानते हैं वही ¨हदू हैं। उन्होंने कहा कि गो माता की सुरक्षा से पर्यावरण, संस्कृति, परंपरा सबकुछ सुरक्षित रहेगा। महाराज ने भारत में वैदिक दिन प्रतिदिन घट रही वैदिक परंपरा के प्रति ¨चता प्रकट की और बढ़ते पाश्चात्य संस्कृति के कुप्रभाव के बारे में भी लोगों को जानकारी दी। प्रज्ञानंद जी महाराज ने कहा कि आज विदेशी हमारी नकल कर नीचे बैठकर भोजन करते है, मगर हमारे यहां उल्टा हो रहा है। आयोजन की देखरेख कर रहे गुणवंत ¨सह कोठारी ने पर्यावरण प्रदूषण से लेकर समाज में समाज में दिख रही नारी समस्या एवं वृद्ध माता पिता के अनादर जैसी समस्या पर विस्तार से अपना विचार रखा। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान भारत दर्शन में है। प्राणी कल्याण के लिए सेवा कार्य को सामने लाने को आह्वान किया। मेला के आयोजक कमेटी की तरफ से डा.पूर्णचन्द्र महापात्र, मुरली मनोहर शर्मा, अनिल धीर आदि ने कार्यक्रम का संचालन किया।

By Golakha Chandra Das

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