Thursday, August 06, 2015

कभी आमना सामना हो गया तो आतंकियों को छोड़ूंगा नहीं……..रॉकी ने जो कहा वो कर दिखाया

यमुनानगर (विसंकें). जिले के रामगढ़ माजरा गांव के शीशपाल जी का पुत्र रॉकी ऊधमपुर में हुए आतंकी हमले में बुधवार 05 अगस्त को शहीद हो गया. जांबाज रॉकी ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपनी शहादत देकर 40 जानें बचाईं. उन्होंने संघ की शाखा पर सीखे देशभक्ति के जज्बे का प्रदर्शन किया. रॉकी ने संघ का स्वयंसेवक था, तथा प्राथमिक वर्ग (सात दिवसीय प्रशिक्षण) का प्रशिक्षण प्राप्त किया था. परिजनों को रॉकी की शहादत पर गर्व है. रामगढ़ माजरा में हर आंख नम है.
Rocky
रॉकी वर्ष 2011 में बीएसएफ में चयनित हुए थे. उन्होंने 13 नवंबर 2011 को बीएसएफ की ट्रेनिंग शुरू की. पश्चिम बंगाल में ट्रेनिंग लेने के बाद बीएसएफ में तैनाती पाई थी. वर्तमान में रॉकी के जिम्मे श्रीनगर से जम्मू तक डाक पहुंचाने का कार्य था. श्रीनगर से जम्मू जाने के दौरान ऊधमपुर के पास पाकिस्तान से आए आतंकियों ने बीएसएफ की बस पर हमला कर दिया. इस दौरान बस में 42 लोग सवार थे. आतंकियों के गोलीबारी शुरू करने के तुरंत बाद रॉकी ने संभलते हुए आतंकियों को बस में घुसने से रोका और फायरिंग करते हुए एक आतंकी को मौत के घाट उतार दिया. आतंकियों की फायरिंग में गोली लगने से बुरी तरह घायल होने के बावजूद रॉकी ने आतंकियों पर फायरिंग करना जारी रखा. एक आतंकी के मारे जाने के बाद दूसरा आतंकी वहां से भाग निकला, जिसे बाद में जांबाज स्थानीय लोगों ने पकड़ लिया. आतंकियों की फायरिंग में रॉकी के साथ ही पश्चिम बंगाल के शुभेंदु भी शहीद हुए थे.
रॉकी ने शहादत देकर 40 लोगों की जान बचाई – आईजी
बीएसएफ के आईजी राकेश शर्मा ने कहा कि रॉकी ने अपनी जांबाजी का प्रदर्शन करते हुए न केवल एक आतंकी को मार गिराया, बल्कि बस में सवार 40 लोगों की जान भी बचाई. उन्होंने कहा कि आतंकी बस में घुस जाते तो बस में सवार लोगों की जान जा सकती थी. रॉकी ने अपनी जान पर खेलकर सभी लोगों की जान बचाई. उन्होंने कहा कि रॉकी की शहादत पर देश को गर्व है.
रॉकी बेहद संवेदनशील था. वह रोज फोन करके मां से बात करता था. घर की हर छोटी-बड़ी बात को लेकर वह मां से बात करता था. रॉकी के छोटे भाई रोहित ने बताया कि वह छोटी बहन की शादी को लेकर काफी चिंतित रहता था. मां से बात करते समय वह बहन के रिश्ते के लिए लडक़ा ढूंढने की बात जरूर पूछता था. साथ ही भाई के रोजगार के बारे में भी बात जरूर करता था. रॉकी दो भाइयों और एक बहन में बड़ा था. भाई रोहित ने पिछले दिनों सीआरपीएफ की पिंजौर में हुई भर्ती के दौरान शारीरिक परीक्षा पास कर ली है और अब वह लिखित परीक्षा की तैयारी में लगा है.
परिवार को बेटे की शहादत पर गर्व
परिवार को रॉकी की शहादत पर गर्व है. पिता शीशपाल ने रूंधे गले से कहा कि उन्हें बेटे की शहादत पर गर्व है. रॉकी के भाई रोहित ने कहा कि रॉकी हमेशा कहता था कि कभी आमना-सामना हो गया तो आतंकियों को छोडूंगा नहीं और अपनी बात को उसने सही साबित कर दिखाया. रॉकी की शहादत पर पूरे देश को गर्व है.

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